- NASA के वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर 730 फीट चौड़ा और दो साल पुराना नया गड्ढा खोजा है
- यह गड्ढा 2024 की गर्मियों में किसी धूमकेतु या क्षुद्रग्रह के टकराने से बना माना जा रहा है
- इस गड्ढे का आकार 222 मीटर है और इसे McGetchin नाम दिया गया है जो बहुत दुर्लभ घटना है
NASA के वैज्ञानिकों को चांद की सतह पर एक बहुत बड़ा और केवल 2 साल पहले बना गड्ढा मिला है. इसकी खास बात यह है कि इस तरह का बड़ा गड्ढा चांद पर बनना करीब 100 साल में एक बार या उससे भी ज्यादा समय में होता है. नासा के एक रिसर्चर ने इस नए गड्ढे की खोज की है. NASA के मुताबिक इस गड्ढे को 'मैकगेटचिन' (McGetchin) नाम दिया गया है. इसका आकार करीब 730 फीट यानी 222 मीटर चौड़ा है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह गड्ढा 2024 की गर्मियों में बना था. उस समय एक धूमकेतु (कॉमेट) या क्षुद्रग्रह (एस्ट्रॉयड) चांद से आकर टकराया होगा. वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक, जिस कॉमेट या एस्ट्रॉयड के टकराने से यह गड्ढा बना, उसका आकार 3 से 6 मंजिला इमारत जितना था. NASA ने अपने ब्लॉग में कहा कि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस आकार का कोई बड़ा टकराव चांद पर करीब 100 साल में एक बार या उससे भी लंबे समय में होता है.
2 साल तक गड्ढा रहा, लेकिन किसी को पता नहीं चला
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार हैरानी की बात यह है कि यह गड्ढा चांद पर पिछले 2 साल से मौजूद था, लेकिन इसकी खोज अब हुई. NASA के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) से जुड़े शोधकर्ता रॉबर्ट वैगनर ने चांद की सतह का नया स्कैन देखा. इसी दौरान उनकी नजर इस गड्ढे पर पड़ी. LRO की तस्वीर में यह गड्ढा एक बड़े चमकीले धब्बे के रूप में दिखाई दिया, जिसके चारों ओर काला घेरा था. LRO एक अंतरिक्ष यान है, जो 2009 से लगातार चांद की स्टडी कर रहा है.
बुधवार को 'साइंस एडवांसेज' जर्नल में छपी एक स्टडी में बताया गया कि यह सौर मंडल में अब तक खोजा गया सबसे बड़ा नया गड्ढा है.
इस जानकारी से भविष्य में चांद पर जाने वाले मानव मिशनों की तैयारी भी बेहतर हो सकती है. फिलहाल अमेरिका और चीन, दोनों ही चांद पर इंसानों को भेजने की योजनाओं पर काम कर रहे हैं. चांद और धरती के बीच एक बड़ा अंतर भी इस तरह के गड्ढों की वजह समझने में मदद करता है. धरती के उलट चांद के चारों ओर लगभग कोई वायुमंडल (एटमॉस्फेयर) नहीं है. इसलिए अंतरिक्ष से आने वाला मलबा या कोई एस्ट्रॉयड चांद की तरफ आते समय हवा में धीमा नहीं पड़ता और न ही जलकर खत्म होता है. वह लगभग सीधे चांद की सतह से टकरा जाता है, जिससे ऐसे बड़े गड्ढे बन सकते हैं.
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