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चीन ने खड़ी कर दी अपनी भेड़िया रोबोट आर्मी, मिसाइल-रॉकेट लॉन्चर से लैस होकर जानिए कैसे लड़ेंगे युद्ध

ये रोबोट दुश्मन की गोलीबारी का जायजा ले सकते हैं और आक्रमण मिशन को अंजाम दे सकते हैं. वे मानव सैनिकों के स्थान पर उच्च जोखिम वाली भूमिकाएं प्रभावी ढंग से निभा सकते हैं और हताहतों की संख्या में काफी कमी ला सकते हैं.

चीन ने खड़ी कर दी अपनी भेड़िया रोबोट आर्मी, मिसाइल-रॉकेट लॉन्चर से लैस होकर जानिए कैसे लड़ेंगे युद्ध
चीन का भेड़िया रोबोट. तस्वीर ग्लोबल टाइम्स के सौजन्य से.
  • चीन ने नई पीढ़ी के भेड़िया रोबोट के साथ शहरी युद्ध अभ्यास का सफलतापूर्वक खुलासा किया है
  • यह रोबोट टोही, हमलावर और सहायक इकाइयों में विभाजित हैं तथा माइक्रो-मिसाइल और ग्रेनेड लॉन्चर भी ले जा सकते हैं
  • ये ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर पंद्रह किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल सकते हैं

चीन ने बृहस्पतिवार को खतरनाक खुलासा किया है. उसने नई पीढ़ी के भेड़िया रोबोट के साथ शहरी युद्ध अभ्यास का खुलासा किया है. इस नई पीढ़ी के रोबोट को "मजबूत शरीर, अधिक बुद्धिमान मस्तिष्क और अधिक युद्ध-तैयार क्षमताओं" वाला बताया गया है. ग्लोबल टाइम्स को एक चीनी सैन्य मामलों के विशेषज्ञ ने बताया कि इस तरह की मानवरहित प्रणालियां उच्च जोखिम वाले अग्रिम मोर्चे के कार्यों को अंजाम दे सकती हैं. वास्तविक समय में युद्धक्षेत्र की जानकारी बढ़ा सकती हैं और शहरी युद्ध में इंसानों को भेजने की जरूरत को कम और दुश्मन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना सकती हैं. चीन के बारे में ये आम राय है कि उसके सैनिकों ने युद्ध नहीं लड़ा है. इसी कारण उसे अमेरिका और रूस से कमजोर माना जाता है, पर इस तैयारी के बाद तो उससे लड़ना असंभव सा हो जाएगा.

भेड़िया रोबोट क्या-क्या करेंगे

सीसीटीवी न्यूज के अनुसार, चाइना साउथ इंडस्ट्रीज ग्रुप कॉर्पोरेशन के ऑटोमेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट कंपनी लिमिटेड ने स्वतंत्र रूप से एक नई पीढ़ी का रोबोटिक वुल्फ पैक सिस्टम विकसित किया है, जो माइक्रो-मिसाइलों और ग्रेनेड लॉन्चरों सहित कई प्रकार के हथियारों को ले जाने में सक्षम है, जिससे लक्ष्यों पर प्रभावी ढंग से गोलीबारी की जा सकती है. मिशन की भूमिकाओं के आधार पर, रोबोटिक वुल्फ को टोही इकाइयों, हमलावर इकाइयों और सहायक इकाइयों में बांटा गया है.

नए रोबोट पिछले से कितने तेज

पिछली पीढ़ी की तुलना में, नए मॉडल में स्थिरता और गतिशीलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. ये ऊबड़-खाबड़ पथरीले रास्तों पर तेजी से चल सकते हैं और इनकी अधिकतम गति 15 किलोमीटर प्रति घंटा है. इसके कारण ये शहरी क्षेत्रों, खंडहरों, समुद्र तटों और रेतीले इलाकों में आसानी से काम कर सकते हैं. भेड़ियों की तरह इनके अंगों के जोड़ों में 12 डिग्री की स्वतंत्रता होती है, जिससे ये अत्यधिक फुर्तीले होते हैं और गतिशील रूप से अपनी चाल बदल सकते हैं. बेहतर मोटर शक्ति के कारण, 25 किलोग्राम तक का भार उठाते हुए भी ये 30 सेंटीमीटर तक की बाधाओं को आसानी से पार कर सकते हैं. सीसीटीवी न्यूज के अनुसार, यह क्षमता इन्हें पहाड़ी इलाकों में चढ़ाई करने या शहरी खंडहरों में पैंतरेबाजी करने में सक्षम बनाती है.

कैसे लड़ेंगे युद्ध, फुटेज में दिखाया

सीसीटीवी न्यूज़ के अनुसार, रोबोटिक भेड़ियों का ग्रुप समूह में निर्णय लेने में भी सक्षम है, जिसमें प्रत्येक इकाई वास्तविक समय के सेंसर डेटा को साझा करके एक साझा ऑपरेशनल पिक्चर बनाती है. इससे स्वायत्त सहयोग, संयुक्त मूल्यांकन और समन्वित कार्रवाई संभव हो पाती है. फुटेज में हवाई और जमीनी इकाइयों को शामिल करते हुए एक समन्वित शहरी युद्ध परिदृश्य दिखाया गया. लक्ष्य क्षेत्र में पहुंचने पर, दो टोही इकाइयों ने मिलकर इलाके का मानचित्र बनाया और डेटा को एक ट्रिपल-स्क्रीन कमांड टर्मिनल पर भेजा. यह कमांड सिस्टम वुल्फ पैक के ऑपरेशनल केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो वास्तविक समय में अग्रिम मोर्चे के डेटा को एकीकृत करने और कई रोबोटिक इकाइयों - साथ ही हवाई ड्रोन - को समन्वित करने में सक्षम है, जिससे संयुक्त हवाई-जमीनी अभियान संभव हो पाते हैं. वास्तविक अभियानों में, रोबोटिक भेड़िये आम तौर पर स्वायत्त रूप से लक्ष्य की पहचान और निशाना साधते हैं, और मानव संचालक ही कार्रवाई की अनुमति देते हैं. सीसीटीवी न्यूज के अनुसार, मिशन की आवश्यकताओं के आधार पर, उन्हें विभिन्न हथियारों से भी लैस किया जा सकता है.

भेड़िया रोबोट का प्रोडक्शन शुरू

सीसीटीवी न्यूज के सैन्य चैनल द्वारा गुरुवार को प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इस प्रणाली का अब बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हो चुका है. सैन्य मामलों के विशेषज्ञ झांग जुन्शे ने गुरुवार को ग्लोबल टाइम्स को बताया कि शहरी युद्ध में रोबोटिक वुल्फ सिस्टम और अन्य मानवरहित उपकरणों की तैनाती के महत्व को कई प्रमुख आयामों से समझा जा सकता है. शहरी युद्ध अत्यंत जटिल होता है, जिसमें अक्सर गुप्त फायरिंग पोजीशन, विस्फोटक उपकरण और सीमित स्थान शामिल होते हैं. सैनिकों को सीधे प्रवेश कराना काफी जोखिम भरा होता है. झांग ने कहा कि रोबोटिक भेड़ियों जैसी मानवरहित प्रणालियां खतरनाक क्षेत्रों में सबसे पहले प्रवेश करके टोह ले सकती हैं, दुश्मन की गोलीबारी का जायजा ले सकती हैं और आक्रमण मिशन को अंजाम दे सकती हैं, जिससे वे मानव सैनिकों के स्थान पर उच्च जोखिम वाली भूमिकाएं प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं और हताहतों की संख्या में काफी कमी ला सकती हैं.

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लेखक के बारे में
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विजय शंकर पांडेय
चीफ सब एडिटर
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