- पीएम मोदी 15 से 20 मई तक पांच देशों की यात्रा पर संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जाएंगे
- यूएई यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और LPG आपूर्ति तथा तेल भंडारण पर समझौते करना है
- इटली दौरे के दौरान रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 की समीक्षा की जाएगी
दुनिया भर में अस्थिरता छाई हुई है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की यात्रा पर कल से निकलने वाले हैं. पीएम मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे से होते हुए इटली पहुंचेंगे. संयुक्त अरब अमीरात की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी ने प्रधानमंत्री को अमीरात के नेतृत्व और जनता के लिए एक "सच्चा खजाना" बताया है. उन्होंने कहा है कि व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध "नई ऊंचाइयों" को छूने के लिए तैयार हैं.
एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में यूएई में राजदूत रहे संजय सुधीर ने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी की यूएई की आठवीं यात्रा होगी. यूएई के राष्ट्रपति पांच बार भारत आ चुके हैं. दोनों देशों के नेतृत्व नियमित रूप से मिलते रहे हैं और पीढ़ियों के बीच जुड़ाव बना हुआ है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि पश्चिम एशिया में जो कुछ घट रहा है, उसके मद्देनजर यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण यात्रा है. यह समर्थन का एक सशक्त प्रतीक है.”
पीएम मोदी की यूएई यात्रा का मकसद
- राजनीतिक तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना.
- LPG आपूर्ति और रणनीतिक तेल भंडारण को लेकर दो बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं.
- रणनीतिक तेल भंडार भरने के लिए यूएई से भारत मदद मांगेगा.
- कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ी डील हो सकती है.
नीदरलैंड का मकसद
एम्स्टर्डम में भारत के राजदूत कुमार तुहिन ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा विशेष महत्व रखती है. नीदरलैंड में रॉब जेटेन के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली शिखर स्तर की वार्ता होगी. राजदूत तुहिन ने IANS को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि नेतृत्व विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा करेगा, अब तक हासिल की गई उपलब्धियों को सुदृढ़ करेगा और द्विपक्षीय संबंधों को नई रणनीतिक दिशा प्रदान करेगा. मुझे नई प्रौद्योगिकियों, सेमीकंडक्टर और सतत ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद.” उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेता व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, समुद्री सहयोग और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे. राजदूत ने कहा कि नीदरलैंड न केवल भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में से एक है, बल्कि यूरोप का प्रवेश द्वार भी है.
स्वीडन के दौरे का क्या महत्व
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने मिशन के रणनीतिक महत्व, विशेष रूप से स्कैंडिनेवियाई चरण पर जोर देते हुए कहा, "स्वीडन में, 17 मई को, प्रधानमंत्री मोदी गोथेनबर्ग की आधिकारिक यात्रा करेंगे. भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए 2018 में अपनी ऐतिहासिक यात्रा के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी की स्वीडन की दूसरी यात्रा होगी." उन्होंने कहा कि फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन का दौरा भारत के नॉर्डिक देशों के साथ संबंधों को एक अधिक रणनीतिक आयाम प्रदान करने के उद्देश्य से किया जा रहा है. इस दौरे का मुख्य फोकस प्रौद्योगिकी और नवाचार, हरित परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा, स्थिरता, नीली अर्थव्यवस्था, रक्षा, अंतरिक्ष और आर्कटिक पर रहेगा.
नार्वे में एक साथ कई देशों के नेताओं से मिलेंगे
नॉर्वे में, प्रधानमंत्री मोदी 19 मई को ओस्लो में आयोजित होने वाले तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. इस शिखर सम्मेलन में डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेता भी शामिल होंगे. यात्रा के नॉर्डिक चरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (एफआईईओ) के अध्यक्ष एससी राल्हन ने कहा, "भारत और नॉर्डिक देशों के बीच बढ़ता रणनीतिक तालमेल भारतीय व्यवसायों, स्टार्टअप्स और प्रौद्योगिकी साझेदारियों के लिए नए रास्ते खोल सकता है, साथ ही भारत को सतत और हरित विकास की ओर अग्रसर होने में सहायता प्रदान कर सकता है."
एफआईईओ ने कहा कि हाल ही में संपन्न हुए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते और भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के मद्देनजर यूरोप में प्रधानमंत्री की गतिविधियों का महत्व और भी बढ़ जाता है. राल्हन ने कहा, "यूरोपीय नेताओं के साथ प्रधानमंत्री की चर्चाओं से हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, एआई, नवाचार, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, रक्षा विनिर्माण, नीली अर्थव्यवस्था, लचीली आपूर्ति श्रृंखला और स्थिरता जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की उम्मीद है. इन क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों और उद्योग के लिए अपार संभावनाएं हैं."
इटली के दौरे से होगी दौरे की समाप्ति
अपनी यात्रा के अंतिम चरण में, प्रधानमंत्री मोदी 19-20 मई को इटली की यात्रा करेंगे, जहां वे इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला से बातचीत करेंगे. यह यात्रा स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-इटली के बढ़ते सहयोग के बीच हो रही है. इसके साथ ही इटली में दोनों देशों के नेता "संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029" की भी समीक्षा करेंगे और संबंधों को नई ऊर्जा देने की कोशिश करेंगे.
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