- ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब मिसाइलों और बमों सहित हर संभव तरीके से दिया है
- 28 फरवरी से अब तक विदेश में रह रहे 1.65 लाख सीरियाई और 41,900 अफगान नागरिक अपने देश लौट चुके हैं
- युद्ध के कारण लेबनान में 10.49 लाख और अफगानिस्तान में 1.15 लाख नए आंतरिक विस्थापित लोग दर्ज किए गए हैं
ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब मिसाइलों से लेकर बमों तक, हर संभव तरीके से दिया है. हालांकि, ऐसे आम लोग भी हैं, जो इस युद्ध में बच नहीं पाए. कुछ ईरानी नागरिक दूसरे देशों में चले गए, जबकि अन्य देशों के लोग स्वदेश लौट आए. युद्ध जारी रहने के कारण कई लोग अपने ही देश में बेदखल हो गए हैं.
पड़ोसी देशों में प्रवेश
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार, 28 फरवरी से 26 मार्च के बीच 51,500 से अधिक ईरानी तुर्की में प्रवेश कर चुके हैं. इसी अवधि में 24,500 से अधिक लेबनानी सीरिया में प्रवेश कर चुके हैं.
अपने देश वापसी
इस संकट ने लोगों को अपने मूल देशों में लौटने के लिए भी मजबूर किया है. 28 फरवरी से अब तक विदेश में रह रहे 1.65 लाख सीरियाई नागरिक अपने देश लौट चुके हैं और 41,900 अफगान नागरिक वापस आ गए हैं.

देश से हुए बेदखल
युद्ध के शुरुआती दिनों में ही कई देशों में आंतरिक विस्थापन बढ़ गया था. लेबनान में 16 मार्च तक 10.49 लाख नए विस्थापित लोग दर्ज किए गए हैं. अफगानिस्तान में भी 1.15 लाख नए विस्थापित लोग शामिल हुए हैं. पाकिस्तान ने भी नए विस्थापित व्यक्तियों को दर्ज किया है. गौरतलब है कि हाल के दिनों में पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष भी तेज हो गया है.
सीमा पार हमलों में आम नागरिकों की मौतें
मध्य पूर्व क्षेत्र के देशों से लगातार जारी युद्ध में हुई मौतों की रिपोर्ट आ रही है. इसका असर अब युद्ध केंद्रों से दूर स्थित इलाकों में भी दिखाई दे रहा है. 26 मार्च, दोपहर 2:30 बजे तक, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका से जुड़े हमलों के परिणामस्वरूप ईरान में 1,094, लेबनान में 1,937, इराक में 89 और सीरिया में चार लोगों की मौत हो चुकी है.

ईरान के हमलों के कारण कई देशों में मौतें हुई हैं. इनमें इजरायल में 19, कतर में 16, संयुक्त अरब अमीरात में 11, कुवैत में छह, साइप्रस और फिलिस्तीन में चार-चार, बहरीन और ओमान में तीन-तीन और सऊदी अरब में दो मौतें शामिल हैं. अमेरिकी सेना ने भी ईरान से जुड़े हमले में 13 मौतों की सूचना दी है.
लोगों के पलायन के कई कारण हैं. कुछ परिवार असुरक्षा के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों को छोड़ रहे हैं, जबकि अन्य जीवन स्थितियों में बदलाव के कारण अपने गृह देशों में लौट रहे हैं. आवास, सेवाओं या स्थिर आय तक पहुंच खोने के बाद कई लोग अपने ही देशों में स्थानांतरित हो रहे हैं. आवागमन में ये बदलाव, हताहतों की बढ़ती संख्या के साथ, यह दर्शाते हैं कि ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष किस प्रकार पूरे क्षेत्र में लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, यहां तक कि युद्ध के मुख्य क्षेत्रों से दूर के स्थानों में भी.
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