विज्ञापन

'भारत से ज्यादा सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से खतरा': पाकिस्तान के पंजाब की CM मरियम नवाज

पाकिस्तानी क्षेत्र के पंजाब की सीएम का ये बयान बताता है कि पाकिस्तानी हुक्मरान पंजाब को छोड़कर बाकी देश की जनता को निम्न स्तर का और अपराधी मानते हैं.

मरियम नवाज के इस बयान के बड़े मायने हैं.
  • मरियम नवाज ने अंतरराष्ट्रीय सीमा की तुलना में आंतरिक प्रांतीय सीमाओं से अधिक सुरक्षा खतरा बताया है
  • मरियम नवाज के अनुसार पंजाब को बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा से अवैध घुसपैठ का सामना करना पड़ता है
  • मानवाधिकार संगठन ने बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने वाले चार नागरिकों सहित कई अन्य प्रकरणों की जानकारी दी है

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ ने पाकिस्तानी पंजाब की सुरक्षा स्थिति पर एक अहम बयान दिया है. सुरक्षा हालात पर बात करते हुए मरियम नवाज ने कहा कि पंजाब को भारत के साथ लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा से ज्यादा खतरा पड़ोसी पाकिस्तानी प्रांतों से होने वाली घुसपैठ से है.

पंजाब सीमएम ने खास तौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा का जिक्र करते हुए कहा कि सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के साथ पंजाब की सीमाओं की वजह से प्रांत में दूसरे प्रांतों से लोगों की आवाजाही का खतरा बना रहता है. पंजाब की मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रांत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें सीमा पार आपराधिक गतिविधियां, अवैध तस्करी और घरेलू प्रांतीय सीमाओं के आर-पार चरमपंथी तत्वों की आवाजाही शामिल हैं.

मरियम का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि इसमें भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से तत्काल खतरे के बजाय पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लिए आंतरिक सुरक्षा और अंतर-प्रांतीय घुसपैठ को मुख्य चिंता के तौर पर उजागर किया गया है. इससे ये भी क्लियर है कि पाकिस्तान में अब अलग-अलग प्रांतों के लोगों को भी दुश्मन की तरह देखे जाने लगा है. हालांकि, बलूचिस्तान के अलावा सिंध और खैबर पख्तूनख्वा का नाम लेना चौंकाने वाला है. इसका मतलब है कि पाकिस्तानी पंजाब के लोग अब बाकियों को पाकिस्तानी भी नहीं मान रहे हैं और उन्हें हीन दृष्टि से देख रहे हैं.

सच्चाई तो ये है

वहीं शनिवार को मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली एक प्रमुख संस्था ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में बलूच नागरिकों के खिलाफ हिंसा जारी है और पाकिस्तानी सेना ने चार नागरिकों को जबरन गायब कर दिया है. ये ताजा घटनाएं प्रांत में बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं और लोगों को जबरन गायब करने की बढ़ती घटनाओं के बीच हुई हैं. बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग, 'पांक' ने बताया कि 3 सितंबर को लाहौर से एक और युवक, अम्मार बलूच को जबरन गायब कर दिया गया. मानवाधिकार संस्था ने कहा कि अम्मार, जिसने अपना भविष्य बनाने के लिए लौटने से पहले विदेश में उच्च शिक्षा हासिल की थी, को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उठा लिया और अभी तक उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है. संस्था ने आगे कहा, "उसका गायब होना पढ़े-लिखे बलूच युवाओं के सामने मौजूद असुरक्षा को दिखाता है, जिनमें वे युवा भी शामिल हैं जो बलूचिस्तान के अंदर और बाहर एकेडमिक और प्रोफेशनल करियर बना रहे हैं."

एक अलग घटना में, बलूचिस्तान के गेबुन इलाके के एक मज़दूर अदनान बलोच को 2 सितंबर की देर रात पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने ज़बरदस्ती गायब कर दिया; बताया जा रहा है कि अभी तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है.पांक (Paank) ने कहा, "अदनान का गायब होना यह दिखाता है कि यह चलन बलोच लोगों को उनकी शिक्षा, पेशे या आर्थिक स्थिति से परे प्रभावित करता है. मज़दूर और कामकाजी परिवारों पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ता है, क्योंकि परिवार के किसी सदस्य के गायब होने से उन्हें भारी मानसिक तकलीफ़ और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है."

लगातार कर रहे अत्याचार

बलूचिस्तान में बढ़ते अत्याचारों का जिक्र करते हुए, मानवाधिकार संस्था ने 2 सितंबर को गेबुन में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा जुड़वां भाइयों मुहम्मद और अहमद को ज़बरदस्ती गायब किए जाने की कड़ी निंदा की.मानवाधिकार संस्था के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बल उनके घर में घुसे और दोनों भाइयों को ज़बरदस्ती हिरासत में ले लिया, जिसके बाद उन्हें किसी अज्ञात जगह पर भेज दिया गया. संस्था ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनके ठिकाने, कानूनी स्थिति या शारीरिक हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है.
पांक ने बताया, "मुहम्मद और अहमद दिहाड़ी मज़दूर हैं जो मेहनत-मज़दूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं. न तो उनका कोई राजनीतिक संबंध है और न ही कोई आपराधिक रिकॉर्ड. उन्हें बिना किसी वारंट, बिना किसी आरोप की जानकारी दिए और बिना वकील, परिवार के सदस्यों या अदालत तक पहुँच दिए हिरासत में ले लिया गया."

यह कहते हुए कि जबरदस्ती गायब करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का गंभीर उल्लंघन है, संस्था ने आगे कहा, "लोगों को गुप्त रूप से हिरासत में रखकर और उनके भविष्य व ठिकाने को छिपाकर, अधिकारी उन्हें कानून के संरक्षण से बाहर कर देते हैं और उन्हें टॉर्चर, बुरे बर्ताव और अन्य गंभीर दुर्व्यवहार के जोखिम में डाल देते हैं. परिवार लंबे समय तक अनिश्चितता में रहते हैं; उन्हें पता नहीं होता कि उनके प्रियजन कहाँ रखे गए हैं, किस हालत में हैं या सुरक्षित हैं या नहीं." पांक ने 'जबरदस्ती या अनैच्छिक रूप से गायब किए जाने के मामलों पर संयुक्त राष्ट्र के वर्किंग ग्रुप', 'संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय', अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और राजनयिक समुदाय से अपील की कि वे पाकिस्तान पर दबाव डालें ताकि वह जबरदस्ती गायब किए गए सभी लोगों के बारे में जानकारी दे और ज़बरदस्ती गायब करने का यह चलन बंद करे. आपको बता दें कि पाकिस्तान की फौज से लेकर सत्ता तक में पंजाब के लोगों का ही दखल है. पाकिस्तान के आर्थिक संसाधनों का भी 80 फीसदी इस्तेमाल अकेले पंजाब ही करता है.

यह भी पढ़ें-

पाकिस्तान में मुनीर लिख रहे नई पटकथा, निशाने पर जरदारी परिवार, क्या इमरान खान वाला होगा हाल

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Punjab CM Maryam Nawaz, Maryam Nawaz, Maryam Nawaz Latest News, Maryam Nawaz Pakistan, Maryam Nawaz Sharif
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com