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This Article is From Mar 26, 2026

ईरान समझौते की भीख मांग रहा है, हमने उनकी नेवी को तबाह कर दिया: डोनाल्ड ट्रंप

इन बनते बिगड़ते संबंधों के बीच भारत समेत कई देश अब लंबे समय के लिए प्लानिंग करने लगे हैं. आशंका है कि अभी ये युद्ध लंबा खिंच सकता है.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे.

ईरान समझौते की भीख मांग रहा है, हमने उनकी नेवी को तबाह कर दिया: डोनाल्ड ट्रंप
ईरान और नाटो को लेकर ट्रंप निराश नजर आ रहे हैं.
  • डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो परिणाम भयानक होंगे और पीछे लौटना असंभव होगा
  • ट्रंप ने नाटो को चेतावनी दी है कि अमेरिका ईरान युद्ध में नाटो के रवैये को कभी नहीं भुलाएगा और निराश है
  • नाटो के देशों ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में एकजुटता नहीं दिखाई है, जिससे ट्रंप का विश्वास कम हुआ है

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब बेहद आक्रामक हो गए हैं. उन्होंने ईरान से चल रही लड़ाई के बीच गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने दावा किया कि ईरान उनसे समझौता करने की भीख मांग रहा है. ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान की नेवी को तबाह कर दिया है. हमने ईरान को न सिर्फ हराया है बल्कि उन्हें तबाह भी किया है." इस प्रेस वार्ता के दौरान NATO देशों को लेकर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि हमें उनकी नहीं, बल्कि उन्हें हमारी जरूरत है. आपको बता दें कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ देर पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर ईरान को नई धमकी दी. उन्होंने साफ किया है कि अगर जल्द समझौते पर नहीं माने तो परिणाम भयानक होंगे. इसके साथ ही उन्होंने नाटो को भी धमकी दी है कि वो और अमेरिका ईरान युद्ध में नाटो के रवैये को कभी नहीं भूलेंगे.

ईरान को ट्रंप ने क्या नई धमकी दी   

ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और "अजीब" हैं. वे हमसे समझौता करने की "भीख" मांग रहे हैं, जो उन्हें करना ही चाहिए क्योंकि वे सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित हो चुके हैं और उनके वापसी की कोई संभावना नहीं है, फिर भी वे सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि वे केवल "हमारे प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं." गलत!!! उन्हें जल्द ही गंभीरता दिखानी चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्योंकि एक बार ऐसा हो गया तो फिर पीछे मुड़ना संभव नहीं होगा, और परिणाम अच्छे नहीं होंगे!"

ईरान युद्ध नये समीकरण गढ़ रहा है. दोस्त और गठबंधन टूट और छूट रहे हैं. नाटो और अमेरिका का नाता दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अटूट रहा है, लेकिन ईरान युद्ध में तो दूर नाटो देश होर्मुज खुलवाने के ट्रंप के प्लान में भी बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे. यही कारण है कि इस युद्ध में ट्रंप कई बार नाटो को सुना चुके हैं और आज तो उन्होंने कह दिया कि इस बात को अमेरिकी लोगों और नाटो को कभी नहीं भूलना चाहिए. 

नाटो को ट्रंप ने फिर क्या सुनाया

अपने सोशल ट्रूथ पर ट्रंप ने लिखा, "नाटो देशों ने ईरान जैसे विक्षिप्त राष्ट्र की मदद के लिए सरासर कुछ नहीं किया है, जो अब सैन्य रूप से पूरी तरह तबाह हो चुका है. अमेरिका को नाटो से कुछ भी नहीं चाहिए, लेकिन इस बेहद महत्वपूर्ण क्षण को "कभी मत भूलना"!" 

नाटो के देश दूसरा समीकरण बना रहे

साफ जाहिर है कि ट्रंप अब नाटो से बेहद निराश हो चुके हैं और ऐसा लगता है कि वो अब मन बना चुके हैं कि नाटो के अस्तित्व से अमेरिका को कोई लाभ नहीं है. ट्रंप कुछ दिनों पहले ही नाटो को डरपोक तक कह चुके हैं. इससे पहले वो नाटो देशों को अमेरिका के भरोसे बैठे रहने वाले देश भी बता चुके हैं. नाटो की तरफ से भी ईरान युद्ध के बाद आधिकारिक बयान आ चुका है कि नाटो के सिद्धांत के अनुसार, सिर्फ हमला होने की स्थिति में ही नाटो के सभी देश एकजुट होकर मुकाबला करेंगे. नाटो के किसी देश ने अगर दूसरे देश पर हमला किया तो फिर नाटो देश उसका हिस्सा नहीं होंगे. साफ है कि नाटो भी अब अमेरिका के भरोसे नहीं रहना चाहता और अपनी लकीर खुद खींचने में लगा है. इसीलिए पश्चिमी देश ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और  जर्मनी के नेतृत्व में अब अपनी सुरक्षा को मजबूत करने में जुटे हैं.

रूस-अमेरिका नजदीक आ रहे

उधर, क्रेमलिन ने गुरुवार को कहा कि रूसी सांसदों का एक समूह मॉस्को और वाशिंगटन के बीच संबंधों को "पुनर्जीवित" करने के उद्देश्य से संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा कर रहा है. रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस सप्ताह वाशिंगटन में होने वाली बैठकों में वे अमेरिकी सांसदों से मुलाकात करेंगे.  एएफपी द्वारा इस यात्रा के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा, "हमें उम्मीद है कि ये प्रारंभिक कदम निश्चित रूप से हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने में योगदान देंगे." यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही वार्ता लगभग ठप पड़ी है. पेस्कोव ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस यात्रा के लिए "मुख्य निर्देश" तय किए हैं और अमेरिका में बैठकों के बाद उन्हें "विस्तृत जानकारी" दी जाएगी.

ईरान युद्ध चिंताजनक स्थिति में

इन बनते बिगड़ते संबंधों के बीच भारत समेत कई देश अब लंबे समय के लिए प्लानिंग करने लगे हैं. आशंका है कि अभी ये युद्ध लंबा खिंच सकता है.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे. पीएम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत करेंगे. इस बातचीत का मकसद पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के मद्देनजर राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा करना है. कोरोना के बाद पीएम मोदी पहली बार ऐसा कर रहे हैं. जाहिर है युद्ध की स्थिति चिंताजनक है. आज ही पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि उसके, मिस्र और तुर्की की मध्यस्थता से ईरान और अमेरिका बात कर रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ही इसे कंफर्म कर दिया था. आज पाकिस्तान के बाद ईरान ने भी मान लिया कि उसकी अमेरिका से बात दूसरे देशों के माध्यम से चल रही है, लेकिन इसे वार्ता नहीं माना जा सकता. 

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