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GTI 2026: दुनिया में आतंकवाद के मामलों में आई बड़ी गिरावट, लेकिन वैश्विक खतरा अब भी गंभीर बना हुआ

इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स के अनुसार, साल 2025 में आतंकवादी हमलों से होने वाली मौतों में बड़ी गिरावट देखी गई है, हालांकि कई क्षेत्रों में हिंसा अब भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है.

GTI 2026: दुनिया में आतंकवाद के मामलों में आई बड़ी गिरावट, लेकिन वैश्विक खतरा अब भी गंभीर बना हुआ
  • ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स के अनुसार, 2025 में आतंकी हमलों से होने वाली मौतों में गिरावट देखी गई है.
  • इसके मुताबिक, अफ्रीका का साहेल क्षेत्र आतंकवाद का नया केंद्र है, जहां आधे से अधिक मौतें हुईं हैं.
  • इस्लामिक स्टेट, जमात नुसरत, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और अल-शबाब सबसे घातक आतंकवादी संगठन रहे हैं.

दुनिया में आतंकवादी घटनाओं में बीते साल उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद आतंकवाद का खतरा वैश्विक स्तर पर पूरी तरह खत्‍म नहीं हुआ है. इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स के अनुसार, साल 2025 में आतंकवादी हमलों से होने वाली मौतों में बड़ी गिरावट देखी गई है, हालांकि कई क्षेत्रों में हिंसा अब भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है. अफ्रीका का साहेल क्षेत्र वैश्विक आतंकवाद का नया केंद्र बन चुका है तो दूसरी ओर कट्टरपंथी बनते युवा चिंता को और बढ़ा रहे हैं.  

साल 2025 में दुनिया भर में आतंकवादी हमलों की 2,944 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें कुल 5,582 लोगों की मौत हुई. यह आंकड़ा साल 2015 की तुलना में काफी कम है, जब आतंकवाद अपने चरम पर था और उस वर्ष 10,882 लोगों की जान गई थी. बीते साल के मुकाबले 2025 में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28 प्रतिशत और हमलों की संख्या में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट 81 देशों में देखी गई, जो 2021 के बाद किसी एक साल में सुधार का सबसे बड़ा आंकड़ा है.  वहीं, सिर्फ 19 देशों में आतंकवाद बढ़ा है. 

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साहेल क्षेत्र वैश्विक आतंकवाद का नया केंद्र

हालांकि आतंकवाद के भौगोलिक केंद्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां पहले मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित माने जाते थे, वहीं अब उप-सहारा अफ्रीका का साहेल क्षेत्र वैश्विक आतंकवाद का नया केंद्र बन चुका है. साल 2025 में आतंकवाद से होने वाली कुल मौतों में से आधे से अधिक इसी क्षेत्र में दर्ज की गईं. इसके उलट, साल 2007 में इस क्षेत्र में आतंकवाद से होने वाली मौतों का आंकड़ा एक प्रतिशत से भी कम था. 

आतंकवादी संगठनों की बात करें तो साल 2025 में सबसे ज्यादा मौतों के लिए चार संगठन जिम्मेदार रहे—इस्लामिक स्टेट (आईएस), जमात नुसरत अल-इस्लाम वाल मुस्लिमीन (JNIM), तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अल-शबाब. इन चारों में से केवल टीटीपी ऐसा संगठन रहा, जिसने पिछले साल की तुलना में आतंकवादी हिंसा से होने वाली मौतों की संख्या में इजाफा दर्ज किया. इस्लामिक स्टेट और उससे जुड़े संगठन 2025 में भी दुनिया के सबसे घातक आतंकवादी समूह बने रहे, हालांकि इनके हमले करने वाले देशों की संख्या 22 से घटकर 15 रह गई. 

इसके बावजूद कुछ इलाकों में आईएस की गतिविधियों में बढ़ोतरी भी देखी गई. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में आईएस से जुड़े हमलों में 2025 में 467 लोगों की मौत हुई, जबकि 2024 में यह संख्या 360 थी. 

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आतंकवाद से 70% मौतें सिर्फ 5 देशों में 

आंकड़ों के मुताबिक, आतंकवाद से होने वाली लगभग 70 प्रतिशत मौतें सिर्फ पांच देशों पाकिस्तान, बुर्किना फासो, नाइजीरिया, नाइजर और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में दर्ज की गईं. नाइजीरिया और कांगो में आतंकवादी हिंसा से मौतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई. दूसरी ओर, बुर्किना फासो ने सबसे बड़ा सुधार दर्ज किया, जहां 2025 में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 686 की कमी आई, जो करीब 45 प्रतिशत की गिरावट. 

वैश्विक स्तर पर एक और चिंता की बात यह है कि पश्चिमी देशों में आतंकवादी हमलों से मौतों की संख्या एक बार फिर बढ़ी है. 2025 में पश्चिमी देशों में आतंकवाद से 57 लोगों की मौत हुई, जो 2024 के मुकाबले 280 प्रतिशत ज्यादा है. ऑस्ट्रेलिया में दिसंबर 2025 में बॉन्डी बीच शूटिंग की घटना ने देश का अब तक का सबसे घातक आतंकी हमला दर्ज किया, जिसमें 15 लोगों की जान गई. अमेरिका में भी आतंकवादी हमलों में 28 लोगों की मौत हुई, जो 2019 के बाद सबसे ज्यादा है. 

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मीडिया में पश्चिमी देशों में हुए हमलों को ज्यादा कवरेज मिलती है, लेकिन आतंकवाद का असली कारण अब भी संघर्षग्रस्त इलाके हैं. 2025 में आतंकवाद से होने वाली कुल मौतों में से सिर्फ एक प्रतिशत मौतें ही ऐसे देशों में हुईं, जो संघर्ष से प्रभावित नहीं थे.  

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कट्टरपंथी बनते युवा बढ़ा रहे हैं चिंता 

रिपोर्ट में एक और चिंताजनक रुझान युवाओं में बढ़ती कट्टरता है. पिछले तीन सालों में युवाओं के बीच कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार तेजी से बढ़ा है. साल 2025 में यूरोप और उत्तरी अमेरिका में आतंकवाद से जुड़ी जांचों में बच्चों और किशोरों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही, जो 2021 की तुलना में तीन गुना अधिक है. वहीं 2024 में यूरोप में आईएस से जुड़े मामलों में हुई गिरफ्तारियों में करीब दो-तिहाई आरोपी किशोर थे. इसके अलावा पश्चिमी देशों में आतंकवादी घटनाओं की संख्या भी बढ़कर 52 हो गई, जो एक साल पहले 32 थी. 

रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी बनने की औसत समयसीमा में भी भारी कमी आई है, जहां 2005 में यह प्रक्रिया औसतन 18 महीने लेती थी, वहीं अब यह कुछ ही हफ्तों में पूरी हो सकती है. आंकड़े बताते हैं कि कट्टरपंथी बने 87 प्रतिशत नाबालिगों का संबंध उपेक्षा या मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार से रहा है.  

हालांकि, यह भी सामने आया है कि युवाओं से जुड़े आतंकी षड्यंत्र अक्सर उतने संगठित नहीं होते हैं. 2022 से 2025 के बीच नाबालिगों से जुड़े 97 प्रतिशत आतंकी षड्यंत्रों को सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया, जबकि वयस्कों से जुड़े मामलों में यह दर 68 प्रतिशत रही. 

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी देशों में युवाओं के कट्टरपंथी बनने के पीछे सामाजिक अलगाव प्रमुख कारण है, जबकि उप-सहारा अफ्रीका में राज्य सुरक्षा बलों द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन और रोजगार के अवसरों की कमी को इसका बड़ा कारण बताया गया है. 

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