- ईरान ने स्पष्ट किया है कि हॉर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों की आवाजाही पर किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी
- ईरान ने कहा है कि भारत उसका करीबी दोस्त है.
- अमेरिका ने इस्लामाबाद वार्ता में ईरान को बातचीत की मेज पर सरेंडर करने का दबाव बनाने की कोशिश की
US-Hormuz Blockade: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. ईरान ने साफ कर दिया है कि खाड़ी देशों में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के बावजूद हॉर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों की आवाजाही पर कोई आंच नहीं आएगी. भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने NDTV को दिए एक खास इंटरव्यू में भरोसा दिलाया कि तेहरान भारत को अपना 'करीबी दोस्त' मानता है और भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए यह समुद्री रास्ता पूरी तरह खुला रहेगा.
इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद राजदूत फतहाली ने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री ने उन पांच देशों की सूची में भारत का नाम विशेष रूप से शामिल किया है, जिन्हें तेहरान अपना मित्र मानता है.
-
परजीवी, बोझ, फेल प्रोडक्ट... NDTV World Summit में PM मोदी ने कांग्रेस को घेरा -
PM Modi in NDTV World Summit | बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में भारत की क्या भूमिका? PM मोदी ने बताया -
PM Modi Speech: Rahul Gandhi पर PM मोदी क्या-क्या बोले? | NDTV World Summit 2026 -
फेल प्रोडक्ट लॉन्च कर रही कांग्रेस, इतनी तो लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा से भी नहीं होती; NDTV वर्ल्ड समिट में PM मोदी -
NDTV World Summit के मंच से कौन से नए खेल का जिक्र कर गए मोदी...! -
तब बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है... PM मोदी का NDTV वर्ल्ड समिट से दुनिया को संदेश -
PM Modi Speech: Covid-19 का जिक्र कर PM मोदी ने बताई भारत की ताकत! कही ये बातें | NDTV India -
PM Modi Speech: UN को लेकर NDTV World Summit के मंच पर बड़ी बात बोले पीएम मोदी | NDTV India -
'मौजूदा चुनौतियों के सामने संयुक्त राष्ट्र की सीमाएं साफ दिख रही हैं', NDTV World Summit में बोले PM मोदी -
भारत क्या पाकिस्तान से अच्छे संबंध चाहता है? NDTV World Summit में जयशंकर का जवाब
उन्होंने बताया कि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए दोनों सरकारों के बीच सीधी बातचीत चल रही है. यह आश्वासन भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी तंग रास्ते से होकर गुजरता है और किसी भी बाधा का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
'टेबल पर बातचीत नहीं, सरेंडर कराना चाहता था अमेरिका'
इस्लामाबाद में हुई बातचीत क्यों टूटी, इस पर राजदूत ने कड़े शब्दों में अमेरिका की आलोचना की. उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने साफ कर दिया था कि अगर अमेरिका अपनी 'गैर-कानूनी' मांगें छोड़ दे और ईरान के अधिकारों का सम्मान करे, तो बातचीत आगे बढ़ सकती है. राजदूत के मुताबिक, "दुर्भाग्य से अमेरिका बातचीत की मेज पर सुलह करने के लिए नहीं, बल्कि हमें घुटनों पर लाने के इरादे से आया था."
तेल की कीमतों में लगेगी आग?
अमेरिकी नाकेबंदी के परिणामों पर चिंता जताते हुए ईरानी राजदूत ने कहा कि हॉर्मुज के रास्ते को रोकना सिर्फ ईरान के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आत्मघाती साबित होगा. उनके मुताबिक, "हॉर्मुज को ब्लॉक करना वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों को पूरी तरह तबाह कर देगा."
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में तेल की कीमतें इस तनाव का असर दिखाएंगी और दुनिया भर में महंगाई का संकट गहरा सकता है. ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद बंदरगाहों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की जो चेतावनी दी थी, उस पर राजदूत ने स्थिति स्पष्ट की.
एक फोन कॉल ने बिगाड़ा खेल?
इस पूरे घटनाक्रम में एक और चौंकाने वाला मोड़ आया है. ईरान का दावा है कि जब इस्लामाबाद में बातचीत निर्णायक मोड़ पर थी, तभी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक फोन कॉल ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि बातचीत के बीच में ही नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को फोन किया, जिसके बाद अमेरिका का पूरा ध्यान इजरायल के हितों की ओर मुड़ गया.
अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका उस जीत को टेबल पर हासिल करना चाहता था, जिसे वह युद्ध के मैदान में नहीं जीत पाया. करीब 21 घंटे तक चली मैराथन बातचीत के बाद वेंस का बिना किसी समझौते के इस्लामाबाद से चले जाना इसी 'हस्तक्षेप' का नतीजा बताया जा रहा है.
यह भी पढ़ें: पहले ईरान और अब अमेरिका... होर्मुज में नाकेबंदी की कहानी नई नहीं; 519 साल पहले इस देश ने वसूला था 'टोल'
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं