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'हड़बड़ी में डील मत करना...', ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता कर रहे वार्ताकारों को दी हिदायत

ट्रंप ने बीते दिन कहा था कि ईरान के साथ डील अंतिम चरण में है लेकिन अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इस बीच खबर आई की समझौता खटाई में पड़ गया है.

'हड़बड़ी में डील मत करना...', ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता कर रहे वार्ताकारों को दी हिदायत
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. (फाइल फोटो)

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर चल रही बातचीत अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में वार्ताकारों को हिदायत दी है कि वे ईरान के साथ डील करने में किसी भी तरह की 'जल्दबाजी न दिखाएं.'

ट्रंप का यह बयान तब आया है जब महज कुछ घंटे पहले उन्होंने खुद यह संकेत दिया था कि दोनों देश एक समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं. इस संभावित समझौते को लेकर लंबे समय से पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के इस नए रुख के बाद अब साफ हो गया है कि अमेरिका जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने के मूड में नहीं है और वह फूंक-फूंककर कदम रख रहा है.

क्या है इस संभावित डील का पूरा खाका?

अमेरिकी और ईरानी मीडिया के मुताबिक, दोनों देशों के बीच जिस समझौते पर चर्चा हो रही है, वह कोई अंतिम परमानेंट सेटलमेंट नहीं है. इसके तहत फिलहाल 60 दिनों के लिए सीजफायर बढ़ाने, रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे की बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार करने का प्रस्ताव शामिल है.

इस बीच, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह कहा था कि दोनों पक्षों को पूरा समय लेना चाहिए और एक सही नतीजे पर पहुंचना चाहिए. 

इससे पहले शनिवार को ट्रंप ने दावा किया था कि समझौता काफी हद तक तय हो चुका है, जिसके बाद यह कयास लगाए जाने लगे थे कि कभी भी इसका आधिकारिक एलान हो सकता है.

ईरान का रुख क्या है?

दूसरी तरफ, ईरान की ओर से भी पिछले कुछ दिनों में इसी तरह के मिले-जुले संकेत देखने को मिले हैं. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सप्ताहांत में बातचीत की स्थिति को बयां करते हुए एक दिलचस्प बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि दोनों देश इस वक्त समझौते के 'बेहद करीब भी हैं और बेहद दूर भी.'

अमेरिकी मीडिया की मानें तो इस शुरुआती समझौते में जानबूझकर सबसे पेचीदा और विवादित मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें आगे की बातचीत के लिए छोड़ दिया गया है. इन कठिन मुद्दों में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने का दायरा और समय, ईरान के फ्रीज (रोके गए) फंडों को जारी करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने की वाशिंगटन की सख्त मांगें शामिल हैं.

मार्को रुबियो ने भी दिया था हिंट

इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी अहम जानकारी दी है. दिल्ली के दौरे पर आए रुबियो ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस समय मेज पर एक 'काफी ठोस प्रस्ताव'मौजूद है. उन्होंने बीते दिन कहा था कि कुछ ही घंटों में होर्मुज को लेकर गुड न्यूज आ जाएंगे.

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