- बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने खालिदा जिया के निधन के बाद तारिक रहमान को नया चेयरमैन नियुक्त किया है
- खालिदा जिया के बड़े बेटे तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद हाल ही में बांग्लादेश लौटकर आए हैं
- माना जा रहा है कि आगामी आम चुनाव में अगर बीएनपी जीती तो तारिक रहमान अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं
खालिदा जिया के निधन के बाद उनके बेटे तारिक रहमान को आधिकारिक तौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का नया चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया है. पार्टी की तरफ से सोशल मीडिया पर बताया गया कि नेशनल स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में सर्वसम्मति से ये फैसला लिया गया है.
पूर्व प्रधानमंत्री और BNP की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का 30 दिसंबर 2025 को निधन के बाद से यह पद खाली था. इस फैसले के साथ ही तारिक रहमान ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली है. खालिदा जिया पिछले एक महीने से ज्यादा समय से अस्पताल में भर्ती थीं.
Mr. Tarique Rahman has assumed office as the Chairman of the BNP.
— Bangladesh Nationalist Party-BNP (@bdbnp78) January 9, 2026
Following the passing of BNP Chairperson and former Prime Minister, national leader Begum Khaleda Zia, the position of party Chairman became vacant. In line with the BNP constitution, a meeting of the National… pic.twitter.com/X4gfwQGOAK
उनके निधन से ठीक पहले खालिदा जिया की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनके बड़े बेटे तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे थे. माना जा रहा है कि बांग्लादेश के आगामी आम चुनाव में अगर बीएनपी जीती तो तारिक रहमान अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं. तारिक खुद दो सीटों - बोगुरा-6 और ढाका-17 से चुनावी मैदान में उतरे हैं.
तारिक रहमान के सामने जमात-ए-इस्लामी की कट्टरपंथी राजनीति की चुनौती है. तारिक लंदन से लौटने के बाद बांग्लादेश में शांति की बात कर रहे हैं, लेकिन जमात पिछले साल शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से नफरत की राजनीति को बढ़ावा दे रही है. इस आग को मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार हवा दे रही है. इस सबके बीच इकबाल मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या ने कट्टरपंथी विचारधारा को और मजबूती दी है.
बीएनपी नेता मिर्जा फखरुल ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि जब से अंतरिम सरकार सत्ता में आई है, देश में मॉब वायलेंस (भीड़ की हिंसा) की संस्कृति पैदा हो गई है. इसने लोकतंत्र को कमजोर कर दिया है. उनका कहना था कि इस खतरनाक चलन को सिर्फ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करके रोका जा सकता है.
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में कहा था कि तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी देश की राजनीति में कोई नई शुरुआत या सुधार नहीं है, बल्कि इससे राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है. उनका कहना था कि यह उस राजनीति की वापसी है जिसकी बांग्लादेश ने पहले ही भारी कीमत चुकाई है. बांग्लादेश का भविष्य उन लोगों के दम पर नहीं बनाया जा सकता जिनकी राजनीतिक विरासत भ्रष्टाचार, हिंसा और कट्टरपंथी ताकतों के साथ गठबंधन से तय होती है.
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