- नेपाल में भोटे कोशी नदी में भूस्खलन से आई बाढ़ में कम से कम 157 लोगों की मौत हुई है,
- लगभग 750 लोग लापता हैं जिनमें 133 भारतीय और कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं
- भारत ने नेपाल को दस टन राहत सामग्री और मेडिकल मदद भेजी है तथा बचाव कार्य में सहयोग कर रहा है
नेपाल में बुधवार को आई भयानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है. प्रकृति ने अपना क्रूर चेहरा दिखाया है, अपनी ताकत दिखाई है. अबतक लगभग 160 लोगों की मौत हो चुकी है, करीब 750 लोग अब भी लापता हैं. लापता लोगों में 133 भारतीय हैं. भोटे कोशी नदी में आया भयंकर सैलाब और भूस्खलन अपने साथ लोगों, घरों, गाड़ियों और पुल जैस जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर को बहा ले गया. लापता लोगों में विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. नेपाली अखबार ‘द काठमांडू पोस्ट' ने यह जानकारी दी है.
बुधवार को सुबह के समय अचानक आई इस बाढ़ ने नेपाल के तीन जिलों में भारी तबाही मचाई है. हाल के वर्षों में यह नेपाल की सबसे भयानक आपदाओं में से एक बन गई है. नेपाल पुलिस के ‘एक्स' पर किए गए पोस्ट में बताया कि इस भयानक बाढ़ में कम से कम 157 लोगों की मौत हुई है. यह बाढ़ तब आई जब भूस्खलन के कारण भोटे कोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंडे का रास्ता बंद हो गया. इसके बाद पानी का तेज बहाव चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी के नजदीक तिमुरे इलाके में पहुंचा. फिर पानी स्याफ्रुबेसी और आसपास की दूसरी बस्तियों की ओर तेजी से बहने लगा.
रसुवा जिल्लामा आएको बाढी अपडेट: मितिः २०८३/०५/१० गते २३:०५ बजेसम्म pic.twitter.com/iyQERlaMxO
— Nepal Police (@NepalPoliceHQ) August 26, 2026
इलाके में बारिश भी नहीं हो रही थी. इसलिए लोगों को बाढ़ आने की कोई चेतावनी नहीं मिली और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला. नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के मुताबिक, सैकड़ों लोग लापता हैं. इनमें 391 विदेशी नागरिक और 44 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. बाढ़ से जरूरी ढांचे को भी भारी नुकसान हुआ है.
भारत कर रहा मदद
इस बीच, नेपाल में राहत और बचाव का काम जारी है. भारत ने भी नेपाल के लिए मानवीय मदद भेजना शुरू कर दिया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत की मानवीय सहायता, आपदा राहत और मेडिकल मदद काठमांडू पहुंच गई है. जयशंकर ने ‘एक्स' पर लिखा, “भारत की मानवीय सहायता, आपदा राहत और मेडिकल मदद काठमांडू पहुंच गई है. राहत कार्यों में मदद के लिए और सहायता भेजी जा रही है.”
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ‘एक्स' पर बताया था कि भारत ने नेपाल की मदद के लिए 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री के साथ जरूरी दवाएं भेजी हैं. राहत अभियान के लिए भारतीय वायुसेना का C-130J विमान नेपाल भेजा गया है. यह विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर गया है. इसमें अस्थायी टेंट, कंबल, साफ-सफाई का सामान, सोलर लैंप और दवाएं जैसी जरूरी चीजें शामिल हैं.
अबतक क्या वजह समझ आ रही है?
नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बर्फीले भूस्खलन और उसके बाद मलबे से बनी झील के टूटने से रसुवा में भोतेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई हो सकती है. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने ‘एक्स' पर एक बयान में बताया कि प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती अध्ययन से पता चला है कि नेपाल-चीन सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के भूस्खलन के कारण ल्हेंडे नदी में ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ आई. यह घटना नेपाल-चीन रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुई.
हालांकि, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता शांति महत ने कहा कि एजेंसी को शुरुआती जानकारी यह भी मिली है कि बर्फीले भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता बंद हो गया था. यह जानकारी इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) के जरिए मिली, जिसे यह जानकारी चीन में मौजूद सूत्रों से मिली थी.
लापता लोगों की इतनी बड़ी संख्या ने चिंता बढ़ा दी है. मौतों की संख्या बढ़ सकती है. ‘द काठमांडू पोस्ट' के मुताबिक, बुधवार को आई यह बाढ़ नेपाल के आधुनिक इतिहास की सबसे घातक आपदाओं में से एक बन सकती है.
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