ईरान में सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच एक नया मोड़ आ गया है. सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर धोखा देने की बात कर रहे हैं. उनका कहना है कि ट्रंप ने उन्हें बड़े-बड़े वादे करके बीच मंझधार में छोड़ दिया. ईरान में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सड़कों पर उतरे कई लोगों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक उम्मीद की किरण बनकर उभरे थे.
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरानी प्रदर्शनकारियों का खुलकर समर्थन किया था. उन्होंने कहा था कि 'मदद रास्ते में है' और ईरान सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर गोली चली तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा. ट्रंप के इन बयानों से उत्साहित होकर हजारों ईरानी नागरिक सड़कों पर उतर आए. उन्हें लगा कि इस बार अमेरिका उनके साथ खड़ा है और उन्हें सुरक्षा देगा. कई लोगों ने अपने परिवार की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए प्रदर्शनों में हिस्सा लिया.
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जैसे ही प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे, ईरानी सरकार ने हमेशा की तरह देश में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी. जगह-जगह सुरक्षा बलों को तैनात किया. देश भर से मिली रिपोर्टों में स्नाइपर फायरिंग, मशीनगन से हमले और बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने के साथ लापता होने का जिक्र है.
अचानक पीछे हटे ट्रंप
जब ईरान में हिंसा बढ़ी और सुरक्षा बलों ने सख्ती शुरू की, तब ट्रंप ने अचानक अपने सुर बदल लिए. उन्होंने कहा कि ईरान ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह हत्याएं और फांसी की सजाएं रोक देगा. इसलिए अब सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं है. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे सभी ट्रंप के वादे की वजह से वे बाहर निकले, लेकिन जब उनकी जान पर बनी तो अमेरिका ने हाथ पीछे खींच लिए.
प्रदर्शनकारियों ने लगाए ट्रंप पर बड़े आरोप
तेहरान के एक व्यवसायी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, " इन 15 हजार लोगों की मौत के लिए ट्रंप जिम्मेदार हैं, क्योंकि कई प्रदर्शनकारी तब सड़कों पर उतरे जब उन्होंने ट्रंप का वह पोस्ट देखा, जिसमें उन्होंने लिखा था कि अमेरिका पूरी तरह से तैयार है. अमेरिका ने ईरानियों को इस तरह धोखा देने के लिए कोई समझौता जरूर किया होगा"
'ट्रंप के फैसले से हर कोई हैरान'
देश छोड़ने के बाद एक ईरानी नागरिक ने बताया, "जब ट्रंप ने कहा कि ईरानी अधिकारियों के अनुसार अब और हत्याएं, फांसी नहीं होंगी, तो हर कोई हैरान रह गया था. सभी गुस्से में थे. ईरानियों को लगता है कि उनके साथ खिलवाड़ किया गया. उन्हें बेवकूफ बनाया, धोखा दिया."
हालांकि, दूसरी तरफ कुछ छोटे ग्रुप यह तर्क दे रहे हैं कि ट्रंप का पीछे हटना एक रणनीति हो सकती है. तेहरान के एक इंजीनियर ने कहा कि ट्रंप ईरानी सरकार को धोखा दे रहे हैं.
मालूम हो, ईरान में आर्थिक तंगी की वजह से विरोध प्रदर्शन दिसंबर के आखिर में शुरू हुए थे, जिनका पहले मुद्दा ईरानी रियाल का गिरना, बढ़ती कीमतें था. इन सभी वजह से देश में बुनियादी सामान खरीदना मुश्किल हो गया था. हालांकि बाद में ये प्रदर्शन राजनीतिक सुधारों और सरकार में बदलाव की मांगों तक फैल गए. अब अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ट्रंप का यह यू-टर्न ईरानी शासन की जीत की तरह है.
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