- अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 1984 में लगभग 1.25 करोड़ टमाटर के बीज अंतरिक्ष में भेजे थे.
- टमाटर के बीजों को अंतरिक्ष में 6 साल तक रखा गया, जो चैलेंजर दुर्घटना के कारण था.
- अंतरिक्ष से लौटे बीजों का अंकुरण सामान्य बीजों की तुलना में बेहतर और तेज पाया गया है.
NASA SEEDS Mission: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने सालों पहले टमाटर के लाखों बीज अंतरिक्ष में भेजे थे. कई सालों तक ये बीज अंतरिक्ष में रहे. फिर उसे धरती पर लाया गया. जिसके बाद इसे दुनिया के 40 अलग-अलग देशों में लगाया गया. टमाटर की इन बीज को अंतरिक्ष में ले जाने से लेकर वापस धरती पर लाने और उसे उगाने तक की पूरी प्रक्रिया पर डिटेल स्टडी की गई. हर एक बारीक चीजों पर ध्यान रखा गया. इस स्टडी का असर चौंकाने वाला दिखा. नासा का कहना है कि अब तक इन टमाटर के पौधों पर 8 हजार से ज्यादा रिपोर्ट को सौंपा जा चुका है.
जीरो ग्रेविटी का बीजों पर क्या असर?
रिपोर्ट कहती है कि नासा (NASA) का टमाटर बीज प्रयोग अंतरिक्ष विज्ञान और कृषि के क्षेत्र में एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक मिशन रहा है. इस मिशन के जरिए नासा ने यह समझने की कोशिश की कि जीरो ग्रेविटी और अंतरिक्ष के विकिरण का बीजों के अंकुरण और पौधों के विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है?
1984 में अंतरिक्ष में भेजे गए थे 1.25 करोड़ टमाटर बीज
नासा ने जॉर्ज डब्ल्यू पार्क सीड कंपनी के साथ मिलकर 'SEEDS' (Space Exposed Experiment Developed for Students) कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इस मिशन के तहत 1984 में नासा के चैलेंजर अंतरिक्ष यान के जरिए लगभग 12.5 मिलियन (1.25 करोड़) टमाटर के बीजों को अंतरिक्ष में भेजा गया था.
एक साल में ही लाना था वापस, लेकिन एक हादसे के कारण 6 साल ISS में ही रहे
मूल योजना इन्हें 1 साल में वापस लाने की थी, लेकिन 1986 में हुए चैलेंजर हादसे के कारण ये बीज लगभग 6 साल तक अंतरिक्ष की कक्षा में ही घूमते रहे. जनवरी 1990 में कोलंबिया अंतरिक्ष यान की मदद से इन्हें वापस लाया गया. जिसके बाद इसे अलग-अलग देशों में लगाया गया.

अंतरिक्ष में उगाए जा रहे पौधे. ISS की यह तस्वीर NASA ने साझा की थी.
रिपोर्ट- धरती पर रखे बीजों से बेहतर रहा अंकुरण
अंतरिक्ष से वापस लाए गए टमाटर की इन बीजों को दुनिया भर के स्कूलों में बच्चों को रिसर्च के लिए बांटा गया. फिर उसके अंकुरन पर नजर रखी गई. वैज्ञानिकों और छात्रों ने पाया कि अंतरिक्ष के रेडिएशन में रहने के बावजूद इन बीजों का अंकुरण सामान्य बीजों की तुलना में 73.8% रहा, जो कि धरती पर रखे गए बीजों (70.3%) से भी थोड़ा बेहतर और तेज था.
नासा और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) का एक ज्वाइंट मिशन आज भी जारी है. अब इस मिशन के तहत हर साल टमाटर के बीजों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) भेजा जाता है.
अमेरिका और कनाडा के स्कूली बच्चों को बांटे गए बीज
वहां कुछ सप्ताह या महीने बिताने के बाद इन बीजों को वापस लाकर अमेरिका और कनाडा के स्कूलों में मुफ्त वितरित किया जाता है. छात्रों को बीज के दो पैकेट दिए जाते हैं. एक अंतरिक्ष वाले बीज और दूसरे धरती वाले सामान्य बीज. दोनों तरह के बीजों को लगाया जाता है. बीजों के अंकुरन के बाद दोनों के रिपोर्ट डिटेल में तैयार किए जाते हैं.
मंगल और चांद पर भी पौधे उगाने का टारगेट
अंतरिक्ष में बीज भेजने के साथ-साथ अब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पौधे भी उगाए जा रहे हैं. अब अगला लक्ष्य मंगल और चंद्रमा पर भी खेती का है. इसके लिए टमाटर को चुना गया है, क्योंकि यह एक सुपरफूड है. इसे उगाना आसान है. साथ ही इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन A, C और लाइकोपीन होता है.
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