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ब्रिटेन में 71 साल पहले जिस महिला को हुई थी फांसी, पोते-पोतियों ने अब दिलाई ‘माफी’… कहानी रूथ एलिस की

Story of Ruth Ellis: 3 और 10 साल के दो बच्चों की मां ने ऐसा कौन सा जुर्म किया था कि उसे 14 मिनट के अंदर कोर्ट में सुनवाई करके फांसी पर चढ़ा दिया गया था.

ब्रिटेन में 71 साल पहले जिस महिला को हुई थी फांसी, पोते-पोतियों ने अब दिलाई ‘माफी’… कहानी रूथ एलिस की
रूथ एलिस के साथ डेविड ब्लेकली, जिसे रूथ ने गोली मारी थी (फोटो- अल्टर्ड बाई NDTV)

ब्रिटेन में फांसी पर चढ़ने वाली आखिरी महिला रूथ एलिस को मौत के 71 साल बाद माफी दी गई है. उनके परिवार की दशकों लंबी मुहिम के बाद ब्रिटेन के उप-प्रधानमंत्री डेविड लैमी ने बीते सप्ताह संसद में यह घोषणा की. उन्होंने संसद में कहा कि ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय ने रूथ एलिस के साथ हुई "बहुत बड़ी नाइंसाफी" को मानते हुए उन्हें सशर्त माफी दे दी है. आखिर 3 और 10 साल के दो बच्चों की मां ने ऐसा कौन सा जुर्म किया था कि उसे 14 मिनट के अंदर कोर्ट में सुनवाई करके फांसी पर चढ़ा दिया गया था. पहले दिन फैसला सुनाया गया और केवल 23 दिन के अंदर उसे फांसी पर लटका दिया गया. चलिए आपको आज ब्रिटेन में फांसी चढ़ने वाली आखिर महिला की कहानी बताते हैं.

पब के बाहर चली 6 गोलियां!

साल था 1955. तारीख थी 10 अप्रैल. ईस्टर संडे की रात. उस रात कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे ब्रिटेन को दहला दिया. 28 साल की रूथ एलिस ने लंदन के हैम्पस्टेड इलाके में 'मैग्डाला' नाम के पब के बाहर अपने लवर की हत्या कर दी. उसने छह गोलियां चलाईं. चार गोलियां अपने निशाने पर लगीं और लवर डेविड ब्लेकली की मौके पर ही मौत हो गई. बाकी दो में से एक गोली पास खड़े एक व्यक्ति के अंगूठे को छूकर निकल गई.

रूथ को कुछ ही सेकंड में गिरफ्तार कर लिया गया. वजह थी कि एलन थॉम्पसन नाम का एक पुलिस अफसर भले उस समय ड्यूटी पर नहीं था लेकिन वह पास ही ड्रिंक कर रहा था. वह अफसर गोली चलने की आवाज सुनकर बाहर भागा और रूथ के हाथ से रिवॉल्वर छीन ली. रूथ ने कोई विरोध नहीं किया. अगले दिन, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद, चीफ इंस्पेक्टर ने पुलिस स्टेशन में रूथ से कहा. "तुम पर हत्या का आरोप लगाया जाएगा." तब रूथ ने जवाब दिया था, "मैं समझती हूं."

2 महीने बाद 20 जून को 'ओल्ड बेली' नाम की अदालत में उस पर मुकदमा चला. एलिस ने कभी अपना बचाव नहीं किया. हजारों लोगों ने दया की अपील करते हुए याचिकाओं पर साइन किए और सैकड़ों लोगों ने लेटर लिखे. लेकिन सब बेकार गया. जूरी ने यह फैसला सुनाने में सिर्फ 14 मिनट लिए कि रूथ दोषी है. सजा वही मिली जो उस समय हत्या के लिए एकमात्र संभव सजा थी- मौत की सजा. 28 साल की रूथ तब नाइटक्लब में स्टाफ थी. वह महज तीन और 10 साल की उम्र के दो बच्चों की मां थी. तब इस मामले ने ब्रिटेन में काफी चर्चा बटोरी और 1985 में इस पर 'डांस विद अ स्ट्रेंजर' फिल्म बनी, जिसमें मिरांडा रिचर्डसन और रूपर्ट एवरेट ने लीड एक्टर के तौर पर काम किया था.

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आखिर रूथ ने ऐसा क्यों किया था?

यह समझने के लिए आपको रूथ के गोली चलाने से 10 दिन पहले जाना होगा. तब रूथ के पेट में ब्लेकली का बच्चा था. लेकिन ब्लेकली ने रूथ के पेट में ऐसा तेज घूंसा मारा कि वह बच्चा दुनिया में आया ही नहीं. रूथ का बच्चा गिर गया.

एलिस के परिवार का तर्क था कि वह घरेलू हिंसा की शिकार महिला थीं और अगर आज के समय में यह मामला होता, तो उन पर हत्या के बजाय गैर-इरादतन हत्या का आरोप लगता. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल, ब्रिटेन के जस्टिस मिनिस्टर लैमी को उनके चार पोते-पोतियों की ओर से दी गई एक अर्जी में इस बात पर जोर दिया गया कि रूथ को उसके लवर ब्लेकली के हाथों बार-बार और लंबे समय तक यौन, भावनात्मक और शारीरिक शोषण का शिकार होना पड़ा था.

अब जब उप-प्रधानमंत्री लैमी रूथ को मरने के 71 साल बाद माफी देने की बात सांसदों को बता रहे थे, तब रूथ के छह पोते-पोतियों में से दो पब्लिक गैलरी से यह सब देख रहे थे. उनकी पोती लॉरा एनस्टन ने कहा कि रूथ एलिस और उनके परिवार को आखिरकार न्याय मिल ही गया. उन्होंने एक बयान में कहा, "रूथ लगातार और बेरहम ज्यादती की शिकार थीं. उनके बच्चे यानी हमारी मां और अंकल कभी भी इस सदमे से उबर नहीं पाए. रूथ को दी गई फांसी की परछाईं दो पीढ़ियों पर पड़ी है."

उन्होंने आगे कहा, "यह क्षमा 71 साल पहले जो हुआ उसे खत्म नहीं करती. यह उन जिंदगियों को वापस नहीं ला सकती जो टूट गई थीं, जो बच्चे अकेले पीछे छूट गए, जो साल खो गए... लेकिन यह औपचारिक रूप से और आखिरकार कहता है कि रूथ को फांसी नहीं दी जानी चाहिए थी. देश के जस्टिस सिस्टम ने उसे विफल कर दिया."

कानून बदला गया

एलिस को दी गई फांसी से जनता में भारी आक्रोश फैल गया था और इसने मौत की सजा के खिलाफ ब्रिटेन में जनमत बनाने में मदद की. उनकी फांसी ही ब्रिटेन में मृत्युदंड को हमेशा के लिए खत्म करने में महत्वपूर्ण साबित हुई. ऐसी ही कई अन्य विवादास्पद फांसी और जस्टिस सिस्टम की विफलता की एक श्रृंखला के बाद 1969 में हत्या की अपराध के लिए मौत की सजा को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया.

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