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अब अंतरिक्ष में तैयार होगी विस्की, 5 साल धरती के चक्कर काटेगी शराब, स्वाद होगा सुपर बोल्ड!

स्कॉटलैंड और जापान के इंजीनियर 'क्यूबसैट' (CubeSat) नाम का एक छोटा सैटेलाइट भेजने की योजना बना रहे हैं. इस सैटेलाइट में विस्की रखी जाएगी और इसे पांच साल तक धरती के ऑर्बिट यानी कक्षा में घुमाया जाएगा. फिर समझा जाएगा कि इससे शराब के मैच्योर होने का वक्त और उसके स्वाद पर क्या असर पड़ता है.

अब अंतरिक्ष में तैयार होगी विस्की, 5 साल धरती के चक्कर काटेगी शराब, स्वाद होगा सुपर बोल्ड!
अब अंतरिक्ष में तैयार होगी विस्की, 5 साल धरती के चक्कर काटेगी शराब (प्रतिकात्मक AI फोटो)
  • पहली बार अंतरिक्ष में व्हिस्की की एजिंग करने का एक्सपेरिमेंट स्कॉटलैंड और जापान के इंजीनियर कर रहे हैं
  • 2028 में SpaceX के सप्लाई मिशन के माध्यम से क्यूबसैट सैटेलाइट को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भेजा जाएगा
  • सैटेलाइट में व्हिस्की के सैंपल लकड़ी के छोटे टुकड़ों के साथ रखे जाएंगे ताकि बैरल जैसा वातावरण बनाया जा सके

शराब पी जाएगी जमीन पर लेकिन तैयार होगी अंतरिक्ष में... यकीन मानिए हम मजाक नहीं कर रहे हैं. पहली बार अंतरिक्ष में व्हिस्की को पुराना किया जाएगा यानी उसकी एजिंग की जाएगी. कोशिश यह पता लगाने की है कि क्या पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) में घूमने से विस्की के मैच्योर होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है और इस ड्रिंक का बेहतर वर्जन तैयार हो सकता है.  दरअसल शराब की एजिंग और उसका मैच्योर होना वह प्रक्रिया है जिसमें शराब को बनने के बाद एक निश्चित समय तक लकड़ी के बैरल या कांच की बोतल में रखा जाता है ताकि उसका स्वाद, गंध और रंग बेहतर हो सके. अबतक तो इंसान यह काम धरती पर ही करते आए हैं लेकिन अब तैयारी इस प्रक्रिया को अंतरिक्ष में अंजाम देने की है. 

प्लानिंग क्या है?

आप प्लान एकदम आसान हिंदी में समझिए. स्कॉटलैंड और जापान के इंजीनियर एक छोटा सैटेलाइट भेजने की योजना बना रहे हैं,  जिसे 'क्यूबसैट' (CubeSat) कहा जाता है. द टेलीग्राम की रिपोर्ट के अनुसार इस सैटेलाइट में व्हिस्की के सैंपल लकड़ी के बहुत छोटे टुकड़ों के साथ रखे जाएंगे ताकि वे लकड़ी बैरल जैसा माहौल बना सकें. साथ ही, व्हिस्की बनाने में इस्तेमाल होने वाली मुख्य सामग्री भी इसमें होगी. व्हिस्की से जुड़े इस एक्सपेरिमेंट का नाम 'स्पेस पफिन' रखा गया है.

योजना यह है कि 2028 में SpaceX के सप्लाई मिशन के जरिए इस क्यूबसैट को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) भेजा जाए. इसके बाद, इसे ISS के जापानी मॉड्यूल से पांच साल के मिशन के लिए ऑर्बिट में भेजा जाएगा. उम्मीद है कि जब व्हिस्की हर 90 मिनट में पृथ्वी का चक्कर लगाएगी, तो बहुत ज्यादा गर्मी और कड़ाके की ठंड के बीच बार-बार होने वाले बदलाव से इसके मैचुरेशन की प्रक्रिया तेज हो सकती है. इससे भविष्य में 'स्पेस-एज्ड व्हिस्की' (अंतरिक्ष में तैयार व्हिस्की) के उत्पादन का रास्ता खुल सकता है. रिपोर्ट के अनुसार इस प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. गाइल्स बैलेट को उम्मीद है कि इस अनोखे सफर के कारण इसका स्वाद बहुत बोल्ड होगा. मतलब एकदम जबरदस्त.

अभी धरती पर शराब नहीं डेटा वापस आएगा

अंतरिक्ष में रहने के दौरान क्यूबसैट सैटेलाइट पर मौजूद व्हिस्की पर नजर रखी जाएगी और उसके रंग और केमिकल बनावट से जुड़ा डेटा जमीन पर मौजूद वैज्ञानिकों को भेजा जाएगा. यहां ध्यान रखने वाली बात है कि क्यूबसैट को उसके पांच साल के मिशन के आखिर में वापस नहीं लाया जाएगा, लेकिन इस मिशन से मिला डेटा आगे इसी सपने को हकीकत में बदलेगा. मिशन को लीड कर रहे डॉ. बैलेट ने कहा कि वह अंतरिक्ष में व्हिस्की को मैच्योर करने की प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर करने और एक ऐसा सिस्टम बनाना चाहते हैं जिससे स्पिरिट को अंतरिक्ष में भेजा जा सके और मैच्योर होने के बाद उसे पृथ्वी पर वापस लाया जा सके.

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