- इलाके में बारिश न होने से फसलें बर्बाद हो गई हैं और पंद्रह लाख लोग कुपोषण और भूख से जूझ रहे हैं
- करामोजा क्षेत्र में किसानों की फसलें खराब होने से महिलाएं मजदूरी करके अपने परिवार का पेट भरने को मजबूर हैं
- युगांडा में पहले भी भुखमरी से हजारों लोगों की मौत हो चुकी है जबकि अमीर तबका अपने जीवन में विलासिता करता है
पेट भर गया, कोई नहीं... फेंक दो. आमतौर पर लोग ऐसा ही बोलते हैं. पर आज भी दुनिया के हिस्सों में लोगों को कई-कई दिनों तक भोजन नहीं मिल पा रहा. युगांडा के पूर्वी हिस्से में लंबे समय से सूखे की वजह से भूख से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई. इसके बाद, देश ने आपातकालीन खाद्य राहत वितरण शुरू किया है.
युगांडा के करा मोजा इलाके में संकट गहराता जा रहा है, क्योंकि मौसम की उम्मीद के मुताबिक बारिश न होने से फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे इलाके के 15 लाख लोग गंभीर खाद्य संकट और बढ़ते कुपोषण का सामना कर रहे हैं. अधिकारियों ने अगले दो महीनों में 9,400 टन राहत सामग्री (खाद्य पदार्थ) बांटने की योजना की घोषणा की है. यह सामान संसद द्वारा मंजूर 45 अरब शिलिंग (9 मिलियन पाउंड) के आपातकालीन फंड से खरीदा गया था.
सालों में सबसे लंबा सूखा
करामोजा में कई सालों में सबसे लंबा सूखा पड़ा है. अप्रैल में जब बुवाई का मौसम शुरू होता है, तब आखिरी बार ठीक-ठाक बारिश हुई थी, उसके बाद से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं. करामोजा में मोरोटो शहर से लगभग 5 मील दूर रूपा में रहने वाली 21 साल की एंजेलिना नाकिरु ने बताया कि अपनी सारी फसलें बर्बाद होने के बाद उन्हें बच्चों का पेट भरने में बहुत मुश्किल हो रही है. अब वह हर सुबह जल्दी उठकर दूसरी महिलाओं के साथ एक छोटी सी पिसाई मिल में जाती हैं. वहां मशीनों से पत्थर को पीसकर पाउडर बनाया जाता है, ताकि उसमें से सोना निकालने के लिए अयस्क को धोया जा सके. इसमें बहुत कम पैसे मिलते हैं.
भूख से बिलबिला रहे बच्चे
नाकिरु ने कहा, "यह काम धूल-मिट्टी वाला और थका देने वाला है, लेकिन बच्चों को खिलाने के लिए मक्का और बीन्स खरीदने के पैसे कमाने का यही एकमात्र तरीका है. अगर मैं ऐसा नहीं करती, तो बच्चे भूखे सोएंगे. जिन दिनों मुझे मिल से थोड़ी-बहुत कमाई भी नहीं हो पाती, उन दिनों हम खाली पेट ही सो जाते हैं. हालात बहुत खराब हैं. लोग भूख से मर रहे हैं. सरकार को लोगों की मदद के लिए आगे आना चाहिए." ये इस एक अकेली मां का दुख नहीं है. लाखों माएं अपने बच्चों को एक वक्त की रोटी भी नहीं दे पा रही हैं. लाखों बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं. मगर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. युगांडा के मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में भुखमरी के एक भयानक संकट ने 2,200 से ज्यादा लोगों की जान ले ली. खास बात ये है कि यूगांडा में भी अमीर तबका सभी तरह की मौज-मस्ती आज भी कर रहा है.
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