- नेपाल के नुवाकोट में त्रिशूली-3 ‘ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को बचाने का अभियान जारी है
- नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस और नेपाल पुलिस की संयुक्त टीम के 90 सदस्य यहां राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं
- भारत की 11 सदस्यीय टीम और चीन की छह सदस्यीय टनल रेस्क्यू स्पेशलिस्ट टीम भी बचाव अभियान में सहायता कर रही हैं
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों को सहायता और अब भी फंसे लोगों को बचाने का काम जारी है. नुवाकोट स्थित माथिल्लो त्रिशूली-3 ‘ए' जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए नेपाली सेना के इंजीनियर ब्लास्टिंग तक की कोशिश कर रहे हैं. भारत की 11 सदस्यीय टीम फंसे हुए श्रमिकों के बचाव अभियान में सहायता कर रही है. चीन ने भी टनल रेस्क्यू स्पेशलिस्ट टीम भेजी है. चीन के छह सदस्यों वाली टीम मौके पर पहुंच गई है, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.
मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, घटनास्थल पर नेपाली सेना के 66 जवान, प्रशिक्षित कुत्तों के साथ विशेष खोज और बचाव दल के 18 सशस्त्र पुलिसकर्मी और नेपाल पुलिस के 6 जवान समेत कुल 90 लोगों की संयुक्त टीम राहत और बचाव अभियान में जुटी है.
इससे पहले टीम दोपहर तक सुरंग के मुख्य हिस्से ‘क्राउन हेड' तक पहुंची और वहां 2×3 फीट का छेद बनाया. रस्सी की मदद से टीम के जवान नीचे उतरे और अंदर फंसे लोगों को आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला.

इसके बाद बचाव अभियान को और तेज करने के लिए बड़े उपकरण लगाए गए हैं. सुरंग में बने छेद को बड़ा करने के साथ-साथ ब्लास्टिंग की तैयारी भी की जा रही है. ये सभी काम एक साथ चल रहे हैं, ताकि सुरंग में फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके.
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नेपाल सेना के अनुसार, नेपाली सुरक्षा बलों ने देश में विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से अब तक 191 कर्मचारियों को निकाला है. हालांकि, सुरंगों के अंदर अधिक लोगों के फंसे होने की सूचना के बाद नेपाल ने भारत से सहायता मांगी. नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में अपर त्रिशूली-1 और त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी सुरंगों के अंदर कई लोगों के फंसे होने की आशंका है.
26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी गलियारे में अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या रविवार को 700 के पार पहुंच गई, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं. वहीं सड़कों, पुलों, मानव बस्तियों और जलविद्युत बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है.
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