- इजरायल के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने तुर्की पर आगामी चुनावों में सोशल मीडिया के जरिए दखल देने का आरोप लगाया
- इजरायली संसद की गोपनीय उप-समिति को विदेशी दखल और गुप्त पैसे के लेन-देन की जानकारी देने की तैयारी है
- नेशनल साइबर डायरेक्टोरेट ने पहले भी चुनाव में विदेशी दखल के संकेत मिलने की जानकारी संसद को दी है
इजरायल में तुर्की सोशल मीडिया के जरिए आगामी चुनावों को मैनेज कर रहा है. ये दावा इजरायल के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने किया है. अधिकारियों के मुताबिक, इन गतिविधियों का मकसद इजरायल की जनता की राय को प्रभावित करना, चुनाव प्रचार में बाधा डालना और इजरायली समाज के अलग-अलग समूहों के बीच मतभेदों को और बढ़ाना है.
खुफिया एजेंसी की भी इनपुट
सोमवार को 'द जेरूसलम पोस्ट' को इन अधिकारियों ने बताया कि हालांकि यह नहीं बताया कि क्या यह ऑपरेशन तुर्की सरकार के निर्देश पर चलाया जा रहा है. इस आकलन में तुर्की को ईरान के साथ उन विदेशी ताकतों में शामिल किया गया है, जिन पर इजरायली सुरक्षा अधिकारियों को शक है कि वे चुनाव को प्रभावित करने और इजरायली समाज में फूट का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं. इसके अलावा, यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब इजरायल के सरकारी ब्रॉडकास्टर KAN News की सोमवार की रिपोर्ट के मुताबिक, शिन बेट (इजरायली सुरक्षा एजेंसी) के प्रमुख डेविड जिनी सोमवार को नेसेट (इजरायली संसद) की एक गोपनीय उप-समिति के सामने चुनावों में विदेशी दखल के संकेतों के बारे में जानकारी पेश करने की तैयारी कर रहे हैं.
गुप्त पैसे के लेन-देन का पता लगा रहे
रिपोर्ट के अनुसार, जिनी से यह भी उम्मीद की जा रही है कि वे सांसदों को इस बारे में जानकारी देंगे कि इजरायल देश के अंदर राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाले गुप्त पैसे के लेन-देन का पता कैसे लगा सकता है. केंद्रीय चुनाव समिति के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के डिप्टी प्रेसिडेंट नोआम सोहलबर्ग के भी इस सुनवाई में शामिल होने की उम्मीद है. KAN की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल साइबर डायरेक्टोरेट ने नेसेट (इजरायली संसद) की पिछली सुनवाइयों में बताया था कि चुनाव में दखल देने की कोशिशों के संकेत पहले ही मिल चुके हैं.
राष्ट्रपति इसाक हर्जोग भी चिंतित
7 अक्टूबर के नरसंहार और उसके बाद हुए युद्ध के बाद इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले पहले राष्ट्रीय चुनाव से पहले, वोटिंग को प्रभावित करने की विदेशी कोशिशें चिंता का विषय बन गई हैं. पिछले हफ्ते जिनी और सोहलबर्ग से मुलाकात के बाद, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने चुनाव की निष्पक्षता और अखंडता के लिए खतरों के बारे में चेतावनी दी. हर्जोग ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों से इन खतरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा और इजरायली लोगों से सोशल मीडिया पर जानकारी देखने और शेयर करने में सावधानी बरतने की अपील की.
यह भी पढ़ें-
Explainer: ईरान को जंग में फंसाकर क्या ट्रंप अब खेल रहे अलग गेम, धीरे-धीरे शिफ्ट हो रही रणनीति
ईरान-अमेरिका युद्ध में रूस-यूक्रेन की एंट्री, जानिए कैसे आ रहा नाम और इसका अंजाम
चीन ने बनाया चावल का क्लोन, मार्केट में आया तो किसानों से लेकर खाने वालों को नुकसान या फायदा
इंसान जैसी दिखने वाली रोबोट बनी टीचर, अमेरिका के हाई स्कूल में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
सोनम-सिया तो खतरनाक पर भारत समेत एशियाई महिलाओं में तलाक लेने का ट्रेंड क्यों बढ़ रहा?
जिसका डर था वही हुआ, होर्मुज में बिछी माइंस से टकराया तेल टैंकर, हुआ भयंकर विस्फोट
यूरोप के हीटवेव के बाद अब पहली बार अमेरिका के एक पूरे शहर में खत्म हो सकता है पानी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं