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कुत्तों और इंसानों का 15,000 साल से भी अधिक पुराना है नाता, नई रिसर्च में कई बातें चौंकाने वाली

पहले, पुरातात्विक साक्ष्यों से स्पष्ट संकेत मिलता था कि कुत्तों को अंतिम हिमयुग की समाप्ति से लगभग 12,000 वर्ष पहले, भूरे भेड़ियों से पालतू बनाया गया था. लेकिन अब तक कुत्तों के सबसे पुराने प्रत्यक्ष आनुवंशिक साक्ष्य केवल 10,900 वर्ष पुराने थे, क्योंकि पुरानी हड्डियों से प्राप्त डीएनए इतना खंडित था कि कुत्तों और भेड़ियों के बीच स्पष्ट रूप से अंतर करना संभव नहीं था.

कुत्तों और इंसानों का 15,000 साल से भी अधिक पुराना है नाता, नई रिसर्च में कई बातें चौंकाने वाली
कुत्तों और इंसानों का प्रेम हजारों साल पुराना है.
  • इंसानों और कुत्तों की दोस्ती कम से कम पंद्रह हजार साल पुरानी है, जो अंतिम हिमयुग से पहले की बात है
  • तुर्की के अनातोलिया में मानव अवशेषों के साथ दफन कुत्तों के पालतू होने के सबसे पुराने प्रमाण मिले हैं
  • शोध से पता चला कि प्राचीन काल में इंसान जानबूझकर कुत्तों को मछली से भरपूर आहार देते थे
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कुत्तों को लेकर अक्सर ये माना जाता है कि वो जानवरों में इंसानों के सबसे अच्छे दोस्त हैं. भारत समेत कई देशों में कुत्तों के काटने या हमला करने की घटनाएं बढ़ने के बाद भी ये एक आम राय है कि कुत्ते अपने मालिक के लिए कुछ भी कर सकते हैं. टाइगर श्राफ के पापा जैकी श्राफ की मूवी 'तेरी मेहरबानियां' ने तो सारी सीमाएं तोड़ते हुए अपने मालिक की हत्या का बदला लेने के लिए हत्यारों को मार तक दिया था. ऐसी ही कई फिल्में कई देशों की कई भाषाओं में बनी हैं. ये बातें हम आपकों क्यों बता रहे हैं, बस इसलिए कि आपको अपने अपने बचपन की यादें दिला सकें. जब एक पपी को देखकर आपका भी जी उसके साथ खेलने के लिए मचल जाया करता था, मगर एक रिपोर्ट आई है कि आपके या आपको पिता के बचपन से ही नहीं बल्कि कुत्तों से इंसानों की दोस्ती 15,000 साल से भी पुरानी है. 

इंसानों के साथ कुत्तों को दफनाते थे

नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में बताया गया है कि कुत्तों के पालतू होने के सबसे पुराने आनुवंशिक प्रमाण को 5,000 साल पीछे धकेल दिया है, जिससे पता चलता है कि इंसानों जब खेती की जानकारी से बहुत पहले शिकारी हुआ करते थे तो भी वो कुत्तों को भोजन देते थे और उनका रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करते थे. सबसे पुराना नमूना 15,800 साल पुराना है. तुर्की के अनातोलिया में मानव अवशेषों के साथ दफनाया गया था. रिकॉर्ड में दूसरा सबसे पुराना, 14,300 साल पुराना जबड़ा, समरसेट की गफ गुफा में मिला था, जहां नरभक्षी अनुष्ठानों के लिए जानी जाने वाली एक जनजाति रहती थी.

म्यूनिख के लुडविग मैक्सिमिलियन विश्वविद्यालय के डॉ. लैची स्कार्सब्रुक इस अध्ययन के सह-प्रथम लेखक भी हैं. उन्होंने कहा, “इसका अर्थ है कि 15,000 वर्ष पूर्व तक, समरसेट से साइबेरिया तक फैले पूरे यूरेशिया में, बहुत अलग-अलग वंशों वाले कुत्ते पहले से ही मौजूद थे. इससे यह संभावना बनती है कि जानवरों को पालतू बनाने का शौक अंतिम हिमयुग के दौरान हुआ होगा, जो किसी भी अन्य पालतू पौधों या जानवरों के अस्तित्व में आने से 10,000 वर्ष से भी अधिक पहले की बात है.”

भेड़ियों को भी पालतू बनाते थे

पहले, पुरातात्विक साक्ष्यों से स्पष्ट संकेत मिलता था कि कुत्तों को अंतिम हिमयुग की समाप्ति से लगभग 12,000 वर्ष पहले, भूरे भेड़ियों से पालतू बनाया गया था. लेकिन अब तक कुत्तों के सबसे पुराने प्रत्यक्ष आनुवंशिक साक्ष्य केवल 10,900 वर्ष पुराने थे, क्योंकि पुरानी हड्डियों से प्राप्त डीएनए इतना खंडित था कि कुत्तों और भेड़ियों के बीच स्पष्ट रूप से अंतर करना संभव नहीं था. इसलिए, पालतूकरण की सटीक तिथि, स्थान और परिस्थितियां रहस्य में डूबी हुईं थीं.

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ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय के व्याख्याता और पूर्व में फ्रांसिस क्रिक संस्थान के डॉ. एंडर्स बर्गस्ट्रॉम ने कहा, “लंबे समय तक किसी जानवर को कुत्ता या भेड़िया बताने का एकमात्र तरीका उसकी हड्डियों को देखना था, जो हमेशा विश्वसनीय नहीं होता.” डॉ. एंडर्स बर्गस्ट्रॉम इसी तरह के एक दूसरे अध्ययन के लेखक भी थे, जिसमें 200 से अधिक प्राचीन कुत्ते और भेड़िये के नमूनों का विश्लेषण किया गया था, वो कहते हैं, “कोई कहता: ‘यह कुत्ता है' और दूसरा कहता: ‘नहीं, यह एक छोटा भेड़िया है.'

मछली खिलाते थे कुत्तों को

दो अंतरराष्ट्रीय टीमों द्वारा प्रकाशित नवीनतम निष्कर्ष, कुत्तों के साथ हमारी प्राचीन साझेदारी की नींव कैसे पड़ी, इस पर अभूतपूर्व जानकारी प्रदान करते हैं और दिखाते हैं कि आधुनिक यूरोपीय कुत्ते की नस्लें, बुलडॉग से लेकर लैब्राडोर तक, यूरोप में प्राचीन शिकारी-संग्रहकर्ताओं के साथ रहने वाले जानवरों के साथ अपने वंश का एक बड़ा हिस्सा साझा करती हैं. ये कुत्ते संभवतः छोटे भेड़ियों की तरह दिखते थे, संभवतः छोटे थूथन और कमजोर जबड़ों के साथ. स्कार्सब्रुक ने कहा, “हम उनसे चिहुआहुआ जैसे दिखने की उम्मीद नहीं करते.” 

स्कार्सब्रुक और लंदन के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए पहले शोध पत्र में ब्रिटेन की गफ गुफा, तुर्की के पिनारबासी और सर्बिया के दो स्थलों से प्राप्त हड्डियों के डीएनए का विश्लेषण किया गया. उन्नत अनुक्रमण तकनीकों की मदद से प्राचीन डीएनए के छोटे-छोटे टुकड़ों को जोड़कर संपूर्ण जीनोम का पुनर्निर्माण किया गया, जिससे पहली बार प्रजातियों की स्पष्ट पहचान संभव हो सकी. निष्कर्षों से पता चला कि कम से कम 14,000 वर्ष पूर्व तक कुत्ते यूरोप और पश्चिमी एशिया में व्यापक रूप से फैले हुए थे. तुर्की में मिली हड्डियों के आइसोटोपिक विश्लेषण से पता चला कि कुत्ते मछली से भरपूर आहार लेते थे, जो स्थानीय मनुष्यों के आहार से मेल खाता था. अन्य स्थानों पर भी इसी तरह के आहार पैटर्न देखे गए, जिससे पता चलता है कि मनुष्य जानबूझकर कुत्तों को भोजन उपलब्ध कराते थे.

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पालतू कुत्ते की मौत के बाद खा जाते थे

शोध में गहरे भावनात्मक बंधनों के भी प्रमाण मिले. पिनारबाशी में एक इंसान के पैरों के ऊपर तीन पिल्लों की हड्डियां दफन पाई गईं, जो इस समूह द्वारा किए जाने वाले विस्तृत मानव अंत्येष्टि अनुष्ठानों को दर्शाती हैं. गफ की गुफा में, जहां स्थानीय लोग मानव अवशेषों के साथ भयावह अनुष्ठान करते थे, प्राचीन कुत्ते के जबड़े की हड्डी में जानबूझकर दोनों तरफ छेद किए गए प्रतीत होते थे. शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि संभवतः पालतू कुत्तों को उनकी मौत के बाद खाया भी जाता था.

तीनों स्थलों पर कुत्तों के बीच घनिष्ठ आनुवंशिक संबंध से पता चलता है कि पालतू बनाए जाने के बाद, कुत्ते संभवतः यूरोप में तेज़ी से फैल गए होंगे, और संभवतः असंबंधित समूहों के बीच उनका व्यापार होता रहा होगा. म्यूनिख के लुडविग मैक्सिमिलियन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और वरिष्ठ लेखक लॉरेंट फ्रांत्ज़ ने कहा, "यह तथ्य कि लोग इतनी जल्दी कुत्तों का आदान-प्रदान करते थे, यह दर्शाता है कि ये जानवर महत्वपूर्ण रहे होंगे. पालतू होने के अलावा भी उनका कोई उद्देश्य रहा होगा. यह सोचना अजीब है कि वे इतने बड़े मांसाहारी जानवर को केवल इसलिए खिलाते होंगे क्योंकि वे प्यारे दिखते हैं."

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