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GTI 2026: आतंकी हमलों और मौतों में कमी, फिर भी पश्चिमी देशों में तेजी से बढ़ रही हिंसा ने बढ़ाई चिंता

आईईपी के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष स्टीव किल्लेलिया कहते हैं, "2025 में सुधार के बावजूद, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियां और भी बिगड़ रही हैं. जब तक ईरान को शीघ्र स्थिर नहीं किया जाता, तब तक उसके एक विफल राष्ट्र बनने और आतंकवादी गुटों के लिए एक और प्रजनन स्थल बनने का खतरा है."

GTI 2026: आतंकी हमलों और मौतों में कमी, फिर भी पश्चिमी देशों में तेजी से बढ़ रही हिंसा ने बढ़ाई चिंता
पश्चिमी देश आतंकवाद के बढ़ते खतरे को लेकर सतर्क हैं.
  • ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स के अनुसार 2025 में आतंकवाद से होने वाली मौतों में दस वर्षों में सबसे अधिक गिरावट आई है
  • पश्चिमी देशों में आतंकवाद से मौतों में तीन गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय है
  • पश्चिमी देशों में युवाओं और बच्चों की आतंकवादी गतिविधियों में तेजी आई है और अकेले हमलावरों की संख्या बढ़ी है
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इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) की तरफ से जारी ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स (GTI) के अनुसार, 2025 में आतंकवाद में गिरावट आई है. मगर फिर भी ये पश्चिमी देशों के लिए खतरा बना हुआ है. पश्चिमी देशों में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 280 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है, जबकि दुनिया भर में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28 प्रतिशत की गिरावट आई है. दुनिया में आतंकवाद से होने वाली मौतें 2025 में एक दशक में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं; हालांकि, इससे ये अंदाजा लगाना गलत होगा कि आतंकवाद अब समाप्त होने की कगार पर है. 2026 में ईरान युद्ध, पश्चिमी देशों में बिगड़ती आर्थिक संभावनाएं और आतंकवादी संगठनों द्वारा ड्रोन तकनीक का बढ़ता उपयोग खतरे को बढ़ा रहा है.

युवा और ऑनलाइन कट्टरपंथ

पश्चिमी देशों के युवाओं में तेजी से कट्टरपंथ, राजनीतिक ध्रुवीकरण, यहूदी-विरोधी हिंसा में वृद्धि और ऑनलाइन कट्टरपंथी सोच बढ़ रही है. हालिया सर्वेक्षणों से पता चलता है कि कई देशों में इजरायल के लिए जनसमर्थन घट रहा है, जबकि गाजा युद्ध के साथ-साथ यहूदी-विरोधी भावना और राजनीतिक ध्रुवीकरण में भी वृद्धि हुई है. रिपोर्ट में माना गया है कि अमेरिका, आस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन में गोलीबारी के जरिए कई हिंसक घटनाएं इसी का नतीजा हैं.

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देखिए किस देश में कितनी आतंकवादी घटनाएं हुईं और कहां सबसे ज्यादा खतरा

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जीटीआई का निर्माण अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) द्वारा किया जाता है. यह ग्लोबल आतंकवाद पर सबसे गंभीर रिसर्च है और अपने स्कोर की गणना के लिए कई कारकों का उपयोग करता है, जिनमें घटनाओं की संख्या, मौत, घायल और बंधकों की संख्या शामिल है, और फिर इन्हें संघर्ष और सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों के साथ मिलाकर आतंकवाद की समग्र तस्वीर प्रस्तुत करता है.

बच्चे और किशोर कर रहे हमले

पश्चिमी देशों में आतंकवाद तेजी से युवा कट्टरपंथियों और अकेले हमला करने वालों की संख्या बढ़ रही है. 2025 में यूरोप और उत्तरी अमेरिका में आतंकवाद से संबंधित सभी जांचों में बच्चों और किशोरों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत थी. इन देशों में कट्टरपंथी बनने की औसत अवधि 2002 में 16 महीने से घटकर आज कुछ ही महीनों तक सीमित हो गई है. अनुमानतः कट्टरपंथी बने 87 प्रतिशत नाबालिगों का इतिहास उपेक्षा या मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार से भरा था, जबकि 77 प्रतिशत घर से त्याग दिए गए थे. एक और चुनौती यह है कि 2015 से पश्चिम में हुए घातक आतंकवादी हमलों में से 93 प्रतिशत अकेले हमलावरों द्वारा किए गए थे और समूहों की तुलना में उनके द्वारा हमले को सफलतापूर्वक अंजाम देने की संभावना तीन गुना अधिक है.

ईरान-गाजा हमले से और चिंता

आईईपी के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष स्टीव किल्लेलिया कहते हैं, "2025 में सुधार के बावजूद, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियां और भी बिगड़ रही हैं. जब तक ईरान को शीघ्र स्थिर नहीं किया जाता, तब तक उसके एक विफल राष्ट्र बनने और आतंकवादी गुटों के लिए एक और प्रजनन स्थल बनने का खतरा है. इराक और अफगानिस्तान से सबक स्पष्ट हैं: जब राष्ट्र खंडित होते हैं और सुरक्षा का अभाव पैदा होता है, तो आतंकवादी समूह अस्थिरता का तुरंत फायदा उठाते हैं."

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