- चीन के रिसर्चर्स ने हाइब्रिड चावल की क्लोनिंग तकनीक विकसित कर पारंपरिक बीज उत्पादन प्रक्रिया में क्रांति ला दी
- विकसित क्लोनिंग तकनीक ने लगभग सौ प्रतिशत सफलता दर हासिल की है, जबकि पैदावार के स्तर में कोई कमी नहीं आई है
- इस तकनीक से किसानों की बीज लागत में भारी बचत होगी और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है
चीन के रिसर्चर्स ने हाइब्रिड चावल की क्लोनिंग में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. इसमें सालाना बीज उत्पादन के पारंपरिक तरीके को पूरी तरह बदलने और ग्लोबल फूड सिक्योरिटी के लिए नई तकनीकी मदद देने की क्षमता है.
कैसे बनाया क्लोन
सालों की लगातार कोशिशों के बाद, चाइना नेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट के रिसर्चर वांग केजियान की अगुवाई वाली टीम ने चावल के एक खास जीन की पहचान की और उसकी विशेषताओं का पता लगाया. इसे उन्होंने "HUAXU" नाम दिया है. मंगलवार को 'Vita' जर्नल में छपी उनकी स्टडी से पता चलता है कि हाइब्रिड चावल की एग सेल्स (अंड कोशिकाओं) में HUAXU जीन असरदार ढंग से पार्थेनोजेनेसिस (बिना फर्टिलाइजेशन के प्रजनन) को शुरू कर सकता है और हैप्लॉइड संतान पैदा कर सकता है.
क्लोनिंग क्षमता ठीक पर पैदावार सामान्य
क्लोन किए गए गैमीट (प्रजनन कोशिका) तरीके के साथ मिलाने पर, टीम द्वारा विकसित कई एपोमिक्टिक लाइनों ने लगभग 100 प्रतिशत क्लोनिंग क्षमता हासिल की. अलग-अलग हाइब्रिड चावल की किस्मों, कई पीढ़ियों, अलग-अलग तरह की फसलों और बड़े पैमाने पर फील्ड ट्रायल जैसी विभिन्न स्थितियों में क्लोनिंग क्षमता लगातार 99 प्रतिशत से ऊपर बनी रही, जबकि पैदावार सामान्य स्तर पर ही रही.
क्लोनिंग क्षमता का मतलब है आर्टिफिशियल तरीके से प्रेरित एपोमिक्सिस से पैदा हुए उन बीजों का प्रतिशत जो जेनेटिक रूप से मातृ पौधे के समान होते हैं. यह हेटेरोसिस को स्थिर करने की तकनीकी सफलता का आकलन करने के लिए एक मुख्य पैमाना है और सीधे तौर पर बीज की शुद्धता को प्रभावित करता है. थ्योरी के हिसाब से, इसका मतलब है कि लगातार इस्तेमाल के लिए एक ही हाइब्रिड बीज काफी हो सकता है, जिससे हर साल दोबारा बीज बोने की जरूरत खत्म हो जाएगी.
इस रिसर्च के फायदे जानिए
- बीज लागत की बचत: किसानों को हर सीजन नए हाइब्रिड बीज नहीं खरीदने होंगे, जिससे लागत 99% तक कम हो सकती है.
- उत्पादन क्षमता का प्रोटेक्शन: एक बार का हाइब्रिड बीज अपनी उच्च पैदावार और श्रेष्ठ गुणों को बिना बदले अगली पीढ़ियों तक खुद पहुंचाएगा.
- खाद्य सुरक्षा: इससे वैश्विक चावल उत्पादन दोगुना होने की संभावना है, जो दुनिया भर में भुखमरी से निपटने में मदद करेगा.
इस रिसर्च के नुकसान जानिए
- आनुवंशिक एकरूपता और जोखिम: एक ही प्रकार के क्लोन बीजों को बड़े पैमाने पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी बोने से खेतों में आनुवंशिक विविधता घट जाती है, जिससे पूरी फसल किसी एक नई बीमारी या कीट के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो सकती है.
- पारिस्थितिकी और जैव विविधता पर असर: इस तरह के सुपर-चावल के दुनिया भर में बिकने से स्थानीय और पारंपरिक चावल की देसी किस्में विलुप्त हो सकती हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है.
- बीज उद्योग और आर्थिक प्रभाव: इस तकनीक से हाइब्रिड बीज उत्पादन की लागत 99% तक कम हो सकती है, जिससे पारंपरिक बीज बेचने वाली कंपनियों और स्थानीय बीज बाजारों का व्यवसाय ठप हो सकता है और ग्रामीण स्तर पर आर्थिक उथल-पुथल हो सकती है.
- खाने वालों को नुकसान: इस चावल को खाने से खाने वालों को भी बीमारियां होने की आशंका बनी रही है.
चीन पर बढ़ जाएगी निर्भरता
जैसे अभी अमेरिका से ट्रेड डील के समय आपने सुना होगा कि मक्का को लेकर भारत ने साफ मना कर दिया. कारण उस मक्के के आने के बाद हमारी पैदावार धीरे-धीरे अमेरिकी बीजों पर निर्भर हो जाती. साथ ही मिट्टी भी फिर उसी बीज पर फसल तैयार कर पाती. इससे अमेरिका पर भारत मक्का के लिए निर्भर हो जाता. ऐसे ही चीन के हाइब्रिड चावल के इस्तेमाल से भी खतरा है. हालांकि, अमेरिका और चीन के दोनों फसलों में थोड़ा अंतर भी है.
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