बीती रात 10:24 मिनट पर उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. इस भूकंप का केंद्र उत्तराखंड का चमोली जिला था. रात 10:24 पर चमोली ,पौड़ी ,रुद्रप्रयाग ,ऋषिकेश, गोपेश्वर ,बद्रीनाथ, थराली,देहरादून, श्रीनगर, नैनीताल ,बागेश्वर ,भीमताल, पिथौरागढ़ ,चंपावत ,हल्द्वानी में भूकंप के झटके महसूस किए गए. गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक कई जिलों में भूकंप के झटकों से लोग दहशक में आ गए और लोगों को 1991 का उत्तरकाशी का भूकंप और 1999 का चमोली का भूकंप याद आ गई.
यूं तो भारत में भूकंप के झटके लगातार हर दिन आते रहे हैं. इसके लिए पूरे भारत मे 170 से ज्यादा भूकंप को मापने के लिए स्टेशन लगाए गए हैं.
नेशनल सेंटर का सीस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक, भारत मे मार्च 2026 से अगस्त 2026 तक 770 छोटे बड़े भूकंप आये है. 770 से ज्यादा भूकंप आने का मतलब धरती लगातार हलचल हो रही है.
6 महीनों के भारत में आये भूकंप के आंकड़ों को देखे तो मार्च 2026 में भारत में 112 भूकंप आए. इसमें सबसे ज्यादा सिक्किम में अकेले 20 भूकंप आए,
- असम- 14 भूकंप
- अरुणाचल प्रदेश- 13
- लद्दाख-11
- हिमाचल- 09
- मणिपुर-07
- गुजरात-5
इसके अलावा, महाराष्ट्र, मेघालय और नगालैंड में चार-चार भूकंप आए. इसी तरह से मार्च के आंकड़े को देखे तो उत्तर में 28 और उत्तर पूरब में 67 भूकंप, दक्षिण में 1,, पश्चिम में 10 मध्य में दो और पूरब में दो भूकंप आए.
कुछ महीनों में ही इतने भूकंप
अप्रैल 2026 में भारत में 134 भूकंप आए. इसमें भी सबसे ज्यादा सिक्किम में 17 ,असम में 16, लद्दाख में 15 और महाराष्ट्र में 14 भूकंप आए. वहीं उत्तराखंड में 13 ,मणिपुर में 11, अरुणाचल में 12, गुजरात में आठ, जम्मू कश्मीर में 6 मेघालय में पांच ,भूकंप के झटके आए. इसी तरह से उत्तर पूरब में 63, उत्तर में40, पश्चिम में 23 ,पूरब में 4, मध्य में दो और दक्षिण में भी दो भूकंप आए.
मई 2026 में भारत में 125 भूकंप आए. इसमें सबसे ज्यादा असम में 25, महाराष्ट्र में 19, अरुणाचल प्रदेश में 17, मणिपुर में 11, मध्य प्रदेश में 9 ,नागालैंड में 8 , मेघालय में 6, उत्तराखंड में पांच भूकंप आए. इसी तरह से उत्तर पूरब में 69, उत्तर में 14, पश्चिम में 23 , मध्य में 09 और दक्षिण में 4 भूकंप आए.
जून 2026 में भारत में 123 भूकंप आए. इसमें सबसे ज्यादा असम में 21 ,अरुणाचल प्रदेश में , 19 हिमाचल में 17, मणिपुर में 10 , महाराष्ट्र में 9 ,मेघालय में 07, सिक्किम में 08, उत्तराखंड में चार भूकंप आए. इसी तरह से उत्तर पूरब में 68, उत्तर में 26, पश्चिम में 16 , मध्य में 08 और दक्षिण में 03 भूकंप आए.
जुलाई 2026 में भारत में 122 भूकंप आए जिसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 27 ,मणिपुर और मेघालय में 13, असम और सिक्किम में 11, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में 10, भूकंप आए,इसी तरह से उत्तर पूरब में 60, उत्तर में 21, पश्चिम में 29 , मध्य में 05 और दक्षिण में 03 भूकंप आए,
अगस्त 2026 में भारत में 154 भूकंप आए, जिसमें सबसे ज्यादा 40 भूकंप महाराष्ट्र में आए, हिमाचल प्रदेश में 22, अरुणाचल प्रदेश में 14, मेघालय में 10 ,असम और मणिपुर में 9, जम्मू कश्मीर और लद्दाख में 08, उत्तराखंड में 07 भूकंप आए. इसी तरह से उत्तर पूरब में 51, उत्तर में 47, पूरब में 3,पश्चिम में 41 , मध्य में 03 और दक्षिण में 05 भूकंप आए.
किस ओर इशारा कर रहे हैं ये आंकड़ें?
यह आंकड़े काफी है यह बताने के लिए कि भारत में भूकंप किस तरह से लगातार आ रहे हैं और इसकी वजह यूरेशियन प्लेट और भारतीय प्लेट का लगातार करोड़ सालों से टकराना है.
भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट को धकेल रही है. भारत के हिमालयन रीजन में सबसे ज्यादा भूकंप आ रहा है.
भारत में 1950 में असम तिब्बत का 8.6 रिक्टर का भूकंप आया था. 1934 का बिहार नेपाल सीमा पर आया 8.1 रिक्टर का भूकंप, 1897 में शिलांग में 8 रिक्टर का भूकंप, 2001 का गुजरात मे भुज का 7.7 रिक्टर का भूकंप, 1993 में महाराष्ट्र के लातूर में 6.2 और 6.4 रिक्टर का भूकंप ,1991 में उत्तराखंड के उत्तरकाशी में 6.1 रिक्टर का भूकंप, 2015 में नेपाल में 7.8 रिक्टर का भूकंप.
वहीं उत्तराखंड में पिछले 500 साल में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है, वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमाचल के कांगड़ा से लेकर बिहार नेपाल के बॉर्डर तक जो बीच का हिस्सा सबसे ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है उत्तराखंड ही है. उत्तराखंड का ज्यादातर क्षेत्र भूकंप के जोन 4 और जोन 5 में आता है.
जोन 5 जो सबसे अधिक संवेदनशील है उसमें रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिले आते हैं जबकि जोन 4 उच्च संवेदनशील क्षेत्र में देहरादून टिहरी नैनीताल उधम सिंह नगर चंपावत हरिद्वार पौड़ी और अल्मोड़ा जिले आते हैं.
उत्तराखंड में 1803 का गढ़वाल भूकंप जिसकी तीव्रता 7.5 से 8 रिक्टर स्केल पर थी. वही 1991 का उत्तरकाशी भूकंप और 1999 चमोली भूकंप बड़ा भूकंप माना जाता है लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक उतना बड़ा भूकंप नहीं माना जाता है जितनी ऊर्जा उत्तराखंड के नीचे धरती में है.
वैज्ञानिक मानते हैं कि 50 मिलियन साल पहले इंडियन प्लेट्स के टकराने से हिमालय की उत्पत्ति हुई थी लगातार इंडियन प्लेट हर साल 40 से 45 मिमी की दर सर मूव करती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अभी उत्तराखंड वाले क्षेत्र के धरती के भीतर भूकंपीय ऊर्जा केवल 5 से 6% ही निकली है और वैज्ञानिक उत्तराखंड के हिस्से को सेंटर सीस्मिक गैप मानते हैं.
वैज्ञानिकों का मानना है कि भूकंप आने के कारण धरती के अंदर टैकटोनिक प्लेट्स जो लगातार एक्टिव है जिसकी वजह से भूकंप आ रहे हैं. खासकर भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट्स के बीच के टकराव.
उत्तराखंड के जमीन के नीचे दबी है असीम ऊर्जा
धरती के अंदर चट्टानों के टूटे और फिशेज में से जो दरारे या फिर जो फॉल्ट बन जाते हैं उसकी वजह से काफी दबाव पड़ जाता है चट्टानों के अचानक से अपनी जगह बदलने की वजह भी भूकंप आने का कारण है. भारत में पूरा हिमालय क्षेत्र भूकंप के खतरे में सबसे ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है.
वैज्ञानिक कहते हैं कि भूकंप जो भी उत्तराखंड में आए हैं उस उर्जा उतनी नहीं निकली है जितनी मानी जा रही है. लेकिन यह छोटे-छोटे भूकंप इस बात का प्रमाण नहीं है कि बड़ा को भूकंप नहीं आएगा जबकि यह इस बात का प्रमाण है कि भूकंप आएगा .लेकिन कब, कहा ,किस समय,ये कोई नही जानता है .
वहीं वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के पूर्व वैज्ञानिक भू-वैज्ञानिक अजय पॉल ने बताया कि उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में भूकंप आना सामान्य बात है. इसकी वजह लगातार भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट सेट टकरा रही है. जिसकी वजह से हिमालय के इस क्षेत्र में भूकंप आ रहे हैं.
अजय पॉल ने बताया कि उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में छोटे-छोटे भूकंप हर दिन आते हैं लेकिन छोटे-छोटे भूकंप आने का यह अर्थ नहीं निकल जाना चाहिए कि भविष्य में कोई बड़ा भूकंप नहीं आएगा.
पूर्व वैज्ञानिक भू वैज्ञानिक अजय पॉल ने जानकारी दी कि हिमालय के नीचे कई ऐसे फॉल्ट यानी दरारे हैं. इसकी वजह से भूकंप आते हैं.
वही वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के भू-वैज्ञानिक नरेश कुमार कहना है कि 1905 के कांगड़ा भूकंप और 1950 के बिहार-नेपाल भूकंप के बाद एक बड़ा सीस्मिक गैप जिसे हम उत्तराखंड का हिस्सा कहते हैं. वहां पर कोई आठ मेग्नीट्यूड का भूकंप नहीं आया है और हिमालय के इस क्षेत्र में भूकंप आने की संभावना बनी हुई है.
भू-वैज्ञानिक नरेश कुमार ने बताया कि पूरा उत्तराखंड जोन 5 और जोन 4 में है जहां सबसे ज्यादा भूकंप की संभावित क्षेत्र है. वैज्ञानिक नरेश कुमार ने बताया कि उत्तराखंड हिमालय के जिस क्षेत्र में यह भूकंप आया है वह मैन सेंट्रल ट्रस्ट है जहां पर सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं .
नरेश कुमार ने बताया कि भूकंप कब आएगा इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है लेकिन हम पहले के आए भूकंप के आधार पर यह जरूर कह सकते हैं कि उत्तराखंड के इस हिमालय क्षेत्र में आठ मेग्नीट्यूड का भूकंप जरूर आएगा.
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