- नेपाल में भीषण जल प्रलय और मलबा बहने से सैकड़ों मकान, वाहन, सड़क, पुल और पनबिजली परियोजनाएं तबाह हो गईं
- त्रिशूली नदी पर बने पुराने छोटे पुल जिनमें पिलर नहीं था, बाढ़ में सुरक्षित बच गए हैं
- नेपाल सरकार और स्थानीय एजेंसियां राहत, बचाव और प्रभावितों की सुरक्षा के लिए लगातार अभियान चला रही हैं
नेपाल में बुधवार को आए भीषण जल प्रलय और मलबा बहकर आने से कई बस्तियां और गांव, सैकड़ों मकान, वाहन, सड़क और पुल के साथ-साथ कई पनबिजली परियोजनाएं भी बह गईं. इस त्रासदी के बाद 2400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं, वहीं करीब 2500 लोगों को बचाया भी गया है. मौसम की मार के बावजूद बचाव दल लगातार कोशिश कर रहे हैं. एनडीटीवी की टीम भी लगातार ग्राउंड जीरो से नेपाल में इस तबाही की तस्वीरें को दिखा रही है.
कवरेज के दौरान एनडीटीवी की टीम फुर्के खोला इलाके में पहुंची. जहां बाढ़ के दिए गहरे जख्म साफ नजर आ रहे थे. सैलाब ने त्रिशूली नदी पर बने कई पुल उखाड़ फेंके. वहीं कुछ पुराने पुल ही अब नदी पार करने का जरिया बच गए हैं. फुर्के खोला में एक ऐसा ही पुल सैलाब में भी बच गया, क्योंकि उसमें कोई पिलर नहीं था.
नेपाल सरकार पुराने पुलों की जगह नए पिलर वाले चौड़े पुल बना रही है. इस बाढ़ में लगभग वो सारे पुल बह गए और बिना पिलर वाले छोटे पुल ही बच गए, जिसके जरिए लोग पैदल, साइकिल या सिर्फ बाइक से नदी पार कर सकते हैं.

सैलाब के बाद बचाए गए भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक, तीर्थयात्री, कारोबारी और अन्य नागरिक नियमित रूप से आते-जाते हैं, ऐसे में बाढ़ की स्थिति के दौरान उनकी सुरक्षा भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है.
नेपाल में लगातार भारी बारिश और बाढ़ के कारण बिगड़े हालात के बीच अब तक 114 भारतीयों को भी सुरक्षित बचाया गया है. नेपाल सरकार ने शनिवार को ये जानकारी देते हुए कहा कि आपदा ग्रस्त इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है.

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26 अगस्त को रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा जिलों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भयानक बाढ़ के बाद, नेपाल का संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी), पर्यटक पुलिस और अन्य संबंधित पक्ष सरकारी एजेंसियों, सुरक्षा अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि आपदा पीड़ित पर्यटकों और यात्रियों की सुरक्षा और उनके ठिकाने का पता लगाया जा सके. जो लोग फंसे हुए हैं, घायल हैं या किसी अन्य तरह से प्रभावित हुए हैं, उनके लिए खोज, बचाव, सुरक्षित निकालने और सहायता के काम जारी हैं.

इसके साथ ही जानकारी दी गई है कि काठमांडू-मुगलिंग सड़क मार्ग अब पूरी तरह से चालू है और इस रास्ते पर सामान्य रूप से आवाजाही हो रही है. रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा में बाढ़ से प्रभावित कुछ सड़क हिस्सों को छोड़कर, देश भर में बाकी सड़क नेटवर्क आम तौर पर चालू हैं. साथ ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे स्थानीय अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें.
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