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परमाणु समझौता इस बात पर निर्भर करता है कि सऊदी अरब 'अब्राहम समझौते' में शामिल हो: ट्रंप

सऊदी अरब ने इस दावे पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इन समझौतों के तहत इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की किसी भी मंजूरी का मतलब रियाद के रुख में एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि वह लंबे समय से ऐसी संभावना का विरोध करता रहा है.

परमाणु समझौता इस बात पर निर्भर करता है कि सऊदी अरब 'अब्राहम समझौते' में शामिल हो: ट्रंप
ट्रंप ने परमाणु समझौते के बीच सऊदी अरब के सामने नई शर्त रख दी है.
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब के साथ परमाणु सहयोग अब्राहम समझौते पर निर्भर है
  • ट्रंप के बयान ने सऊदी अरब और इजरायल के संबंधों को लेकर समझौते की अस्पष्टता बढ़ा दी है
  • अमेरिका और सऊदी अरब ने शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग और सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि सऊदी अरब के साथ असैन्य परमाणु सहयोग समझौता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि सऊदी अरब 'अब्राहम समझौते' के तहत इजरायल के साथ अपने संबंध सामान्य करे. समझौते की घोषणा के एक दिन बाद, बृहस्पतिवार को ट्रंप के इस बयान ने पहले से ही अस्पष्ट समझौते को लेकर उलझन पैदा कर दी है, क्योंकि इस समझौते की पूरी जानकारी अभी तक जारी नहीं की गई है.

अपने 'ट्रुथ सोशल' अकाउंट पर एक पोस्ट में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा कि इस समझौते को "मंजूरी तो मिल जाएगी, लेकिन यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि सऊदी अरब बहुत सम्मानित और सफल 'अब्राहम समझौते' (Abraham Accords) में शामिल हो"

सऊदी अरब ने इस दावे पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इन समझौतों के तहत इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की किसी भी मंजूरी का मतलब रियाद के रुख में एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि वह लंबे समय से ऐसी संभावना का विरोध करता रहा है. ट्रंप का यह बयान अमेरिकी ऊर्जा विभाग की उस घोषणा के एक दिन बाद आया है, जिसमें बताया गया था कि वाशिंगटन और रियाद ने "कई दशकों तक चलने वाली, अरबों डॉलर की साझेदारी के लिए शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग समझौते" और साथ ही नागरिक परमाणु कार्यक्रम शुरू करने से जुड़े "द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते" पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस समझौते के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत होगी.

अमेरिका की कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इस समझौते से सऊदी अरब को न्यूक्लियर फ़्यूल आयात करने के बजाय अपने देश में ही यूरेनियम को एनरिच करने की इजाजत मिल जाएगी. इस तरह का प्रावधान विदेशों में सिविलियन न्यूक्लियर प्रोग्राम के प्रति वॉशिंगटन के अब तक के रवैये से एक बड़ा बदलाव होगा. वह लंबे समय से उन देशों को एनरिचमेंट टेक्नोलॉजी और जानकारी देने का विरोध करता रहा है, जिनके पास यह पहले से मौजूद नहीं है.

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