- डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान इस वीकेंड (शनिवार-रविवार) एक समझौते पर सहमत हो सकते हैं
- पिछले 66 दिनों में ट्रंप कम से कम 39 बार सार्वजनिक रूप से यह दावा कर चुके हैं कि डील तो बस होने ही वाली है
- एक्सपर्ट के अनुसार अभी कहना यह जल्दबाजी होगी कि दोनों देशों में डील हो सकती है
क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस बात पर दुनिया भरोसा करे कि अगले दो दिन में ईरान और अमेरिका के बीच समझौता हो जाएगा, डील पर मुहर लग जाएगी? यह सवाल सबकी जुबान पर है और हो भी क्यों नहीं. डोनाल्ड ट्रंप पिछले 66 दिनों में 39 बार ठीक यही बात बोल चुके हैं कि डील बस होने ही वाली है. इस बार उन्होंने यहां तक कह दिया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म हो चुका है और डील बस होने ही वाली है.
ट्रंप का दावा और उनका दावों का रिकॉर्ड
अमेरिका- ईरान जंग की मार पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था झेल रही है और ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार उम्मीदें और बढ़ा दी हैं. उन्होंने गुरुवार को कहा कि अमेरिका और ईरान इस वीकेंड (शनिवार-रविवार) एक समझौते पर सहमत हो सकते हैं, जो लगभग तीन महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने का रास्ता तय करेगा. ट्रंप का युद्ध अमेरिका में आम लोगों को रास नहीं आ रहा है, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग रिकॉर्ड निचले स्तर पर है और इस जंग ने वैश्विक तेल बाजारों को भी हिला दिया है.
फिर भी, ट्रंप का दावा है कि इस बार स्थिति अलग हो सकती है और समझौता वास्तव में हो सकता है. लेकिन सच्चाई यह है कि यह पहली दफा नहीं है जब ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान से डील बस होने ही वाली है. सीएनएन की एक एनालिसिस के अनुसार पिछले 66 दिनों में ट्रंप कम से कम 39 बार सार्वजनिक रूप से यह दावा कर चुके हैं कि डील तो बस होने ही वाली है.
एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रमुख विशेषज्ञ हर्ष पंत ने NDTV से बात करते हुए कहा, "यह समझना बहुत मुश्किल है कि ट्रंप अभी क्या कर रहे हैं. ईरान ने अभी तो इस बात से इनकार ही किया है कि किसी डील पर सहमति बनी है. लेकिन ट्रंप का लगातार तीसरे दिन ईरान पर हमले का ऐलान करने के बाद पीछे हटना, और फिर वीकेंड में समझौते पर साइन करने की बात करना, ऐसा लगता है खाड़ी के सहयोगी देशों का दबाव भी ट्रंप पर पड़ा है. अगर ईरान पर बड़े स्तर पर हमला हुआ तो ईरानी सेना क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगी. इससे बहरीन से लेकर कतर, यूएई और सऊदी अरब को परेशानी होगी."
उन्होंने आगे कहा, "ऐसा लगता है कि सहयोगी देशों के स्टैंड को देखते हुए ट्रंप ने अपने प्लान (हमले का) पर फिर से विचार किया होगा. वहीं दूसरी तरफ ईरान को लग रहा है कि उनकी स्थिति मजबूत है, उनका अपर हैंड है. वे भी अपनी बातों पर अड़े हैं. ऐसे में अभी कहना यह जल्दबाजी होगी कि डील दोनों देशों में हो सकती है. अगर दोनों के बीच किसी डील का ऐलान भी होता है तो नजर इस बात पर भी रहेगी कि यह डील टिकेगी या नहीं."
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