- नेपाल में अचानक आई बाढ़ से अब तक 1,344 लोगों की मौत हुई और पांच हजार से अधिक लोग लापता हैं
- रेस्क्यू टीम ने मलबे और सुरंगों से दो दिन में चार लोगों को जिंदा बचाकर आशा जगाई है
- नेपाल में बाढ़ से करीब 400 अरब रुपये का नुकसान हुआ है जो देश की जीडीपी का लगभग पंद्रह प्रतिशत है
नेपाल में सैलाब और तबाही के बीच फिर चमत्कार हुआ है. जिस सैलाब में 1300 से ज्यादा लोगों की जान गई और 5 हज़ार से ज्यादा लापता हुए. वहां सुरंग के अंदर और मलबे के बीच से भी लोग ज़िंदा निकल रहे हैं. नुवाकोट में 64 साल की जिस महिला का अंतिम संस्कार कर दिया था, घरवालों को 10 दिन तक जब महिला का शव या खबर नहीं मिली, तो पुतला बनाकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया था. वो चंद्रिका एक चार मंजिला इमारत में मलबे के बीच मिली.
हेलीकॉप्टर और ड्रोन से इलाके के सर्वे के दौरान चंद्रिका की जानकारी मिली, फिर रेस्क्यू टीम उन तक पहुंची तो चंद्रिका कीचड़ से लथपथ थीं. पानी की कमी के चलते चंद्रिका बेहोश थीं, पर सांसें चल रही थी. बचावकर्मियों ने सबसे पहले उन्हें कंबल और जैकेट से ढका. फिर पानी पिलाया और भरोसा दिलाया कि वो ठीक हो जाएंगी. बाद में इलाज के लिए उन्हें हेलीकॉप्टर से काठमांडू ले जाया गया.
दो दिन में नेपाल में 4 लोग सुरंग और मलबे से बचाए गए हैं. इससे रेस्क्यू टीम की लोगों को बचाने की उम्मीद और बढ़ गई है.

लापता लोगों की तलाश जारी
26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ से मची तबाही के करीब 11 दिन बाद भी बचावकर्मी मलबे में लोगों की तलाश कर रहे हैं लेकिन उन्हें बरामद किए जा रहे शवों की पहचान करने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है.
नेपाल पुलिस द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, 1,344 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि 589 विदेशियों सहित करीब पांच हजार लोग अब भी लापता हैं. अब तक 13,400 से अधिक लोगों को बचाया गया है. अधिकारियों ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा के नजदीक 26 अगस्त को ग्लेशियर से हिमखंड का बड़ा हिस्सा टूटा और इसके बाद भारी मलबे और वेग के साथ निचले इलाकों में पानी बहा और उत्तरी व मध्य नेपाल में बस्तियां तबाह हो गईं.
चीनी मीडिया की खबरों के मुताबिक तिब्बत में भी कम से कम 43 लोगों की मौत हुई है जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं. अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में बरामद शवों में से कम से कम 85 बच्चों के थे जबकि लगभग 500 शवों के कुछ अंग गायब थे. कई शवों की हालत ऐसी है कि उनकी पहचान करने में मुश्किल आ रही है.
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के मुताबिक चितवन जिले से सबसे अधिक 362 शव बरामद किए गए. इसके बाद प्रभावित जिलों में नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम, नुवाकोट, रसुवा, गोरखा, धादिंग और तनहुं शामिल हैं. एनडीआरआरएमए के अनुसार, केवल 98 शवों की पहचान की गई और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया.

अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि पानी के साथ बहकर आए कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हैं, या फिर उनके केवल कुछ हिस्से ही मिल पाए हैं. पुलिस ने कहा है कि आपदा वाली जगहों से दूर बहकर गए शवों और पानी व कीचड़ में दबे शवों की पहचान करना बहुत मुश्किल हो गया है.
नेपाल के सूचना और संचार मंत्री विक्रम तिमिलसिना ने कहा, ‘‘इस समय नेपाल जलवायु न्याय की मांग कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस बारे में गंभीर होना चाहिए.'' उन्होंने कहा कि इस आपदा ने भविष्य में जलवायु से जुड़ी आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी की जरूरत को उजागर किया है.
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष चो ह्यून ने रविवार को जारी खोज, बचाव और राहत कार्यों पर चर्चा की. खनाल के कार्यालय ने बताया कि काठमांडू में हुई बैठक में दोनों नेताओं ने लापता दक्षिण कोरियाई नागरिकों का पता लगाने के प्रयासों पर विस्तार से बातचीत की.
काठमांडू ने मित्र देशों से आग्रह किया है कि वे यात्रा संबंधी परामर्श को केवल बाढ़ से प्रभावित विशिष्ट क्षेत्रों तक ही सीमित रखें, साथ ही यह भी बताया है कि देश का बाकी हिस्सा यात्रा और पर्यटन के लिए खुला और सुरक्षित है.
नेपाल में बाढ़ से 400 अरब का नुकसान
नेपाल में बाढ़ से करीब 400 अरब रुपये के नुकसान की खबर है. नेपाल की कुल GDP करीब 6 हज़ार अरब रु. है. मतलब GDP का करीब 15 % सैलाब बहा ले गया. आकलन के मुताबिक साढ़े 7 हजार से ज्यादा घर प्रभावित हैं. करीब 55 किलोमीटर सड़कें, 37 सड़क वाले पुल क्षतिग्रस्त हैं.
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अचानक आई बाढ़ से अलग-अलग इलाकों में 68 झूला पुल टूटे हैं. भीषण बाढ़ ने 1,806 हेक्टेयर खेती की जमीन को प्रभावित किया है और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट या तो तबाह हुए हैं या नुकसान हुआ है.
एक सोलर प्रोजेक्ट और बिजली की 2 ट्रांसमिशन लाइनें प्रभावित हैं. इससे करीब 783 मेगावाट बिजली बनाने की क्षमता प्रभावित हुई है. 11 कॉमर्शियल बैंकों की 17 शाखाएं पूरी तरह तबाह हो गईं हैं. इनमें 43.5 अरब नेपाली रुपये जमा थे और 24.2 अरब का कर्ज था.
बाढ़ से 142 होटल और 57 रेस्तरां पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं. पर्यटन को 50 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. बाढ़ प्रभावित लोगों के बचाव, राहत और तत्काल प्रबंधन के लिए, अनुमान के मुताबिक 6 महीनों में करीब 8 अरब नेपाली रुपये चाहिए.
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