Zara Hatke News: जेल का नाम सुनते ही दिमाग में सूखी रोटी, पतली दाल और सख्त पहरे का ख्याल आता है. लेकिन ब्रिटेन की एक खूंखार महिला जेल में आजकल कुछ और ही चल रहा है. यहां कैदियों को सजा के नाम पर लजीज बर्गर, कबाब, चाइनीज और पिज्जा जैसी डिशेज परोसी जा रही हैं. पहली बार पढ़ने में भले ही आपको यकीन न हो, लेकिन डर्बीशायर की HMP फॉस्टन हॉल (HMP Foston Hall) जेल में ऐसा ही हो रहा है. 320 कैदियों की क्षमता वाली इस जेल में यह अनोखा प्रयोग किया जा रहा है, और इसके पीछे की वजह और भी हैरान करने वाली है.
'लड़ाई मत करो, अच्छा खाना खाओ'
दरअसल, इस जेल में कैदियों के बीच और स्टाफ के साथ मारपीट की घटनाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं. पिछले साल ही स्टाफ पर हमलों में 21% और कैदियों की आपसी भिड़ंत में 11% का उछाल आया. HM इंस्पेक्टरट ऑफ प्रिजन्स (HMIP) की रिपोर्ट में यह सामने आया कि भले ही हिंसा गंभीर नहीं थी, लेकिन खुद को नुकसान पहुंचाने (Self-harm) के मामले बहुत ज्यादा थे. जेल में देखभाल में कमी और स्टाफ से मदद न मिलने के कारण महिलाओं में काफी निराशा बढ़ रही थी.
कैसे डिसाइड होता है विनर का नाम?
इसी तनाव और हिंसा को कम करने के लिए जेल प्रशासन ने एक अजीबोगरीब 'ट्रीट' का आईडिया निकाला. जेल में 7 अलग-अलग विंग हैं. हर विंग में 30 से 60 कैदी हैं. प्रशासन ने शर्त रखी कि जो विंग पूरे महीने सबसे शांत रहेगा यानी जहां सबसे कम हिंसा होगी, उसे इनाम मिलेगा. इनाम के रूप में विजेता विंग के लिए जेल का किचन स्टाफ खास तौर पर बाहर के रेस्टोरेंट जैसा खाना बनाता है, जिसे ये लोग फेकअवे (Fakeaway) कह रहे हैं.
इस जेल में बंद हैं कई खूंखार अपराधी
द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जेल में कोई मामूली चोर-उचक्के नहीं, बल्कि ब्रिटेन की सबसे खतरनाक अपराधी बंद हैं. 15 साल की उम्र में डबल मर्डर करने वाली लॉरेन थोर्प और अपनी ही बच्चियों को मारने वाली लुईस पोर्टन जैसी महिलाएं इसी जेल की हवा खा रही हैं. इससे पहले 'मूर्स मर्डरर' मायरा हिंडली, मैक्सिन कार और करेन मैथ्यूज (बेटी के नकली अपहरण की साजिशकर्ता) जैसी हाई-प्रोफाइल अपराधी भी यहां रह चुकी हैं.
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हिंसा रोकने के लिए सिर्फ खाने का लालच ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि कुछ समझदार कैदियों को 'पीसकीपर्स' भी बनाया गया है. ये लाल बैंड पहनने वाली कैदी होती हैं, जो बात बिगड़ने से पहले ही बीच-बचाव कर देती हैं.
क्या कहता है जेल का रिपोर्ट कार्ड?
इंडिपेंडेंट मॉनिटरिंग बोर्ड (IMB) की रिपोर्ट के मुताबिक, जेल का खाना वैसे भी बुरा नहीं है. 65% कैदियों ने माना है कि खाना बढ़िया मिलता है. इसके अलावा जेल में जानवरों के लिए एक जगह, टेक्सटाइल वर्कशॉप, जिम, सैलून और बगीचे भी हैं. बस बाहर का टीम गेम्स वाला मैदान थोड़ा ऊबड़-खाबड़ और असुरक्षित माना गया है. कुल मिलाकर, जेल गवर्नर अपने एक्शन प्लान के तहत माहौल सुधारने का हर हथकंडा अपना रहे हैं. अब ये 'बर्गर-कबाब' वाला दांव कितना कामयाब होता है, ये इस साल के आखिर तक पता चल जाएगा.
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