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पाकिस्तान में मुनीर लिख रहे नई पटकथा, निशाने पर जरदारी परिवार, क्या इमरान खान वाला होगा हाल

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि उन्हें PPP की इस "दोहरी नीति" के पीछे "कुछ और" दिखाई देता है, और उन्होंने कहा कि "सही समय आने पर" वे इस मामले की गहराई से पड़ताल करेंगे.

पाकिस्तान में मुनीर लिख रहे नई पटकथा, निशाने पर जरदारी परिवार, क्या इमरान खान वाला होगा हाल
पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन का नया खेल चल रहा है.
  • असीम मुनीर को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भी नियुक्त किया गया है जिससे तीनों सेनाओं की कमान उनके पास है
  • असीम मुनीर प्रांतों के बंटवारे की योजना बना रहे हैं ताकि राजनीतिक स्थिति नियंत्रित कर सकें
  • मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के प्रमुख ने नए प्रांतों के निर्माण पर चल रही बहस को देश के लिए बड़ा संकट बताया

पाकिस्तान में अब सिर्फ असीम मुनीर ही मुनीर हैं. पहले उन्हें थल सेना अध्यक्ष से फील्ड मार्शल बनाया गया. अब उन्हें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएफ) भी बना दिया गया है. मतलब अब थलसेना, वायुसेना और नौसेना की कमान असीम मुनीर के हाथ में है. मगर इतने पर भी असीम मुनीर की महत्वकांक्षा खत्म नहीं हुई है. पाकिस्तान में चर्चा है कि असीम मुनीर राष्ट्रपति बनना चाहते हैं. फिलहाल राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी हैं. 

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आसिफ अली जरदारी बिलावल भुट्टो के पिता भी हैं और पीपीपी उन्हीं की पार्टी है. जिसके समर्थन से पाकिस्तान में शहबाज शरीफ का राज चल रहा है. मगर ये तो सभी जानते हैं कि बगैर फौज के समर्थन के पाकिस्तान में कोई भी राज नहीं कर सकता. असीम मुनीर ने पाकिस्तान में चल रही बगावतों को थामने और पंजाब में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए सभी प्रांतों को कई टुकड़ों में बांटने का इरादा कर लिया है. असीम मुनीर को पता था कि शरीफ परिवार को इससे दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि पंजाब में लंबे समय से बंटवारे की मांग हो रही है. मगर जरदारी इस बात को नहीं मानेंगे. कारण ये है कि जरदारी की पार्टी की सिंध में सरकार है. सिंध में अधिकतर लोग खुद को एक स्वतंत्र देश का निवासी देखना चाहते हैं. अब अगर सिंध को भी बांटने की बात जरदारी की पीपीपी करती है तो बवाल होना तय है.

असीम मुनीर क्यों कर रहे ऐसा

असीम मुनीर को इसी में अपने लिए मौका दिखा. कारण ये है कि मौजूदा स्थितियों में मुनीर के लिए मुशर्रफ की तरह शरीफ सरकार को उखाड़कर खुद को सैन्य शासक घोषित करना बेहद मुश्किल है. फौज में भी उनके काफी विरोधी हैं. इसके अलावा इमरान खान की पार्टी से लेकर कई दल असीम मुनीर के खिलाफ हैं. दुनिया का मिजाज भी इस वक्त किसी तानाशाह को स्वीकार करने के मूड में नहीं है. साथ ही शरीफ भाइयों ने भी अमेरिका को इस बार साध रखा है. मगर शरीफ बंधु इस बार फौज से कोई दुश्मनी भी नहीं लेना चाहते. उन्हें मुनीर के राष्ट्रपति बनने से भी कोई आपत्ति नहीं है. बस रुकावट है पीपीपी और राष्ट्रपति जरदारी. अगर जरदारी को हटाया जाता है तो पीपीपी सरकार से समर्थन खींच लेगी और सरकार ही गिर जाएगी. इसीलिए मुनीर ने प्रांतों के बंटवारे का पासा फेंक दिया है और उसे पूरा करने में शरीफ परिवार की पार्टी जुट गई है. अब अगर जरदारी मना करते हैं तो उन्हें देश का गद्दार बता दिया जाएगा और पीपीपी को डरा-धमकाकर सरकार को समर्थन करने के लिए मजबूर किया जाएगा.    

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अल्ताफ हुसैन ने किया दावा

मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक और प्रमुख अल्ताफ हुसैन ने दावा किया है कि पाकिस्तान की सेना और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बीच एक "खामोश संघर्ष" चल रहा है. उन्होंने चेतावनी दी है कि नए प्रांत बनाने पर हो रही बहस देश को एक बड़े राजनीतिक और सुरक्षा संकट में धकेल सकती है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान तेजी से अपने सबसे खतरनाक दौर की ओर बढ़ रहा है और देश के लोगों को अभी तक इस खतरे का कोई अंदाजा नहीं है. देश भर में नए प्रांत बनाने को लेकर चर्चा चल रही है—कि वे बनेंगे या नहीं—और इस बहस को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. इससे पहले, PML-N, PPP और मौलाना फज़लुर रहमान ने 26वें और 27वें संवैधानिक संशोधनों को पारित करने के लिए मिलकर सौदेबाजी की थी, और अब देश में 28वें संवैधानिक संशोधन की बात चल रही है, जिसमें पाकिस्तान में नए प्रांतों का निर्माण भी शामिल है. 

जरदारी पाकिस्तान छोड़ भागे

संघीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी का कहना है कि पाकिस्तान का सिस्टम बर्बाद हो चुका है, लेकिन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी पाकिस्तान में नहीं हैं. ऐसे हालात में, राष्ट्रपति को राष्ट्रपति पद छोड़ने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति जरदारी अपने बेटे बिलावल जरदारी की शादी के लिए ऑस्ट्रिया गए थे और अभी लंदन में हैं. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, संघीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने लंदन में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ एक घंटे की बैठक की, जिसमें आमने-सामने बातचीत हुई और मोहसिन नकवी ने राष्ट्रपति जरदारी तक एक अहम संदेश पहुंचाया. रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में राष्ट्रपति जरदारी ने नए प्रांतों पर बहस को लेकर अपने रुख पर कायम रहने की बात दोहराते हुए कहा कि राष्ट्रीय सहमति के बिना किसी भी मुद्दे का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ देश में नहीं रहते; बल्कि, वे 'ओवरसीज़ प्रधानमंत्री' बन गए हैं और लगातार अलग-अलग देशों का दौरा करते रहते हैं.

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लंदन में हो रही चर्चा

तो फिर 28वें संशोधन और नए प्रांतों पर चर्चा लंदन में क्यों हो रही है? राष्ट्रपति और संघीय गृह मंत्री की पाकिस्तान में सुबह-शाम बैठकें होती हैं, तो राष्ट्रपति के पाकिस्तान लौटने में क्या दिक्कत है? देश में 28वां संशोधन आने वाला है, इस बात पर बहस चल रही है कि प्रांत बनेंगे या नहीं—ऐसे समय में राष्ट्रपति ज़रदारी को दो-तीन हफ्ते के लिए देश छोड़ने की क्या जरूरत थी? कुछ दिन पहले, जब हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति ज़रदारी और एस्टेब्लिशमेंट के बीच टकराव चल रहा था, तो राष्ट्रपति ज़रदारी बीमारी का बहाना बनाकर प्रेसिडेंसी से कराची के बिलावल हाउस चले गए थे, लेकिन जब एस्टेब्लिशमेंट ने उनसे कुछ कहा, तो उन्हें जजों की नियुक्ति के लिए समरी पर दस्तखत करने पड़े.

ख्वाजा आसिफ की धमकी

इस बीच नवाज शरीफ के खासमखास और पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि सत्ता का बंटवारा जरूरी है. साथ ही उन्होंने नए प्रांतों के मुद्दे पर PPP के विरोधाभासी रुख का भी ज़िक्र किया. शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, "जब पंजाब में सराइकी प्रांत की बात होती है, तो PPP उसका समर्थन करती है या इस मुद्दे पर नरम रुख अपनाती है. और जब चार के बजाय कई प्रांतों या प्रशासनिक इकाइयों की बात होती है, तो 'सिंधुदेश' की बात शुरू हो जाती है." शुक्रवार को मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (MQM-P) को "सिंधुदेश आंदोलन" के खिलाफ प्रस्ताव पेश करने का मौका नहीं दिया गया. PPP ने प्रस्ताव पेश करके "लोगों को गुमराह करने" की कोशिश करने के लिए पार्टी की आलोचना की थी.

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क्या निपट जाएगा जरदारी परिवार

आसिफ ने कहा कि उन्हें PPP की इस "दोहरी नीति" के पीछे "कुछ और" दिखाई देता है, और उन्होंने कहा कि "सही समय आने पर" वे इस मामले की गहराई से पड़ताल करेंगे. उन्होंने कहा, “हम सबसे पहले पाकिस्तानी हैं. 18वें संशोधन के ज़रिए अधिकारों के बंटवारे (डिवोल्यूशन) को एक संवैधानिक सिद्धांत के तौर पर तय किया गया था, जिसका सम्मान नहीं किया गया. समय और हालात की मांग है कि इसे ईमानदारी से लागू किया जाए.” उन्होंने कहा कि सत्ता के एक ही जगह केंद्रित होने से मौजूदा सिस्टम बेकार हो गया है, जिसे “ठीक” करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, “चाहे आप इन्हें प्रांत कहें या प्रशासनिक इकाइयां, जो भी नाम देना चाहें दें. आपके पास 36 डिवीज़न हैं, उनका इस्तेमाल करें या कोई और प्रशासनिक-भौगोलिक योजना बनाएं. सत्ता का बंटवारा होना ही है.” आसिफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब PML-N के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन की अहम सहयोगी पार्टी PPP ने नए प्रांत बनाने की बहस पर प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं और इस मामले पर उनका रुख जानना चाहा है. कुल मिलाकर नवाज शरीफ अब इमरान खान के बाद मुनीर के जरिए जरदारी परिवार को भी निपटाना चाहते हैं और इसकी पटकथा लिख रहे हैं खुद असीम मुनीर. 

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