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मंगल का 'धक्का' और 1600KM/H की रफ्तार, अंतरिक्ष के सबसे बड़े खजाने की ओर बढ़ा NASA का साइकी, पूरा मिशन समझिए

नासा का साइकी स्पेसक्राफ्ट मंगल ग्रह के करीब से गुजरते हुए उसकी खूबसूरत तस्वीरें खींचकर अपने मुख्य लक्ष्य 'साइकी क्षुद्रग्रह' की ओर बढ़ गया है.

मंगल का 'धक्का' और 1600KM/H की रफ्तार, अंतरिक्ष के सबसे बड़े खजाने की ओर बढ़ा NASA का साइकी, पूरा मिशन समझिए
  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का साइकी स्पेसक्राफ्ट 15 मई को मंगल ग्रह के करीब से गुजरा और तस्वीरें लीं
  • साइकी स्पेसक्राफ्ट ने मंगल ग्रह के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके अपनी गति बढ़ाई और क्षुद्रग्रह की ओर बढ़ा
  • अंतरिक्ष यान अक्टूबर 2023 में लॉन्च हुआ था और लगभग 3 साल में मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट के बाहरी किनारे पहुंचेगा
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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का साइकी स्पेसक्राफ्ट मंगल ग्रह के बेहद करीब से गुजरा. इस दौरान साइकी ने इस लाल ग्रह की खूबसूरत तस्वीरें भी ली हैं. मंगल ग्रह के इतने करीब जाने के पीछे भी एक बड़ी वजह है. यह अंतरिक्ष यान एक क्षुद्रग्रह 'साइकी' की ओर जा रहा है. आइए बताते हैं आखिर इस स्पेसक्राफ्ट का का पूरा मिशन क्या है.

क्यों पहुंचा मंगल ग्रह के करीब?

NASA ने बताया कि 15 मई को साइकी स्पेसक्राफ्ट मंगल ग्रह के पास पहुंचा. मंगल ग्रह के गुरुत्वाकर्षण बल ने साइकी को 1000 मील प्रति घंटे की स्पीड प्रदान की. इसी दौरान साइकी ने मंगल ग्रह की शानदार तस्वीरें भी लीं. इसके बाद यह अपनी मंजिल यानी साइकी क्षुद्रग्रह की ओर बढ़ गया. 

NASA के अनुसार, 15 मई को यह अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह से 2,800 मील यानी करीब 4,500 किमी की दूरी से गुजरा. उस समय इसकी गति 12,333 मील प्रति घंटा यानी करीब 19,848 किमी प्रति घंटा के आसपास थी. इस दौरान इसने लाल ग्रह के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव का इस्तेमाल करते अपनी स्पीड बढ़ाई और क्षुद्रग्रह लक्ष्य की ओर जाते हुए अपनी उड़ान के रास्ते को आसान किया.

यह मिशन क्यों है इतना खास?

साइकी प्रोब का नाम उसी क्षुद्रग्रह के नाम पर रखा गया है, जिसका अध्ययन करने के लिए इसे डिजाइन किया गया था. इसे अक्टूबर 2023 में 2.2 अरब मील की नियोजित यात्रा पर लॉन्च किया गया था. उम्मीद है कि यह लगभग तीन साल में अपने गंतव्य तक पहुच जाएगा, जो मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट के बाहरी किनारों पर स्थित है. साइकी क्षुद्रग्रह पर धातुओं का भंडार है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्राचीन आदि-ग्रह (protoplanet) का बचा हुआ मूल भाग है.

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साइकी अंतरिक्ष यान की खासियत?

साइकी अंतरिक्ष यान आकार में एक छोटी वैन जितना है. यह अगस्त 2029 में अपने गंतव्य तक पहुंच सकता है और 26 महीनों तक क्षुद्रग्रह की परिक्रमा करने की उम्मीद है. इस दौरान यह आकाशीय चट्टान को अपने डिवाइस से स्कैन करेगा ताकि इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति, चुंबकीय गुणों और बनावट को मापा जा सके. इसके बाद, अंतरिक्ष यान क्षुद्रग्रह के और भी करीब आता जाएगा और 2031 में अपना मिशन समाप्त कर देगा.

अपनी तरह का यह पहला क्षुद्रग्रह है जिसे किसी अंतरिक्ष यान द्वारा करीब से अध्ययन करने के लिए चुना गया है. माना जाता है कि साइकी मुख्य रूप से लोहा, निकेल, सोना और अन्य धातुओं से बना है और इसकी कुल कीमत क्वाड्रिलियन डॉलर आंकी गई है. यह रकम पूरी दुनिया की जीडीपी से 80 गुना ज्यादा है.

लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मिशन का स्पेस माइनिंग से कोई लेना-देना नहीं है. इसका उद्देश्य पृथ्वी और अन्य चट्टानी ग्रहों के निर्माण को बेहतर ढंग से समझना है, जो पिघली हुई धातु के कोर के चारों ओर बने हैं. पृथ्वी का पिघला हुआ केन्द्र इतना गहरा और इतना गर्म है कि उसकी सीधे तौर पर कभी भी जांच नहीं की जा सकती.

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क्या है साइकी के नाम की कहानी?

1852 में खोजा गया और ग्रीक पौराणिक कथाओं में आत्मा की देवी के नाम पर 'साइकी' नाम दिया गया यह क्षुद्रग्रह, लगभग नौ ज्ञात क्षुद्रग्रहों में सबसे बड़ा है. जमीन पर स्थित रडार से मिली जानकारी के मुताबिक यह क्षुद्रग्रह मुख्य रूप से धातु से बने प्रतीत होते हैं, जिनमें चट्टानी पदार्थ भी मिश्रित होते हैं. फिर भी वैज्ञानिक केवल अनुमान ही लगा सकते हैं कि साइकी कैसा दिखता है, जब तक कि प्रोब इसकी पहली तस्वीरें वापस नहीं भेज देता. इस क्षुद्रग्रह की उत्पत्ति के बारे में सबसे प्रचलित परिकल्पना यह है कि साइकी, एक ऐसे बेबी प्लानेट का कभी पिघला हुआ और अब पूरी तरह से जम चुका आंतरिक हिस्सा है, जो सौर मंडल की शुरुआत में अन्य आकाशीय पिंडों से हुई टक्करों के कारण टूटकर बिखर गया था. अपने सबसे चौड़े बिंदु पर लगभग 279 किमी चौड़ा यह क्षुद्रग्रह, सूर्य की परिक्रमा पृथ्वी की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक दूरी पर करता है. 

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