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डिएगो गार्सिया पर ईरान का हमला, अमेरिका-ब्रिटेन के लिए हिंद महासागर के इस छोटे द्वीप के क्या मायने

ईरान ने डिएगो गार्सिया पर दो मिसाइलें दागी हैं. यह द्वीप भले ही नक्शे पर छोटा दिखता हो, लेकिन इसकी अहमियत इतनी बड़ी है कि यहां से जुड़ी हर खबर वैश्विक राजनीति को हिला सकती है. इस द्वीप पर ईरान के हालिया हमले से यह साफ हो गया है कि ईरान अब अपनी ताकत दूर-दूर तक दिखाने की कोशिश कर रहा है.

डिएगो गार्सिया पर ईरान का हमला, अमेरिका-ब्रिटेन के लिए हिंद महासागर के इस छोटे द्वीप के क्या मायने
AI जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर
  • डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में US-ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए अहम है.
  • ईरान ने इस रणनीतिक द्वीप पर दो मिसाइल दागीं, जिनमें से एक मिसाइल खराब हो गई और दूसरी पर इंटरसेप्टर दागा गया.
  • डिएगो गार्सिया ईरान से लगभग 4 हजार किलोमीटर दूर है, जो ईरान की घोषित मिसाइल रेंज से अधिक दूरी पर है.
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नई दिल्ली:

हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित डिएगो गार्सिया एक बार फिर वैश्विक तनाव के केंद्र में है. ईरान ने 4000 किलोमीटर दूर इस रणनीतिक द्वीप पर दो मिसाइल दागीं. हालांकि अमेरिका ने दावा किया कि पहली मिसाइल हवा में ही खराब हो गई. दूसरी मिसाइल की ओर एक अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर दागा. यह इंटरसेप्शन सफल हुआ या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं की गई है. लेकिन इस मिसाइल हमले ने दुनिया की दो बड़ी सैन्य शक्तियों, अमेरिका और ब्रिटेन की चिंताएं जरूर बढ़ा दी हैं.

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क्यों खास है डिएगो गार्सिया?

डिएगो गार्सिया, चागोस आर्किपेलागो का सबसे बड़ा द्वीप है. यहां अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा है, जिसे दुनिया के सबसे सुरक्षित और गुप्त ठिकानों में गिना जाता है. अमेरिका इसे अपने वैश्विक सैन्य नेटवर्क का अहम हिस्सा मानता है. इतना अहम कि इसे 'फ्रीडम का फुटप्रिंट' कहा जाता है.

मिलिट्री नजरिए से कितना ताकतवर?

यहां से अमेरिका मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और एशिया में ऑपरेशन लॉन्च करता है. लंबी दूरी के बॉम्बर्स, पनडुब्बियां और निगरानी सिस्टम यहां तैनात रहते हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए यह हिंद महासागर में 'अडिग एयरक्राफ्ट कैरियर' जैसा है.

ईरान की मिसाइल रेंज पर उठे सवाल

डिएगो गार्सिया ईरान से करीब 4,000 किलोमीटर दूर है. यह दूरी ईरान की घोषित मिसाइल क्षमता से कहीं ज्यादा है. ईरान ने पहले कहा था कि वह मिसाइलों की रेंज 2,000 किमी तक ही रखता है, लेकिन इस हमले ने उसकी क्षमताओं को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. कुछ शोध संस्थानों का दावा है कि ईरान के पास पहले से ही 3,000-4,000 किमी तक मार करने वाली मिसाइलें हो सकती हैं.

ईरान ने हमले से क्या संकेत दिया?

ईरान का यह दावा सिर्फ एक सैन्य बयान नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है. यह दिखाने की कोशिश कि उसकी मिसाइल क्षमता अब दूर-दराज के अमेरिकी ठिकानों तक पहुंच सकती है. अगर दावा सही साबित होता है, तो यह अमेरिका की 'सुरक्षित बेस' की धारणा को चुनौती देगा.

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अमेरिका-ब्रिटेन के लिए क्या मायने?

ब्रिटेन और अमेरिका के लिए यह बेस इंडो-पैसिफिक और मिडिल ईस्ट में ताकत का केंद्र है. यहां पर किसी भी तरह का खतरा उनके ऑपरेशन, सप्लाई चेन और निगरानी तंत्र को प्रभावित कर सकता है. इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है, खासकर तब जब पहले से ही पश्चिम एशिया में हालात नाजुक हैं. 

डिएगो गार्सिया भले ही नक्शे पर छोटा दिखता हो, लेकिन इसकी अहमियत इतनी बड़ी है कि यहां जुड़ी हर खबर वैश्विक राजनीति को हिला सकती है. इस द्वीप पर ईरान के हालिया हमले से यह साफ हो गया है कि हिंद महासागर अब भी महाशक्तियों की जंग का अहम मैदान बना हुआ है.
 

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