- चेक गणराज्य में इजरायली हथियार निर्माता एल्बिट सिस्टम्स से जुड़ी फैक्ट्री में आग लगाई गई
- एल्बिट सिस्टम्स इजरायली सेना के लिए जमीनी और हवाई हथियारों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है
- यह हमला दोनों देशों के संबंधों के लिए गंभीर है, और ईरान पर हालिया हमलों के बाद इजरायल के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है
चेक गणराज्य में इजरायली हथियार निर्माता कंपनी एल्बिट सिस्टम्स से जुड़ी एक फैक्ट्री में आग लगा दी गई है, जिसकी जिम्मेदारी एक अंडरग्राउंड ग्रुप ने ली है. चेक अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है और पुलिस ने कहा है कि वे "आतंकवादी संलिप्तता" की जांच कर रहे हैं. चेक कंपनी और एल्बिट सिस्टम्स के संयुक्त अभियान में बनी इस फैक्ट्री में तड़के हुए हमले में कई इमारतें नष्ट हो गईं.
किसने किया हमला
एल्बिट सिस्टम्स खुद को इजरायली सेना द्वारा गाजा और ईरान सहित अपने युद्धों में इस्तेमाल किए जाने वाले जमीनी और हवाई हथियारों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बताती है. खुद को 'द अर्थक्वेक फैक्शन' कहने वाले एक ग्रुप ने टेलीग्राम पर कहा: "यह फैक्ट्री इजरायल के सबसे बड़े हथियार निर्माता के यूरोपीय अभियानों का केंद्र है. अब, यह आग की लपटों में घिरी है. सहयोगी अंतरराष्ट्रीय सरकारों से भीख मांगने का समय नहीं है... हम उनके हत्या के साधनों को नष्ट करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे."
चेक गणराज्य-इजरायल संबंध
चेक गणराज्य को चेकिया भी कहा जाता है. ये मध्य यूरोप में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया और पोलैंड से घिरा हुआ है. इसके इजरायल के साथ बेहद मजबूत और ऐतिहासिक रूप से मैत्रीपूर्ण संबंध हैं. यह अक्सर यूरोपीय संघ के भीतर इजरायल के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता है और संयुक्त राष्ट्र में भी इजरायल का समर्थन करता है. 1948 में इजरायल की स्थापना के समय चेक गणराज्य (तत्कालीन चेकोस्लोवाकिया) ने इजरायल को महत्वपूर्ण सैन्य सहायता और हथियार दी थी. चेक गणराज्य और इजरायल के बीच की दोस्ती को अक्सर यूरोप में "अनोखी" और सबसे करीबी दोस्ती के रूप में देखा जाता है.
क्यों है ये हमला बड़ी बात
जाहिर है जो देश इजरायल से इतने करीबी संबंध रखता हो, अगर वहां इजरायल की हथियार फैक्ट्री पर हमला हो जाता है और वो भी युद्ध के समय तो ये दोनों देशों के संबंधों के लिए बहुत गंभीर बात है. चेक गणराज्य इसीलिए इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है और घटना होते ही जांच में जुट गया है. हालांकि, जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि ये घटना किसी आतंकवादी संगठन से जुड़ी हुई है या किसी ऐसे ग्रुप से जो सिर्फ ईरान पर हुए हमले से नाराज था. मगर ये तय है कि ईरान पर हमले के बाद से इजरायल के खिलाफ कई देशों में नाराजगी बढ़ रही है.
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