- ईरान ने मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाया.
- अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार पहली मिसाइल उड़ान में फेल हुई और दूसरी मिसाइल को रोकने की कोशिश की गई थी.
- डिएगो गार्सिया ईरान से करीब 4000 किलोमीटर दूर है, जो ईरान की घोषित मिसाइल रेंज से ज्यादा दूरी है.
ईरान ने पहली बार अपनी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर हिंद महासागर में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाया. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों मिसाइलें बेस तक नहीं पहुंच पाईं, लेकिन इस कदम ने साफ कर दिया है कि ईरान अब अपनी ताकत दूर-दूर तक दिखाने की कोशिश कर रहा है.
एक मिसाइल उड़ान में फेल, दूसरी को रोकने की कोशिश
अमेरिका के अनुसार पहली मिसाइल हवा में ही खराब हो गई. दूसरी मिसाइल की ओर एक अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर दागा. यह इंटरसेप्शन सफल हुआ या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं की गई है.
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ईरान की मिसाइल रेंज पर उठे सवाल
डिएगो गार्सिया ईरान से करीब 4,000 किलोमीटर दूर है. यह दूरी ईरान की घोषित मिसाइल क्षमता से कहीं ज्यादा है. ईरान ने पहले कहा था कि वह मिसाइलों की रेंज 2,000 किमी तक ही रखता है, लेकिन इस हमले ने उसकी क्षमताओं को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. कुछ शोध संस्थानों का दावा है कि ईरान के पास पहले से ही 3,000-4,000 किमी तक मार करने वाली मिसाइलें हो सकती हैं.
क्या ईरान इतनी दूर मार करने वाली मिसाइल रखता है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा था कि देश ने अपनी मिसाइलों की रेंज जानबूझकर 2,000 किमी तक सीमित रखी है. यह दावा ईरान बार‑बार दोहराता रहा है.
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रिसर्च संस्थानों का क्या कहना है?
कई स्वतंत्र अनुसंधान केंद्रों का मत ईरान के दावे से अलग है. Iran Watch (Wisconsin Project) का कहना है कि ईरान के पास 4,000 किमी तक मार करने वाली मिसाइलें होने की संभावना है.
वहीं Alma Research Center (Israel) मानता है कि ईरान की कुछ मिसाइलें 3,000 किमी तक पहुंच सकती हैं. इसके अलावा ईरान की नई मिसाइल 'Kheibar/Khorramshahr‑4' को 2,000 किमी रेंज बताया गया है, लेकिन कई विशेषज्ञ इसका संभावित विस्तार 3,000-4,000 किमी तक मानते हैं.
हमले से क्या संकेत मिलता है?
डिएगो गार्सिया को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि ईरान ने या तो अपनी मिसाइल रेंज छुपाई थी, या फिर उसने उम्मीद से ज्यादा लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर ली हैं. यही बात अमेरिका और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बनी है.
क्या मिसाइलें लक्ष्य तक पहुंचीं?
वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार एक मिसाइल उड़ान में नाकाम रही, दूसरी मिसाइल को SM‑3 इंटरसेप्टर से रोकने की कोशिश हुई, लेकिन इंटरसेप्शन सफल हुआ या नहीं यह अभी स्पष्ट नहीं है. इसका मतलब यह हुआ कि ईरान की मिसाइलें अभी इतनी सटीक नहीं कि इतनी दूर स्थित लक्ष्य को हिट कर सकें.
क्या यह ईरान की मिसाइल क्षमता में बड़ा बदलाव है?
बिल्कुल. उसके तीन बड़े संकेत साबित हो रहे हैं.
1. मिसाइल रेंज ईरान की घोषित सीमा से कहीं अधिक निकली
4000 किमी दूर लक्ष्य चुनना यह दिखाता है कि ईरान के IRBM (Intermediate Range Ballistic Missiles) की क्षमता अब यूरोप और हिंद महासागर तक पहुंच सकती है.
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2. सैन्य रणनीति में बड़ा संदेश
डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण अड्डा है. यहां बमवर्षक, पनडुब्बियां और मिसाइल डेस्ट्रॉयर तैनात हैं. इसे निशाना बनाना ईरान की लंबी दूरी की धमकियां दिखाता है.
3. रिसर्च संस्थानों की आशंकाएं सही साबित होती दिख रहीं
Iran Watch और अन्य संस्थानों की रिपोर्टें पहले से कह रही थीं कि ईरान की वास्तविक मिसाइल रेंज उसके दावों से कहीं ज्यादा है. अब डिएगो गार्सिया हमला उसी संभावना को मजबूती देता है.
कांग्रेस नेता ने जताई चिंता
ईरान के इस हमले ने न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है. भारत में भी कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ईरान के इस हमले पर आश्चर्य जताया है. उन्होंने X पर लिखा, 'यदि ये रिपोर्ट सही हैं कि ईरान ने मध्य हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर हमला करने का प्रयास किया, तो ईरान ने दक्षिण की ओर हमला करते हुए युद्ध को और बढ़ा दिया है और पश्चिम को एक स्पष्ट संदेश दिया है.'
If reports are correct that Iran attempted to hit the Island of Diego Garcia deep in the Central Indian Ocean
— Manish Tewari (@ManishTewari) March 21, 2026
Then Iran has just widened the war and sent a very clear message towards the West while striking South https://t.co/s5prPgp9JQ
क्यों अहम है डिएगो गार्सिया?
बता दें कि डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए बेहद अहम बेस है, जहां बमवर्षक विमान, परमाणु-संचालित पनडुब्बियां और मिसाइल डेस्ट्रॉयर तैनात रहते हैं. यानी इस बेस को निशाना बनाना ईरान का एक सीधा संदेश माना जा रहा है कि वह अब मिडिल ईस्ट के बाहर भी अमेरिकी ठिकानों को चुनौती दे सकता है.
ब्रिटेन-मॉरीशस विवाद भी चर्चा में
इसी बीच डिएगो गार्सिया की संप्रभुता को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच बातचीत चल रही है. ब्रिटेन इस इलाके को मॉरीशस को सौंपने पर विचार कर रहा है, जबकि अमेरिका और ब्रिटेन मिलकर चाहेंगे कि सैन्य बेस वहीं बना रहे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है.
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