विज्ञापन

एक तरफ तकरार, दूसरी तरफ व्यापार: ग्लोबल मार्केट को साधने के लिए ट्रंप के ट्रेजरी विभाग ने खोला ईरान का रास्ता

ट्रंप प्रशासन ने समुद्र में फंसे 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल की सीमित बिक्री को मंजूरी दे दी है. ट्रेजरी विभाग का यह फैसला 30 दिनों के लिए प्रभावी है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण जहाजों पर अटके तेल भंडारों को बाजार में लाना है.

एक तरफ तकरार, दूसरी तरफ व्यापार: ग्लोबल मार्केट को साधने के लिए ट्रंप के ट्रेजरी विभाग ने खोला ईरान का रास्ता
  • अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सीमित अवधि के लिए ईरानी तेल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक्री की अनुमति दी
  • मार्च 2026 से पहले लोड किए गए ईरानी तेल को अप्रैल 2026 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचना संभव होगा
  • अमेरिका का उद्देश्य चीन के ब्लैक मार्केट में सस्ते ईरानी तेल के एकाधिकार को खत्म करना और सप्लाई गैप को भरना है

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे दुनिया हैरान है. अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने समुद्र में फंसे करोड़ों बैरल ईरानी तेल को सीमित समय के लिए अंतरराष्ट्रीय बजार में बेचने की छूट दी है. एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कल तक ईरान को पूरी तरह अलग-थलग करने की बात कर रहे थे, आज उनके ट्रेजरी विभाग ने उसी ईरान के लिए 'तिजोरी' का दरवाजा खोल दिया है. दरअसल यह न तो दोस्ती है और न ही नरम तेवर, बल्कि वैश्विक तेल बाजार को मंदी से बचाने के लिए ट्रंप की एक खास योजना है. आखिर ट्रंप के इस दांव के पीछे की क्या कहानी है? आइए समझते हैं.

अमेरिका खुद मार्केट में उतार रहा ईरान का तेल

दरअसल अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल की सीमित बिक्री के लिए शॉर्ट-टर्म अथॉरिटी यानी कुछ समय की छूट जारी कर दी है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बिसेंट ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाने के लिए नैरोली टेलर्ड यानी सीमित दायरे वाला है. ट्रेजरी विभाग ने 20 मार्च 2026 से पहले जहाजों पर लोड किए गए ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों को 19 अप्रैल 2026 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की अनुमति दी है. स्कॉट बिसेंट के ने इसके पीछे तर्क दिया कि प्रतिबंधित ईरानी तेल को चीन सस्ते में जमा कर रहा था. इस आपूर्ति को दुनिया के लिए खोलकर, अमेरिका तेजी से तेल बाजार में लाएगा. 

उन्होंने इसे ईरान के तेल का इस्तेमाल उसी के खिलाफ करने की रणनीति बताया, ताकि हॉर्मुज संकट के कारण पैदा हुए सप्लाई गैप को भरा जा सके और कीमतों को काबू में रखा जा सके. अमेरिका का दावा है कि इस बिक्री के बावजूद ईरान के लिए इस रिवेन्यू तक पहुंच बनाना बेहद मुश्किल होगा.

Trump Treasury

Trump Treasury

अमेरिका की दोहरी नीति में इतने विरोधाभास क्यों?

एक तरफ अमेरिका ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी चला रहा है और दूसरी तरफ उसी के तेल पर लगे प्रतिबंध हटा रहा है। इस दोहरी रवैये के पीछे उसकी आर्थिक मजबूरियां और अंतरराष्ट्रीय दवाब है. अमेरिका का तर्क है कि यह एक सोची-समझी रणनीति है, लेकिन ये फैसला बेहद विरोधाभासी है. ईरान की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति का केंद्र तेल ही है. ऐसे में उसके तेल को बाजार में उतार कर अमेरिका कहीं ना कहीं ईरान को और मजबूत कर रहा है. इस विरोधाभास को ऐसे समझ सकते हैं: 

- तेल की कमी और बढ़ती महंगाई: हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से रोजाना करीब एक से डेढ़ करोड़ बैरल तेल बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है. इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल के दाम आसमान छू रहे हैं.

- रूस के साथ भी दिखा अमेरिका का दोहरा रवैया: अमेरिका की यह दोहरी नीति नई नहीं है. इससे पहले अमेरिका ने समुद्र में फंसे प्रतिबंधित रूसी तेल को भी बाजार में लाने के लिए बिल्कुल ऐसी ही छूट दी थी, जिससे करीब 130 मिलियन बैरल तेल बाजार में आया था.

- चीन के एकाधिकार का भी डर: अमेरिका को चीन के एकाधिकार की भी चिंता है. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का मानना है कि ईरान अपना तेल ब्लैक मार्केट में कौड़ियों के भाव सिर्फ चीन को बेच रहा था. ऐसे में अमेरिका चीन को मिल रहे सस्ते तेल के फायदे को भी खत्म करना चाहता है.

यह भी पढ़ें: इतने बयान बदलेंगे कि कन्फ्यूज हो जाओगे- ट्रंप के विरोधाभासी बयानों की लिस्ट

ईरान का कितना तेल समुद्री जहाजों पर फंसा?

मौजूदा समय में हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से करीब 20% वैश्विक तेल आपूर्ति ठप पड़ गई है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और शिपिंग डेटा के अनुसार, फिलहाल करीब 140 मिलियन यानी 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल समुद्र में टैंकरों पर फंसा हुआ है. यह 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजार की करीब 10 से 14 दिनों की आपूर्ति की भरपाई कर सकता है. इस विशेष छूट का सीधा उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कानूनी पेचिदगियों के कारण पानी में अटके पड़े इस स्ट्रैंडेड ऑयल को तुरंत मार्केट में उतारना है.

यह भी पढ़ें: रूस ने ईरान से नाता तोड़ने की रखी थी शर्त? जानें डील को लेकर मॉस्‍को ने क्‍या कहा

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Iran War, Iran War 2026, Iran War Affect On LPG Gas, Iran War And Oil Crisis, Iran War Assessment
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com