गाजा युद्ध को लेकर एक नया विवाद पूरी दुनिया में गूंजने लगा है. इजरायल के एक मंत्री ने एक वीडियो शेयर कर ऐसी सच्चाई दिखा दी है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी गुस्सा पैदा कर दिया है. गाजा में मदद के लिए जा रहे विदेशी एक्टिविस्ट्स के साथ इजरायल की सेना जानवरों जैसा बर्ताव कर रही थी, उनके हाथ बांधकर जमीन पर घुटनों के बल बैठाया गया था, उन्हें बाल से पकड़कर गिराया जा रहा है... यह सब वीडियो में कैद हो गया. खास बात है कि यह वीडियो उस इजरायली मंत्री ने खुद शेयर किया है, जिसके बाद कई देशों ने इजरायल की आलोचना शुरू कर दी.
क्या है पूरा मामला?
इजरायल के कट्टरपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने बुधवार को एक वीडियो पोस्ट किया. इस वीडियो में गाजा जा रहे जहाजों से पकड़े गए एक्टिविस्ट्स जमीन पर घुटनों के बल बैठे दिख रहे हैं. उनके हाथ बंधे हुए थे और उनके माथे जमीन पर टिके हुए थे. यह वीडियो X पर शेयर किया गया. वीडियो उस समय सामने आया जब इजरायली सेना ने समुद्र में गाजा की ओर जा रहे जहाजों को रोक लिया और सैकड़ों विदेशी एक्टिविस्ट्स को दक्षिणी बंदरगाह अशदोद पोर्ट पर हिरासत में लेना शुरू किया.
वीडियो सामने आते ही दुनिया भर में नाराजगी फैल गई. यहां तक कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी बेन गवीर की आलोचना की. “वेलकम टू इजरायल” कैप्शन वाले इस वीडियो में दर्जनों एक्टिविस्ट्स को घुटनों के बल बैठने के लिए मजबूर किया गया. उनके हाथ बंधे हुए थे और उनके माथे जमीन पर थे. एक महिला को तो बालों से पकड़कर जमीन पर गिराते भी देखा गया. वीडियो के कुछ हिस्सों में पीछे इजरायल का राष्ट्रगान भी बजता सुनाई देता है.
गाजा के मददगारों के साथ जानवरों जैसा सुलूक कर रही थी सेना और इजरायल का मंत्री जश्न मना रहा था#Israel | #Gaza pic.twitter.com/UDRDncBxVX
— NDTV India (@ndtvindia) May 21, 2026
इजरायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने भी बेन गवीर की आलोचना की. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री की हरकतें “घिनौनी” हैं. यूरोपीय आयोग की अधिकारी हदजा लहबीब ने भी बेन गवीर की आलोचना की. उन्होंने एक्स पर लिखा, “मानवता की रक्षा करने के लिए किसी को सजा नहीं मिलनी चाहिए.”
बेल्जियम और फ्रांस ने भी अपने देशों में इजरायली राजदूतों को तलब किया. फ्रांस ने बेन गवीर की हरकतों को “अस्वीकार्य” बताया.
बता दें कि Global Sumud Flotilla के तहत करीब 50 जहाज पिछले हफ्ते तुर्किये से रवाना हुए थे. इनका मकसद गाजा पर इजरायल की नाकेबंदी तोड़ना था. इससे पहले भी पिछले महीने इजरायल ने एक दूसरे जहाजी काफिले को रोक लिया था. इजरायली अधिकारियों ने कहा कि फ्लोटिला में मौजूद 430 एक्टिविस्ट्स को इजरायल लाया जा रहा था. वहीं मानवाधिकार संगठन अदालाह ने कहा कि कुछ एक्टिविस्ट्स पहले ही अशदोद बंदरगाह पहुंच चुके हैं और उन्हें वहीं हिरासत में रखा गया है.
कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, स्पेन, पोलैंड और तुर्किये ने भी इस घटना की आलोचना की
इजरायल इन जहाजों को क्यों रोक रहा?
इससे पहले नेतन्याहू ने फ्लोटिला को “एक दुर्भावनापूर्ण योजना” बताया था. उन्होंने कहा कि इसका मकसद गाजा में हमाज पर लगाई गई नाकेबंदी को तोड़ना था. वहीं हमास ने कहा कि यह वीडियो इजरायली नेताओं की “नैतिक गिरावट और क्रूरता” का सबूत है. बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर हमले के बाद गाजा में युद्ध शुरू हुआ था. फिलहाल हमास गाजा के आधे से कम हिस्से पर नियंत्रण रखता है.
2007 से गाजा के सभी प्रवेश रास्तों पर इजरायल का नियंत्रण है और वहां नाकेबंदी लागू है. गाजा युद्ध के दौरान वहां खाने, दवाइयों और जरूरी सामान की भारी कमी हो गई थी. कई बार इजरायल ने मदद सामग्री की सप्लाई पूरी तरह रोक दी थी. पिछले महीने भी एक फ्लोटिला को ग्रीस के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में रोक लिया गया था. ज्यादातर एक्टिविस्ट्स को यूरोप वापस भेज दिया गया था.
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