- बांग्लादेश की अदालत में अवामी लीग नेताओं को जमानत मिलने के बाद वकीलों के एक गुट ने हंगामा कर दिया
- घटना बारिशाल जिले की अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एस.एम. शरियत उल्लाह की अदालत में हुई
- अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जेएमबीएफ ने बीएनपी से जुड़े वकीलों पर जज के ऊपर दबाव बनाने का आरोप लगाया
बांग्लादेश में एक अदालत महज इस बात पर जंग का मैदान बन गई कि शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के कई नेताओं को जमानत मिल गई. वकीलों के एक गुट ने कथित तौर पर कोर्ट कैंपस में जमकर हंगामा काटा. धक्का-मुक्की की. जज तक को नहीं बख्शा गया. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र, कानून के शासन और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया.
BNP से जुड़े वकीलों पर हंगामे का आरोप
ये घटना बारिशाल जिले में अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एस.एम. शरियत उल्लाह की अदालत में हुई. अदालत ने सुनवाई के बाद अवामी लीग के कई नेताओं को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. इसके बाद कुछ वकील कथित रूप से बदसलूकी पर उतर आए. पेरिस स्थित जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस ने सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से जुड़े वकीलों पर हंगामे का आरोप लगाया.
धक्का-मुक्की की, जज को भी नहीं बख्शा
जेएमबीएफ ने दावा किया कि सत्ताधारी बीएनपी जुड़े वकीलों का व्यवहार निंदनीय था. वो बेंच पर धक्का-मुक्की कर रहे थे, जबरदस्ती कोर्टरूम में घुसने की कोशिश कर थे. उन्होंने जज को भी नहीं बख्शा. वकील जज की तरफ उंगली करके चिल्लाते नजर आए.
मानवाधिकार संगठन ने उठाए गंभीर सवाल
जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने बयान में कहा कि ये घटना बांग्लादेश में जुडिशरी की स्वतंत्रता, गरिमा और सुरक्षा पर सवाल उठाती है. उनका कहना था कि अगर फैसले से सहमत नहीं थे, तो उसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की जा सकती थी, लेकिन कोर्ट को जंग का मैदान बनाना कहां तक सही है.
'अदालत को प्रभावित करने की साफ कोशिश'
शाहनूर ने आरोप लगाया कि यह साफ तौर पर अदालत की अवमानना है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए. ये वकील बिना अपील या सही प्रक्रिया को अपनाए जज पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे. ये अदालत को प्रभावित करने की कोशिश थी. संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के हाई कोर्ट डिवीजन के जस्टिस की अगुवाई में न्यायिक आयोग बनाकर जांच की मांग की ताकि दोषियों की पहचान करके सजा दी जा सके.
'न्यायिक आयोग बनाकर हो निष्पक्ष जांच'
जेएमबीएफ ने कहा कि कोर्टरूम में गैरकानूनी तरीके से घुसना, बेंच पर मारपीट करना, जज पर उंगली उठाना-चिल्लाना और न्यायिक कार्रवाई में रुकावट डालना साफ तौर पर कोर्ट की अवमानना है. ये अपराध सजा के लायक है और इसी हिसाब से इससे निपटा जाना चाहिए. मानवाधिकार संस्था ने कहा कि जरूरी है कि न्यायपालिका किसी भी तरह के मतभेद को कानूनी तरीके से निपटाए और किसी के प्रभाव में आकर फैसले न सुनाए.
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