मिडिल ईस्ट में 40 दिनों तक चले युद्ध से किसकी जीत हुई और किसकी हार, इसको लेकर दोनों पक्षो के अपने-अपने दावे हैं. लेकिन यह भी सच है इस लड़ाई की अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ी है. खासकर इस जंग में अमेरिकी हथियारों की अजेय वाली छवि पर भयंकर चोट लगी है. दुनिया के सबसे आधुनिक और ताकतवर कहे जाने वाले हथियारों की साख पर, ऐसा बट्टा लगा है जिसे भरने में सालों लगेंगे. अमेरिकी हथियारों को लेकर भम्र भी टूटे है कि उसका काट किसी के पास नही है. सच कहें तो इस जंग ने अमेरिकी और इजराइली हथियारों की पोल खोल दी है.
'अब्राहम लिंकन पर भी हुआ था हमला'
अमेरिकी ताकत का प्रतीक एयर काफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल का हमला होना बहुत बड़ी बात है. इस विमानवाहक पोत पर केवल 80 के करीब फाइटर ही नही होते, बल्कि ऐसे एयर डिफेंस सिस्टम लगे होते हैं जो दुश्मन के हमले को पास फटकने से पहले ही मार गिराते है. अब्राहम लिंकन के साथ पूरा कैरियर बैटल ग्रुप होता है. यानि इसके साथ एक नहीं,कई युद्धपोत होते हैं. इससे इस परमाणु उर्जा से चलने वाले इस एयरकाफ्ट कैरियर को पीछे जाना काफी मायने रखता है.

ईरान ने अमेरिकी फाइटर जेट को मार गिराया था
अमेरिका के किसी भी वॉर में नही हारने वाले F15-E स्ट्राइक ईगल को भी ईरान ने मार गिराया. ये बहुत ही भरोसेमंद जेट माना जाता है. लेकिन, ईरान ने अमेरिका के एक कई F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है. यह मल्टी रोल एयरकाफ्ट हवा से हवा, और हवा से जमीन में मार करने में माहिर होता है. यह करीब 11 टन से ज्यादा विस्फोटक लेकर जा सकता है. अमेरिका का 50 साल पुराना A-10 थंडरबोल्ट विमान भी किसी से कम नही है. ग्राउंड अटैक में इसका कोई जवाब नहीं. 50 साल पुराना यह विमान, अभी भी अमेरिकी वायुसेना में सेवा दे रहा है. इसकी बॉडी बहुत मजबूत होती है. छोटे मोटे हमलों का तो इस पर कोई असर नही होता. बशर्ते इस पर छोटे हमले भारी मात्रा में न कर दिए जाएं. इस विमान को भी ईरान ने मार गिराया.

ऐसे ही MQ-9 रीपर ड्रोन को भी ईरान ने मार गिराया है. यह अमेरिका के सबसे हाइटेक ड्रोन्स में एक है. यह ड्रोन दुश्मन अड्डों को ट्रैक करने के साथ-साथ अटैक में माहिर होता है. इसे दुनिया के सबसे घातक ड्रोनों में से एक माना जाता है. इसी ड्रोन से अमेरिका ने ईरान के जनरल सुलेमानी को मार गिराया था. लेकिन अब रीपर को ढेर करके ईरान के इसके तिस्लम को भी भेद दिया है. चार इंजन वाले अमेरिका के स्पेशल ट्रांसपोर्ट विमान सी 130 को ईरान ने चकनाचूर कर दिया. यह खास ऑपरेशन में कच्चे या उबड़ खाबड़ रनवे से उड़ान भरने और अपनी मजबूती के लिये जाना जाता है. इस विमान जिस तरह मलबे ईरान में बिखरे पड़े थे वह यह बताने के लिये काफी थे इसका क्या हाल हुआ है हलांकि अमेरिका का दावा है कि उसने इस विमान को खुद ही उड़ा दिया.
अमेरिका के रडार सिस्टम को भी किया था तबाह
अमेरिकी वायुसेना के आंख और कान कहे जाने अवाक्स E-3 सेंट्री को तो ईरान के मिसाइल और ड्रोन ने तबाह कर दिया. ईरान ने इन्हें टेकऑफ करने तक का मौका भी नहीं दिया. यह अमेरिकी मिशंस का कमांड सेंटर माना जाता है. ये सेंटर दुश्मन के मिसाइलों और ड्रोन का 400 किलोमीटर पहले पता लगा लेता है. पर ईरानी हमले में ये अपना ही बचाव नही कर पाया.

ऐसी ही कुछ बदनासीबी, अमेरिकी मिलेट्री ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर चिनूक के हाथ भी आई है. इसे भी ईरान ने तबाह कर दिया. यह ऊंचे पहाड़ी इलाके में 10 टन का वजन लेकर 15 से 16 हजार फीट पर उड़ान भरने में सक्षम है. यह मजबूत हेलीकॉप्टर, तोप से लेकर भारी भरकम बख्तरबंद गाड़ियों को, लटका कर ले जाने में सक्षम है. वहीं इसी जंग में ईरान ने दोअमेरिकी ब्लैक हॉक हेलीकाप्टर्स को भी ईरान ने मार गिराया है. ये वही हेलीकॉप्टर है जिसका इस्तेमाल अमेरिका ने पाकिस्तान में ऑपरेशन Neptune Spear के दौरान किया था. इस ऑपरेशन में अल-कायदा के चीफ ओसामा बिन लादेन को US नेवी सील्स ने मार गिराया था.
इसी तरह अमेरिका के भारी भरकम दो एयर डिफेंस सिस्टम के मिथ को ईरान ने तार-तार कर दिया. थाड और पैट्रियट जैसे मशहूर एयर डिफेंस सिस्टम्स जंग में असरदार साबित नहीं हुए. जिन खाड़ी देशों ने इस सिस्टम को अपने बचाव के लिये लगा रखा था, वो किसी काम के नहीं निकले.थाड एक एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल है जो छोटे और मध्यम दूरी के मिसाइलों को नष्ट करता है. वही पैट्रियट रक्षा प्रणाली दुश्मन के हवाई हमलों को रोकने के लिए बना है. लेकिन ईरान ने इसकी कक़्त खोज ली है.कुल मिलाकर ये समय अमेरिकी सेना के लिए अच्छा नहीं है. उनकी छवि को बहुत बड़ा धक्का लगा है.
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