- फ्रांस में बवाल: Louis Vuitton, Dior और Hermès तक पहुंचे दंगे
- पेरिस की लग्जरी दुकानों में तोड़फोड़, 1 अरब यूरो से ज्यादा नुकसान की आशंका
- दंगों की चपेट में लग्जरी ब्रांड्स, हजारों कारोबारियों पर संकट
फ्रांस में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने कई शहरों में हिंसक रूप ले लिया है. प्रदर्शन और लूटपाट की घटनाओं में पेरिस के प्रतिष्ठित शॉपिंग इलाकों से लेकर मार्सेई के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों तक सैकड़ों दुकानों को निशाना बनाया गया. लुई वुइटन (Louis Vuitton) , डियोर (Dior), हर्मेस (Hermès) और राल्फ लॉरेन (Ralph Lauren) जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी हमलों से अछूते नहीं रहे. हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कर्फ्यू सहित कई कदम उठाए हैं, जबकि चोरी के सामान की ऑनलाइन बिक्री रोकने की कोशिशें भी तेज कर दी गई हैं.
पेरिस के लग्जरी स्टोर्स पर हमले
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पेरिस के प्रतिष्ठित प्लेस वेंडोम इलाके में लग्जरी दुकानों और बुटीक के बाहर सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए गए थे. इसके बावजूद डियोर, रोलेक्स, लुई वुइटन और राल्फ लॉरेन जैसे कई प्रतिष्ठित ब्रांड्स के स्टोरों को नुकसान पहुंचाया गया. वहीं फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार शनिवार को छह नकाबपोश लोगों ने सड़क पर लगे बैरिकेड को हथौड़े की तरह इस्तेमाल कर प्लेस वेंडोम स्थित लुई वुइटन स्टोर की खिड़कियां तोड़ने की कोशिश की. हालांकि वे दुकान के अंदर प्रवेश नहीं कर सके. स्टोर के एक कर्मचारी ने कहा कि विशेष सुरक्षा खिड़कियों और कुछ हद तक किस्मत के कारण बड़ी क्षति टल गई. उनके अनुसार वहां मौजूद लोग प्रदर्शनकारी कम और लूटपाट करने वाले अधिक दिखाई दे रहे थे.

फ्रांस में ्प्रदर्शन
फोटो : एएफपी
डियोर, केन्जो और राल्फ लॉरेन भी बने निशाना
पेरिस की रू रॉयल स्थित डियोर स्टोर के एक कर्मचारी ने बताया कि कर्मचारियों ने समय रहते सुरक्षा शटर गिरा दिए, जिसके कारण दुकान बच गई. हालांकि सड़क के दूसरी तरफ स्थित राल्फ लॉरेन स्टोर की खिड़कियां तोड़ दी गईं और केन्जो के एक बुटीक को लूट लिया गया. रू सेंट-ओनोरे स्थित डियोर स्टोर पर भी विरोधी नारे और ग्रैफिटी लिखी गई. वहीं प्लेस वेंडोम स्थित ग्राफ ज्वेलरी आउटलेट की खिड़कियां टूटने के बाद उसे बंद करना पड़ा.
मार्सेई में भी हुई लूटपाट
मार्सेई के फुटबॉल क्लब ओलंपिक डी मार्सेई ने पुष्टि की कि शहर के ऐतिहासिक मुख्य मार्ग पर स्थित उसके ऑफिशियल स्टोर को लूट लिया गया. इसके अलावा मार्सेई में लुई वुइटन और हर्मेस की दुकानों को भी निशाना बनाया गया. पेरिस में बर्बरी के एक स्टोर पर भी हमला किया गया.
पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
रिपोर्टों के अनुसार पेरिस में आमतौर पर बड़े प्रदर्शन या खेल आयोजनों से पहले दुकानदार अपनी दुकानों को सुरक्षित कर लेते हैं और प्रशासन भी पहले से तैयारी करता है. लेकिन इस बार प्रदर्शन पारंपरिक यूनियन और पुलिस समन्वय के बिना हुए, जिसके कारण सुरक्षा व्यवस्था शुरुआती दौर में कमजोर पड़ गई. कई प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि पुलिस तेजी से बढ़ती भीड़ के सामने दबाव में नजर आई. डियोर स्टोर के एक कर्मचारी ने कहा कि आम लोगों को सोशल मीडिया से पहले ही अंदाजा हो गया था कि स्थिति गंभीर हो सकती है, लेकिन पुलिस पर्याप्त रूप से तैयार नहीं दिखी.

कई शहरों में दुकानों और स्टोर्स को लूटने की घटना प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई.
Photo Credit: AFP
ऑनलाइन बिक्री रोकने की मुहिम
लूटे गए सामान की ऑनलाइन बिक्री रोकने के लिए फ्रांसीसी सरकार सक्रिय हो गई है. सरकार के मंत्रियों ने विंटेड, अमेजन, ईबे, मेटा और टिकटॉक जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. संदिग्ध लिस्टिंग हटाने और विक्रेताओं की पहचान सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई. विंटेड ने बयान जारी कर कहा कि उसने संभावित चोरी के सामान से जुड़ी लिस्टिंग की पहचान और उन्हें हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग किया जा रहा है.
बड़े ब्रांड्स से लेकर छोटे दुकानदार तक प्रभावित
हिंसा की चपेट में सिर्फ लग्जरी ब्रांड्स नहीं आए. जेडी स्पोर्ट्स की दुकानों में तोड़फोड़ की गई, देशभर में करीब 20 सेफोरा स्टोर्स को नुकसान पहुंचा तथा लिली में एक एप्पल स्टोर भी निशाना बना. पेरिस में एक टेस्ला शोरूम पर भी नारे लिखे गए. वहीं एक बैंक शाखा पर पेंट फेंका गया और उसकी इमारत को नुकसान पहुंचाया गया.
3,000 से ज्यादा कारोबार प्रभावित, 1 अरब से 1.2 अरब यूरो के बीच नुकसान का अनुमान
फ्रांस के वाणिज्य मंत्री सर्ज पैपिन के अनुसार प्रारंभिक आकलन में देशभर में कम से कम 3,000 व्यवसाय प्रभावित हुए हैं. मार्निंगस्टार के अनुमान के मुताबिक बीमा दावों का नुकसान 1 अरब से 1.2 अरब यूरो के बीच पहुंच सकता है, जो 2023 के दंगों में हुए 73 करोड़ यूरो के बीमाकृत नुकसान से काफी अधिक है. फ्रेंच ट्रेडर्स परिसंघ के अध्यक्ष पियरे बॉशे ने कहा कि हर टूटी हुई दुकान के पीछे एक कारोबारी, कर्मचारी, परिवार और वर्षों की मेहनत होती है. उन्होंने कहा कि दुकानदारों को ऐसी हिंसा का शिकार नहीं बनने दिया जाना चाहिए, जिससे उनका कोई संबंध नहीं है.
छोटे कारोबारियों का दर्द
गारे दु नॉर्ड रेलवे स्टेशन के पास मोबाइल मरम्मत और सुविधा स्टोर चलाने वाले एक दुकानदार ने बताया कि रविवार रात करीब सौ लोगों की भीड़ ने उसकी दुकान में घुसने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि कांच की खिड़की के पीछे अकेले खड़े होकर 15 मिनट तक ऐसी भीड़ का सामना करना बेहद डरावना था. उनके अनुसार मरम्मत पर 7,000 से 10,000 यूरो तक का खर्च आ सकता है.
कर्फ्यू के बाद हालात में सुधार
सोमवार रात कई फ्रांसीसी शहरों में हालात अपेक्षाकृत शांत रहे. प्रशासन का कहना है कि कर्फ्यू और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के कारण हिंसा और अव्यवस्था पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है. हालांकि प्रदर्शनों से हुए नुकसान, लूटपाट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फ्रांस में राजनीतिक और सामाजिक बहस अभी भी जारी है.
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