- नेपाल में आई भीषण बाढ़ को NDTV ने एनिमेशन, डेटा और सैटेलाइट एनालिसिस के जरिए समझाया है.
- जो ग्लेशियर टूटा था वह 28 फुटबॉल स्टेडियमों के बराबर क्षेत्रफल वाला था, जो तेजी से नीचे गिरा था.
- टूटने वाले इस ग्लेशियर की ऊंचाई 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' जैसी 8 प्रतिमाओं जितनी थी.
नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है. लेकिन यह बाढ़ कैसे आई और कैसे इतना ज्यादा नुकसान हुआ, इस पर NDTV ने एनिमेशन, डेटा और सैटेलाइट के जरिए समझाया है. आप एनालिसिस के जरिए ये यह समझ सकते हैं कि असल में नेपाल में आई तबाही की शुरुआत किसी भूकंप से नहीं, बल्कि तिब्बत के पहाड़ों में 4000 फीट ऊपर से गिरे एक विशाल ग्लेशियर से हुई थी, जब यह ग्लेशियर धरती पर गिरा तो इतना तेज कंपन हुआ कि सीस्मोग्राफ पर 5.2 तीव्रता का झटका रिकॉर्ड हुआ था. हम आपको 5 पॉइंट के जरिए इस पूरी आपदा को समझाते हैं.
17000 फीट ऊंचाई पर टूटा ग्लेशियर
वीडियो में सबसे पहले आपको नेपाल की बर्फीली और खौफनाक चोटियां पर नजर आती हैं. जहां 17000 हजार फीट की ऊंचाई पर जमी सफेद बर्फ अचानक चटकती है. देखते ही देखे 2000 फीट चौड़ा विशालकाय ग्लेशियर ढांचा अपने ही बोझ से टूटता है और सीधे 4000 फीट नीचे घाटी की तरफ बेकाबू होकर तेज रफ्तार से गिरता है. नेपाल में बाढ़ से आई तबाही इसी ग्लेशियर के टूटने से हुई थी, यह ग्लेशियर लगभग 28 फुटबॉल स्टेडियमों के बराबर क्षेत्रफल वाला था. जबकि इसकी ऊंचाई 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' जैसी 8 प्रतिमाओं के बराबर थी. यानि आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह ग्लेशियर कितना खतरनाक था. ग्लेशियर टूटना ही इस तबाही का पहला पार्ट था. इसके बाद बाढ़ का असली नजारा शुरू हो गया था.
धमाके से कांप उठी धरती
इतनी भारी मात्रा में बर्फ और मलबे का इतनी ऊंचाई से गिरना एक बहुत बड़े धमाके जैसा था. जब यह मलबा घाटी की सतह से टकराया, तो उससे 5.2 की कंपन निकली. ऐसा लगा जैसे कोई बड़ा धमाका अचानक से कर दिया गया हो, जिससे सबकुछ सन्न रह गया. अमेरिका के भूगर्भ सर्वेक्षण ने भी शुरुआती आंकड़ों के विश्लेषण के बाद यह पुष्टि की कि ग्लेशियर गिरने के इम्पैक्ट से ही धरती कांपी थी.
कैसे टाइम बम की तरह तैयार हुआ मलबा
4000 फीट नीचे गिरने के बाद मलबे ने 'ल्हेन्डे खोला' नदी के प्रवाह को पूरी तरह रोक दिया. आप एनिमेशन के जरिए समझ सकते हैं कि पानी का बहाव कुछ ही देर में इस मलबे की वजह से 'लिक्विड कंक्रीट' यानि कीचड़ में बदल जाता है. जब यह पानी में समाता है तो पानी का बहाव रुक जाता और यह किसी प्राकृतिक बांध की तरह अपना काम करता है. जिसके पीछे तेजी से पानी जमा होन लगता है. यह एक टाइम बम की तरह तैयार होता है जो आगे तबाही मचाने के लिए तैयार हो जाता है.
सुनामी का रौद्र रूप
जब पानी का दबाव नदी में तेजी से बढ़ता है तो जमा यह मलबा किसी धमाके की तरह टूट जाता है. पानी और कीचड़ का एक 100 फीट ऊंचा खतरनाक पहाड़ अचानक से सबकुछ तोड़ता हुआ आगे बढ़ता है. यह मलबा मात्र 30 मिनट के अंदर नेपाल के भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों का जलस्तर अचानक 30 से 70 फीट तक बढ़ा देता है. जिसके बाद पहाड़ी रास्तों पर बसे खूबसूरत मकान, कंक्रीट के मजबूत पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स इस मटमैली सुनामी के आगे तिनके की तरह बहते हुए गायब हो जाते हैं. यह एक ऐसी सुनामी होती है, जिसमें बडे़ से बड़े पुल नहीं टिक पाते हैं तो इंसान की यहां बिसात ही क्या था. यह तेज रफ्तार से आगे बढ़ता गया और नेपाल में तबाही लाता गया.
नेपाल में भीषण तबाही
जब नदी का यह रौद्र रूप शांत हुआ तो नेपाल में हर तरफ तबाही दिख रही थी. नदियों के किनारे बने घर, बाजार और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पानी में तिनके की तरह बह गए. जिन पर सालों से काम चल रहा था. वह सबकुछ कुछ चंद मिनटों में तबाह हो गया. इस भीषण बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों तक देखने को मिल रहा है, जहां बिहार के बाल्मीकिनगर बैराज के सभी गेट खोलने पड़े और कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया. जिसका असर अब तक दिख रहा है.
नेपाल में आई बाढ़ का असर अभी दिख रहा है. यहां रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है. जबकि लोगों का घर, परिवार और उनकी जिंदगी पूरी तरह से बेपटरी हो गई है. नेपाल को फिर से पटरी पर आने में लंबा समय लगेगा.
ये भी पढ़ेंः हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में फट सकती हैं 407 ग्लेशियल झीलें, नेपाल से भी बड़ा खतरा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं