नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन की ओर से समय पर चेतावनी साझा नहीं किए जाने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं. नेपाली सूत्रों के अनुसार, तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में आई बाढ़ की सूचना नेपाल को करीब 45 मिनट की देरी से मिली. इस वजह से सीमावर्ती रसुवा और टिमुरे इलाकों में राहत और बचाव की तैयारी समय रहते नहीं हो सकी. अगर समय रहते चीन ने नेपाल को अलर्ट कर दिया होता है तो एहतियाती कदम उठाए जा सकते. लोगों को तुरंत शिफ्ट किया जा सकता या नदी किनारों से दूर रखा जा सकता था.
समय पर अलर्ट नहीं मिलने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में बाढ़ स्थानीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे और नेपाली समयानुसार लगभग 8:15 बजे आ चुकी थी. आरोप है कि चीन की ओर से कोई आधिकारिक पूर्व चेतावनी जारी नहीं की गई. रसुवा के अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर जानकारी मिलने के बाद लोगों को सतर्क किया गया, लेकिन तब तक कीमती समय निकल चुका था.
सीमावर्ती इलाकों में मची अफरा-तफरी
सूचना मिलने में हुई देरी की वजह से रसुवा के टिमुरे और आसपास के इलाकों में लोगों को अचानक सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा. रिपोर्ट में कहा गया है कि समय रहते चेतावनी मिलती तो प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य पहले शुरू कर सकता था और नुकसान कम किया जा सकता था.
नेपाल में अभी कैसे हैं हालात?
नेपाल में बाढ़ के कारण लोगों की मौत का आंकड़ा पल पल बदल रहा है. ताजा जानकारी के मुताबिक, कम से कम 94 लोगों की मौत हुई है. इस बाढ़ की वजह से अब तक 27 देशों के 403 लोगों से संपर्क टूट चुका है.
नेपाल पर्यटन बोर्ड की ओर से जारी ताजा जानकारी के अनुसार, आज सुबह तक बाढ़ में लापता लोगों की संख्या 403 है. बताया जा रहा है कि इनमें से 62 नेपाली और 341 विदेशी नागरिक हैं. इनमें 200 महिलाएं और 203 पुरुष शामिल हैं.
ऐसा माना जा रहा है कि जिन विदेशियों से संपर्क नहीं हो पाया है, वे 26 अलग-अलग देशों से हैं, जिनमें भारत से 133, अमेरिका से 47 और ब्रिटेन से 33 लोग शामिल हैं. बोर्ड ने टूर ऑपरेटरों का हवाला देते हुए कहा कि उनमें से अधिकांश मानसरोवर जा रहे यात्री थे.
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