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इटली में प्रोटेस्ट के दौरान नाबालिगों ने की हिंसा या लूटपाट तो मां-बाप भरेंगे जुर्माना, 5 साल की जेल, मेलोनी लाईं सख्त कानून

इटली सरकार ने हिंसक विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए नए सुरक्षा कानून मंजूर किए हैं, जिनमें 18 साल से कम उम्र के युवाओं को भी 12 घंटे हिरासत में रखने का प्रावधान है.

इटली में प्रोटेस्ट के दौरान नाबालिगों ने की हिंसा या लूटपाट तो मां-बाप भरेंगे जुर्माना, 5 साल की जेल, मेलोनी लाईं सख्त कानून
इटली के नए नियम, सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा?
  • इटली की मेलोनी सरकार ने हिंसक विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए सुरक्षा कानूनों को कड़ा करने का फैसला किया है
  • नए नियमों के तहत 18 साल से कम उम्र के युवाओं को बिना अपराध किए भी 12 घंटे तक हिरासत में रखा जा सकेगा
  • सार्वजनिक सुरक्षा खतरे के आधार पर युवाओं को कुछ कार्यक्रमों में भाग लेने या इलाकों में जाने से रोका जा सकेगा
मिलान:

इटली में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों से प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार हिल गई है. ऐसे में सरकार ने कानूनों को सख्‍त करने का फैसला लिया है, ताकि हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर लगाम लगाई जा सके. मेलोनी सरकार नए सुरक्षा उपायों को मंजूरी दे दी है. इनका मकसद हिंसक प्रदर्शनों पर लगाम लगाना और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है. इटली के वाइस प्रेसिडेंट माटेओ साल्विनी के मुताबिक, नए प्रावधानों के तहत पुलिस को 18 साल से कम उम्र के युवाओं को भी पुलिस स्टेशन में 12 घंटे तक हिरासत में रखने का अधिकार दिया है. साथ ही ऐसे युवाओं के माता-पिता के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिनके बच्‍चे हिंसक विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे. 

पुलिस स्‍टेशन में युवा किये जा सकेंगे 12 घंटे तक डिटेन
 

इटली में नए नियम लागू होने पर 18 साल से कम उम्र के युवाओं को भी पुलिस स्टेशन में 12 घंटे तक हिरासत में तब भी रखा जा सकेगा, जब संबंधित व्यक्ति ने कोई अपराध न किया हो. इटली समेत कई देशों में हुए हिंसक प्रदर्शनों ने यूरोप को हिलाकर रख दिया है. शुरुआत में ये प्रदर्शन खराब सार्वजनिक सेवाओं और बढ़ती महंगाई के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से किए जा रहे थे, लेकिन बाद में हालात बिगड़ गए. हिंसा की आशंका को देखते हुए रोम सरकार मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती करने की तैयारी कर रही है. शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शनों को लेकर प्रशासन सतर्क है.

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इटली के नए नियम,  सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा?

इटली के गृह मंत्रालय के अवर सचिव निकोला मोल्टेनी ने रेडियो 24 को बताया कि सरकार ने एक 'आपातकालीन आदेश' (इमरजेंसी डिक्री) को मंजूरी दी है, ताकि उन सुरक्षा नियमों को तुरंत लागू किया जा सके, जिन पर संसद में बहस चल रही है. इन उपायों में युवाओं को कुछ खास कार्यक्रमों में शामिल होने या कुछ तय इलाकों में जाने से रोकना शामिल हो सकता है, अगर ऐसा मानने का कोई कारण हो कि वे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं.

  • नए प्रावधानों के तहत कम से कम पांच लोगों के समूह में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले व्यक्ति को पांच साल तक की जेल.
  • ऐसे में अधिकतम 20 हजार यूरो यानि लगभग 21 लाख रुपये  का जुर्माना हो सकता है. 
  • नए नियमों के साफ-साफ कहा गया है कि अगर प्रदर्शन के दौरान चेहरा ढका गया हो या किसी व्यक्ति को चोट लगी हो तो सजा और बढ़ सकती है.
  • नए प्रावधानों में अधिकारियों को नुकसान की तुरंत भरपाई का आदेश देने का अधिकार भी दिया गया है. 
  • अगर तोड़फोड़ या लूटपाट में नाबालिग शामिल हैं तो उनके माता-पिता को भी नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा. 
  • पुलिस को 14 से 17 साल की उम्र के उन युवाओं को भी हिरासत में लेने की अनुमति होगी, जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, लेकिन उनके खतरनाक होने के सबूत मौजूद हैं.

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म पर दुकानों को लूटने की साजिश!

वाइस प्रेसिडेंट साल्विनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग शनिवार को कोमो शहर में दुकानों पर धावा बोलने की योजना के बारे में पोस्ट कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार शनिवार दोपहर तक इंतजार नहीं कर सकती और संभावित हिंसा को रोकने के लिए पहले ही कार्रवाई करनी होगी. हम इसके लिए अतिरिक्‍त सुरक्षाबलों की तैनाती का इंतजाम कर रहे हैं. इससे पहले वीकेंड पर हुए विरोध प्रदर्शनों में मिलान और अन्य शहरों के केंद्रों में सैकड़ों नकाबपोश प्रदर्शनकारियों (जिनमें से कई के नाबालिग होने का संदेह है) ने कूड़ेदानों में आग लगा दी और दुकानों में लूटपाट की.

फ्रांस में भी हिंसक प्रदर्शन

हिंसक विरोध प्रदर्शन इटली के पड़ोसी देश फ्रांस में हुए दंगों की याद दिलाते हैं, जहां शनिवार को लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे. यह पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस के सबसे हिंसक प्रदर्शनों में से एक था. 2022 में पदभार संभालने के बाद से, प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने सुरक्षा से जुड़े कई कड़े कानून लागू किए हैं. हालांकि, सरकार के आलोचकों का कहना है कि इन कानूनों से समस्‍याएं सुलझाने में कोई खास मदद नहीं मिलती, जिसकी वजह से लोग सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हुए हैं. 

इटली की जेलों में बढ़ी कैदियों की संख्‍या 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार सालों में इटली की जेलों में बंद लोगों की संख्या में 17% से अधिक (लगभग 10,000 लोग) की वृद्धि हुई है. बोलोग्ना में आपराधिक मामलों की वकील मरीना प्रोस्पेरी ने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए कई नए कानूनों का मुख्य असर यह हुआ है कि विरोध प्रदर्शन करना और भी जोखिम भरा हो गया है. यह उन प्रवासियों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है जो रेजिडेंस परमिट या नागरिकता पाने की कोशिश कर रहे हैं.

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इटली में लोगों के विरोध की असली वजह! 

इटली समेत अन्‍य देशों में यह अशांति ऐसे समय में हुई है, जब ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने मेलोनी की उन योजनाओं को मुश्किल में डाल दिया है, जिनके तहत वे अगले साल के बजट में टैक्स कटौती और खर्च बढ़ाने की तैयारी कर रही थीं. 2027 के अंत में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले यह उनका आखिरी बजट होगा. इटली में पैसे का एक बड़ा हिस्सा कुछ अमीर लोगों के पास है, जबकि कम और मध्यम आय वाले कर्मचारियों की असल मजदूरी (महंगाई के हिसाब से) स्थिर बनी हुई है. बैंक ऑफ इटली के अनुसार, 2023 में इटली के सबसे अमीर 10% परिवारों के पास कुल घरेलू संपत्ति का 60% हिस्सा था, जो 2010 के मुकाबले लगभग 7 प्रतिशत अंक अधिक है.

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