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चिप्स की रंगत फीकी! इस कंपनी ने स्नैक्स की पैकेजिंग को 'ब्लैक एंड व्हाइट' किया, ईरान जंग से कनेक्शन

ईरान जंग का असर अब रोजमर्रा की चीजों पर पड़ने लगा है. स्याही में इस्तेमाल होने वाले इंग्रीडिएंट की सप्लाई पर भी इस जंग ने असर डाला है.

चिप्स की रंगत फीकी! इस कंपनी ने स्नैक्स की पैकेजिंग को 'ब्लैक एंड व्हाइट' किया, ईरान जंग से कनेक्शन
कंपनी ने पैकेजिंग ही ब्लैक एंड व्हाइट कर दी है.
Calbee
  • ईरान युद्ध के कारण जापान की कंपनी कैल्बी ने चिप्स के पैकेट की पैकेजिंग ब्लैक एंड व्हाइट कर दी है
  • युद्ध से नेफ्था की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे स्याही और प्लास्टिक के उत्पादन में बाधा आई है और लागत बढ़ी है
  • जापान का लगभग चालीस प्रतिशत नेफ्था मध्य पूर्व से आता है, जो युद्ध के कारण सप्लाई चेन में बाधित हुआ है
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अमेरिका और ईरान में चल रही दो महीने से ज्यादा लंबी जंग का असर अब छोटी-छोटी चीजों पर भी पड़ने लगा है. ईरान जंग के कारण चिप्स के पैकेट की रंगत फीकी पड़ गई है. जापान की मशहूर स्नैक कंपनी कैल्बी (Calbee) ने अपने चिप्स के पैकेट की पैकेजिंग बदल दी है. चिप्स का पैकेट अब तक जो रंगीन हुआ करता था, वह अब 'ब्लैक एंड व्हाइट' रहेगा, क्योंकि ईरान युद्ध के कारण स्याही में इस्तेमाल होने वाले इंग्रीडिएंट की सप्लाई ठप हो गई है. 

Calbee ने एक बयान जारी कर कहा कि कुछ समय के लिए ब्लैक एंड व्हाइट पैकेजिंग होगी. कंपनी का कहना है कि उसके चिप्स और प्रॉन्स क्रैकर्स के 14 प्रोडक्ट्स के नए स्टाइल वाले पैकेट 25 मई से जापान की दुकानों में मिलने लगेंगे.

यह दिखाता है कि कैसे ईरान जंग अब रोजमर्रा की चीजों पर असर डाल रही है. 28 फरवरी को जब से ईरान जंग शुरू हुई है तब से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण तेल-गैस की सप्लाई भी प्रभावित हुई है. हालिया दिनों में दुनियाभर की कई कंपनियों ने चेतावनी दी है कि ईंधन, प्लास्टिक और हीलियम जैसी चीजों की सप्लाई में रुकावट की वजह से उनके बिजनेस की लागत बढ़ रही है.

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Calbee को क्यों लेना पड़ा यह फैसला?

Calbee ने एक बयान में कहा कि डिजाइन में यह बदलाव मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच कच्चे माल की सप्लाई में अस्थिरता के कारण किया गया है. कंपनी का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि चिप्स की सप्लाई ठप न हो.

इस फैसले की बड़ी वजह नेफ्था की सप्लाई रुकना है. नेफ्था ऑयल रिफाइनिंग का एक प्रोडक्ट है और स्याही और प्लास्टिक में इस्तेमाल होता है. जंग शुरू होने के बाद से एशिया में नेफ्था की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, जिससे इससे जुड़े बिजनेस की लागत महंगी हो गई है.

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जापान के डिप्टी चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी की सातो ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि युद्ध से पहले, जापान का लगभग 40% नेफ्था मध्य पूर्व से आता था. इससे पहले अप्रैल में जापान की प्रधानमंत्री सनाई ताकाएची ने कहा था कि जापान नेफ्था की सप्लाई के लिए दूसरे देशों से भी बात कर रहा है. 

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एशिया पर सबसे ज्यादा असर

ईरान जंग शुरू होने के बाद सप्लाई चेन में आई रुकावटों से एशियाई देशों को खासतौर पर ज्यादा नुकसान हुआ है. वह इसलिए क्योंकि एशियाई देश अपने आयात के लिए मिडिल ईस्ट और होर्मुज पर ज्यादा निर्भर हैं.

1 मई को जापान की फूड कंपनी Mizkan ने पॉलीस्टाइरीन कंटेनरों की कमी के चलते अपने कुछ प्रोडक्ट्स की बिक्री रोक दी और दूसरों की कीमतें बढ़ा दी थीं. यह कंपनी सोयाबीन स्नैक बनाती है.

इस बीच, Toyota और Hyundai जैसी कार बनाने वाली कंपनियों ने कहा है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और बिक्री में कमी के कारण उनके मुनाफे पर असर पड़ा है. दुनिया भर में, कई एयरलाइनों ने युद्ध के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल आने के बाद अपनी उड़ानें रोक दी हैं और कुछ विमानों को ग्राउंडेड कर दिया है.

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