नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन की ओर से समय पर चेतावनी साझा नहीं किए जाने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं. नेपाली सूत्रों के अनुसार, तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में आई बाढ़ की सूचना नेपाल को करीब 45 मिनट की देरी से मिली. इस वजह से सीमावर्ती रसुवा और टिमुरे इलाकों में राहत और बचाव की तैयारी समय रहते नहीं हो सकी. अगर समय रहते चीन ने नेपाल को अलर्ट कर दिया होता है तो एहतियाती कदम उठाए जा सकते. लोगों को तुरंत शिफ्ट किया जा सकता या नदी किनारों से दूर रखा जा सकता था.
वहीं अब इसे लेकर सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद शर्मा ने नेपाल-चीन सीमा पर संदिग्ध ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट डिजास्टर को लेकर कहा कि यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कल सुबह तिब्बत में एक भूकंप आया और उसने एक हिमस्खलन या भूस्खलन ट्रिगर किया जिस वजह से एक बड़ा ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट डिजास्टर हुआ.
यदि सही समय पर चीन की तरफ से नेपाल की डिजास्टर रिस्क रिडक्शन मैनेजमेंट अथॉरिटी को यह सूचना दी जाती तो स्थानीय लोगों को सतर्क किया जा सकता था और जो इतने बड़े स्तर पर जान-माल की हानि हुई है उससे बचा जा सकता था. मुझे लगता है इस डिजास्टर के पीछे एक बड़ा कम्युनिकेशन का गैप रहा है. चीन से समय पर सूचना नेपाली एजेंसियों को नहीं मिली.
नेपाल ने भारत को समय पर अलर्ट किया
डिजास्टर कम्युनिकेशन व्यवस्था बेहतर होने की वजह से नेपाली एजेंसियों ने भारत में बिहार और उत्तर प्रदेश सरकार को समय पर अलर्ट किया कि करीब 3 लाख क्यूसेक पानी गंडक नदी के जरिए भारत की तरफ बढ़ रहा है. सिक्किम के ल्होनाक लेक में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट हुआ था 4 अक्टूबर 2023 को. हमने उस दौरान समय पर आम लोगों को सतर्क किया था जिस वजह से जान-माल की ज्यादा हानि नहीं हुई थी.
सिक्किम में में है 85 ग्लेशियर
85 ग्लेशियर हैं सिक्किम में और हमारे डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के पास इन सब के बारे में वैज्ञानिक जानकारी इकट्ठा की गई है. 2013 में केदारनाथ में ग्लेशियर टूटने की वजह से एक बहुत बड़े डिजास्टर की घटना हुई थी. चीन, नेपाल, भारत, भूटान जैसे देशों में फैले हिमालय क्षेत्र में हजारों ग्लेशियर हैं. इनमें से कई ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं.
नेपाल-चीन सीमा पर जो बड़ा हादसा हुआ है उसके बाद यह बेहद महत्वपूर्ण हो गया है कि सभी हिमालय क्षेत्र से जुड़े देशों के बीच में एक डिजास्टर कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित किया जाए जिससे कि आपदा से जुड़ी जानकारी सभी संवेदनशील देशों की एजेंसियों के बीच में आदान-प्रदान हो सके. भारत के 12 राज्यों में हिमालय क्षेत्र फैला है. इस क्षेत्र में मौजूद हजारों ग्लेशियरों की गंभीरता से मॉनिटरिंग करना बेहद जरूरी है.
समय पर अलर्ट नहीं मिलने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में बाढ़ स्थानीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे और नेपाली समयानुसार लगभग 8:15 बजे आ चुकी थी. आरोप है कि चीन की ओर से कोई आधिकारिक पूर्व चेतावनी जारी नहीं की गई. रसुवा के अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर जानकारी मिलने के बाद लोगों को सतर्क किया गया, लेकिन तब तक कीमती समय निकल चुका था.
सीमावर्ती इलाकों में मची अफरा-तफरी
सूचना मिलने में हुई देरी की वजह से रसुवा के टिमुरे और आसपास के इलाकों में लोगों को अचानक सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा. रिपोर्ट में कहा गया है कि समय रहते चेतावनी मिलती तो प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य पहले शुरू कर सकता था और नुकसान कम किया जा सकता था.
नेपाल में अभी कैसे हैं हालात?
नेपाल में बाढ़ के कारण लोगों की मौत का आंकड़ा पल पल बदल रहा है. ताजा जानकारी के मुताबिक, अब तक 359 लोगों की मौत हो चुकी है. इस बाढ़ की वजह से अब तक 27 देशों के लोगों से संपर्क टूट चुका है. ऐसा माना जा रहा है कि जिन विदेशियों से संपर्क नहीं हो पाया है, वे 26 अलग-अलग देशों से हैं, जिनमें भारत से 133, अमेरिका से 47 और ब्रिटेन से 33 लोग शामिल हैं. बोर्ड ने टूर ऑपरेटरों का हवाला देते हुए कहा कि उनमें से अधिकांश मानसरोवर जा रहे यात्री थे.
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