- पाकिस्तान के पूर्व PM इमरान खान की तीन बहनों को पुलिस ने रात में छापेमारी कर हिरासत में लिया, जेल भेज दिया
- "आधी रात 200 पुलिसकर्मी जबरन इमरान खान के घर में घुसकर तलाशी ली और बहनों समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया"
- परिवार ने पुलिस द्वारा सीसीटीवी कैमरे तोड़ने और बच्चों सहित रिश्तेदारों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है
जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तीन बहनें रात में हुई छापेमारी और हिरासत के बाद अब भी पुलिस की गिरफ्त में हैं. परिवार का आरोप है कि महिलाओं, बच्चों और घर में काम करने वाले कर्मचारियों तक को डराने-धमकाने के लिए कार्रवाई की गई. यह मामला ऐसे समय सामने आया है तक पाकिस्तान में तनाव चरम पर है. दरअसल इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) 27 सितंबर को इस्लामाबाद मार्च निकालाने वाली है. मार्च में कुछ ही दिन बाकी हैं और ऐसे में पाकिस्तान सेना और सरकार उसे दबाने की हर कोशिश में है.
इमरान खान के परिवार ने जारी किया बयान
इमरान खान के परिवार की ओर से जारी एक विस्तृत बयान के अनुसार, यह पूरा मामला 20 सितंबर की सुबह शुरू हुआ. उस दिन इमरान की बहन अलीमा खान अपने लाहौर स्थित घर से एक पर्सनल काम के लिए निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं. दोपहर तक उनकी कार मोजांग पुलिस स्टेशन में लावारिस हालत में मिली. शाम तक पता चला कि उन्हें पब्लिक ऑर्डर कानून की धारा 3 के तहत हिरासत में लिया गया है. यह कानून अंग्रेजों के समय का है. परिवार का कहना है कि इस कानून का इस्तेमाल कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करने, विरोध की आवाज दबाने, राजनीतिक विरोधियों को डराने और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों को रोकने के लिए किया जाता है.
इसके बाद पुलिस बड़ी संख्या में उस रिहायशी सड़क पर पहुंची, जहां अलीमा खान का घर है. पुलिस ने सड़क के दोनों रास्तों को बंद कर दिया. परिवार का आरोप है कि आने-जाने की कोशिश कर रहे रिश्तेदारों और बच्चों को परेशान किया गया.
परिवार के बयान के अनुसार, पुलिसकर्मी अपने साथ मौजूद दूसरे कर्मचारियों को उर्दू में लोगों को पकड़ने और उन्हें जबरदस्ती गाड़ियों में डालने के आदेश दे रहे थे. परिवार ने इस भाषा और व्यवहार को बेहद अपमानजनक, डराने वाला और अनप्रोफेशनल बताया है.
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने दोनों घरों में लगे CCTV कैमरों को जानबूझकर ढूंढकर तोड़ दिया. इस दौरान शाहरेज खान की पत्नी को थोड़ी देर के लिए हिरासत में लिया गया. उनके दो छोटे बच्चे, जिनकी उम्र 2 और 7 साल है, बुरी तरह डर गए. परिवार के मुताबिक, जब छोटा बच्चा लगातार रोता रहा, तब जाकर उसकी मां को छोड़ा गया.
परिवार के मुताबिक, करीब 2:10 बजे रात हिरासत में लिए गए परिजनों को पहचान के लिए चबुरजी पुलिस स्टेशन ले जाया गया. करीब 3:45 बजे उजमा खान और नोरीन नियाजी को बाकी लोगों से अलग कर जेल भेज दिया गया. इमरान की यह दोनों बहनें भी अभी भी जेल में हैं. परिवार का कहना है कि इसके बाद से परिवार और उनके वकीलों का दोनों महिलाओं से कोई संपर्क नहीं हो पाया है.
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मीडिया रिपोर्ट में भी यह दावे सही साबित हो रहे
स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों में भी इस घटनाक्रम की टाइमलाइन की काफी हद तक पुष्टि हुई है. गिरफ्तारियों की रिपोर्ट करने वाले समाचार संगठनों के मुताबिक, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर ने दोनों बहनों के खिलाफ पब्लिक ऑर्डर कानून के तहत 30 दिन की एहतियाती हिरासत के आदेश जारी किए. अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक सभाओं में उनकी मौजूदगी से शांति भंग होने का खतरा था. PTI ने इन हिरासतों को किडनैपिंग बताया है. पार्टी का आरोप है कि 27 सितंबर के मार्च से पहले पार्टी को संगठित करने की उसकी क्षमता को खत्म करने की सीधी कोशिश की जा रही है.
इस पूरी कार्रवाई को समझने में इसकी टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण है. PTI ने देशभर के अपने समर्थकों से 27 सितंबर को इस्लामाबाद पहुंचने की अपील की है. पार्टी इमरान खान को अदियाला जेल से रिहा करने की मांग कर रही है. इमरान खान 2023 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में हैं. PTI इसे पाकिस्तान में संविधान को सबसे ऊपर रखने का अभियान बता रही है.
27 सितंबर के मार्च में अब एक सप्ताह से भी कम समय बचा है. ऐसे में उजमा खान और नोरीन नियाजी के साथ क्या होता है, क्या पुलिस और सैन्य अधिकारी परिवार के दूसरे सदस्यों या PTI के आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई करते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा. इससे यह तय हो सकता है कि 27 सितंबर का प्रदर्शन तय कार्यक्रम के अनुसार हो पाता है या फिर सड़कों पर होने वाले प्रदर्शनों की तरह इसे भी पहले ही रोक दिया जाता है.
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