- खाड़ी क्षेत्र में तीन महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी थी
- अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास में सैन्य हमले कर दिया है, सीजफायर के बीच ईरान पर यह दूसरा अटैक है
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान के साथ समझौते में कुछ दिन लग सकते हैं
US-Iran-Israel War, West Asia Conflict News: खाड़ी में तीन महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत जारी थी लेकिन इसी बीच अमेरिका ने ईरान पर नए हमले कर दिए हैं. सीजफायर के बीच दूसरी बार हुए इस तरह के बड़े हमले ने दोनों देशों के बीच स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है. सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास में नए हमले करके दोनों देशों के बीच शांति समझौते की संभावना को मिट्टी में मिला दिया है. पहले ही दोनों देश आम सहमति पर नहीं पहुंच पा रहे हैं और ऊपर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेना ने एक और नया हमला करके ईरान को आंख दिखा दी है.
अमेरिका का रिएक्शन
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमेरिकी सेना के हमले के बाद मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ समझौते में “कुछ दिन” लग सकते हैं. उनके इस बयान से जल्द युद्ध खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा है. उनका यह बयान अमेरिकी सेना के दक्षिणी ईरान में किए नए हमले के बाद आया है. अमेरिका ने इस हमले को “रक्षात्मक कार्रवाई” बताया है. रुबियो ने भी इन हमलों का जिक्र किया, जिनमें कथित तौर पर समुद्र में होर्मुज में बारूदी सुरंगें लगाने की कोशिश कर रही नावों और मिसाइल लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया गया था. उन्होंने कहा कि होर्मुज हर हाल में खुला रहना चाहिए.
भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री ने जयपुर में अपने विमान में पत्रकारों से कहा, “यह जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए. एक या दूसरे तरीके से यह खुला रहेगा, इसलिए इसे खुला रहना ही होगा.”
ईरान का रिएक्शन
खबर लिखे जाने तक ईरान की तरफ से अमेरिकी हमले पर कोई जवाब नहीं दिया गया था. ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के उन दावों का कोई खंडन नहीं किया है कि ईरानी मिसाइल लॉन्चरों और नावों पर हमला किया गया था. उन्होंने न तो रिपोर्टों की पुष्टि की है और न ही घटना से जुड़े कोई डिटेल्स ही दिए हैं.
क्या शांति समझौते पर बड़ा असर पड़ेगा?
अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के पूर्व राजनयिक और पेंटागन अधिकारी एडम क्लेमेंट्स ने कहा कि उन्हें इस बात पर “ज्यादा हैरानी नहीं” है कि अमेरिका ने अपने सैन्य हमलों की बात स्वीकार की है. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंदर अब्बास इलाके में जो हुआ वह मामूली बात है. अगर इसके बाद और हमले होते हैं तो इस पर नजर रखना जरूरी होगा. लेकिन यहां हमें सैन्य कार्रवाई और बड़ी रणनीति में फर्क समझने की जरूरत है.”
कुल मिलाकर क्लेमेंट्स ने कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक कूटनीतिक बातचीत अब भी आगे बढ़ रही है और ये हमले पूरी प्रक्रिया को पटरी से नहीं उतारेंगे.
दोहा में चल रही बातचीत
अमेरिकी हमले ऐसे समय हुए जब ईरान के टॉप वार्ताकार और विदेश मंत्री कतर की राजधानी दोहा में कतर के प्रधानमंत्री के साथ बातचीत कर रहे थे. एक अधिकारी ने बताया कि यह बातचीत अमेरिका के साथ संभावित समझौते को लेकर थी, ताकि तीन महीने पुराने युद्ध को खत्म किया जा सके. रुबियो ने इससे पहले नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा था कि अमेरिका कूटनीति को सफल होने का पूरा मौका देगा, इससे पहले कि वह ईरान से “किसी दूसरे तरीके” से निपटने पर विचार करे.
वहीं सोमवार को ट्रुथ सोशल पर लंबी पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत “अच्छे तरीके से” चल रही है. लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल हुई तो नए हमले हो सकते हैं. ट्रंप ने लिखा, “यह या तो सभी के लिए एक शानदार समझौता होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा.”
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