US Hormuz Blockade: ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के बाद अब अमेरिका ने भी इस इलाके में नाकेबंदी कर दी है. अमेरिकी नौसेना के मिडिल ईस्ट क्षेत्र में इस वक्त कम से कम 15 जंगी जहाजों के साथ मौजूद है. इसमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और 11 डेस्ट्रॉयर (युद्धपोत) शामिल हैं. ये जहाज ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी में हिस्सा ले सकते हैं.
हॉर्मुज के इस तंग रास्ते से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है. ऐसे में यहां जरा सी भी हलचल दुनिया भर के देशों के रसोई बजट से लेकर फैक्ट्रियों तक को प्रभावित करती है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस समुद्री रास्ते पर कब्जे और नाकेबंदी का खेल कोई नया नहीं है. इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि ईरान और अमेरिका से पहले भी कई ताकतें इस इलाके पर नाकेबंदी कर दुनिया की सप्लाई चेन को बंधक बना चुकी है.
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जब पुर्तगालियों ने वसूला था 'टैक्स'
न्यूयॉर्क टाइम्स ने इतिहासकार निएल फर्ग्यूसन और फिलिप जेलिको के हवाले से बताया, हॉर्मुज पर नियंत्रण की यह लड़ाई 519 साल पुरानी है. सबसे पहले पुर्तगालियों ने इस महत्वपूर्ण रास्ते पर कब्जा जमाया था और यहां से गुजरने वाले जहाजों से 'टोल' या टैक्स वसूलना शुरू किया था. हालांकि, बाद में फारसी (अब ईरान) और ब्रिटिश सेनाओं ने मिलकर पुर्तगालियों को यहां से खदेड़ दिया था. यह वह दौर था जब समुद्र पर जिसका कब्जा होता था, वही दुनिया की किस्मत लिखता था.
जब सीआईए ने तख्तापलट कर बदल दी थी ईरान की किस्मत
साल 1950 के दशक की शुरुआत में, ब्रिटेन ने हॉर्मुज में ऐसी ही नाकेबंदी की थी. उस वक्त ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेघ ने देश के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया था. इससे ब्रिटेन काफी नाराज था. इसके बाद ब्रिटेन ने सीआईए के समर्थन से एक गुप्त ऑपरेशन चलाया गया और मोसादेघ की सरकार का तख्तापलट कर दिया गया.
होर्मुज नाकेबंदी से ट्रंप कुछ हासिल भी कर पाएंगे?
मौजूदा हालात में ट्रंप का यह फैसला एक बड़े जुए की तरह देखा जा रहा है. अगर यह नाकेबंदी कम समय के लिए रहती है और ईरान को अपनी मांगों के आगे झुकने पर मजबूर कर देती है, तो इसे ट्रंप की एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जाएगा. ट्रंप का मानना है इससे ईरान की उस शक्ति को खत्म किया जा सकता है जिसके दम पर वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को धमका रहा है.
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