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मिसाइल, ड्रोन या फिर साइबर अटैक... ईरान पर हमले के ये 6 विकल्प, कौन सा हथियार आजमाएगा अमेरिका

US Iran Military Tension: अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमले को मंजूरी दे दी तो उनकी आर्मी के पास क्या विकल्प होंगे? यहां आसान शब्दों में समझिए.

मिसाइल, ड्रोन या फिर साइबर अटैक... ईरान पर हमले के ये 6 विकल्प, कौन सा हथियार आजमाएगा अमेरिका
US Iran Military Tension: ईरान और अमेरिका में सैन्य तनाव जारी
  • ईरान में खामेनेई की सरकार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, जिनमें दो हजार से अधिक लोग मारे गए हैं
  • विशेषज्ञों का मानना है कि बाहरी सैन्य दबाव ईरान की सरकार को अधिक मजबूत और विरोध को कमजोर कर सकता है
  • अमेरिका मिडिल ईस्ट में सैन्य ठिकानों से ईरान पर हवाई, नौसेना, ड्रोन, साइबर और गुप्त मिशनों के विकल्प रखता है
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ईरान में अली खामेनेई के नेतृत्व वाली इस्लामिक सरकार सालों में घरेलू अशांति की सबसे गंभीर लहर का सामना कर रही है. ईरान के आम लोग बागी हो गए हैं. इस्लामिक रिपब्लिक में सत्तारूढ़ सरकार और उसकी कुख्यात सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया है. रिपोर्टों से पता चलता है कि ईरानी अधिकारियों की व्यापक कार्रवाई के दौरान 2,500 से अधिक लोग मारे गए हैं. इन सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे नाजुक समय में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की बार-बार चेतावनी दी है.

ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से प्रदर्शनकारियों के समर्थन में ईरान के अंदर सैन्य हस्तक्षेप करने का विचार रखा है. ट्रंप की इन चेतावनियों से वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बढ़ गया है. ईरान में फैली अशांति वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता पर पकड़ को चुनौती दे रही है, तो ट्रंप की धमकी एक कदम आगे जाकर उस दबाव को कहीं अधिक बढ़ा रही है.

ट्रंप की इन बयानबाजी के बावजूद, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका का सैन्य हमला प्रतिकूल साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का तर्क है कि बाहरी सैन्य दबाव संभवतः ईरान की सरकार को राष्ट्रवादी भावना को एकजुट करने, विरोध आंदोलन की वैधता को कमजोर करने और शासन के आसपास घरेलू समर्थन को मजबूत करने का मौका दे देगा.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका कितना तैयार है?

ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत और इराक में अमेरिका के सैन्य बेस हैं और इस तरह अमेरिका पूरे मिडिल ईस्ट में एक महत्वपूर्ण सैन्य उपस्थिति बनाए रखता है. अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक निवेश किया है. हालांकि पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना की मौजूदगी का एक पक्ष यह भी है कि अगर कोई मजबूत क्षेत्रीय ताकत बदला लेने पर उतर आए तो उसके पास हमला करने को विकल्प भी बहुत सारे होंगे.

पिछले साल, ईरान ने इस क्षेत्र में एक अमेरिकी अड्डे को निशाना बनाया था, जिसके बाद वाशिंगटन को ऐसे ही एक बेस में सैनिकों की संख्या कम करनी पड़ी थी. पिछले साल जून में, ईरान ने कतर में अल उदीद बेस पर हमला करके फिर से अपनी पहुंच का प्रदर्शन किया था. ईरान ने कहा कि यह हमला ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का बदला था. उस घटना के बाद, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली शामखानी ने ट्रंप को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि हमला "ईरान की किसी भी हमले का जवाब देने की इच्छा और क्षमता" दिखाता है.

अगर अमेरिका हमला चाहे तो उसके सामने होंगे 6 विकल्प

यदि ट्रंप आखिर में यह फैसला लेते हैं कि ईरान पर सैन्य हमला करना है तो, तो अमेरिकी सेना के पास कई संभावित विकल्प होंगे-

  1. पहला विकल्प होगा कि अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट में मौजूद अपने क्षेत्रीय ठिकानों से ईरान पर हवाई हमला शुरू कर दे. इसमें ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए मिडिल ईस्ट में तैनात बी-52 बॉम्बर और लड़ाकू जेट की तैनाती भी शामिल होगी.
  2. दूसरा विकल्प नौसेना आधारित मिसाइल हमले होंगे. क्रूज मिसाइलों को फारस की खाड़ी में मौजूद विमान वाहक, विध्वंसक या पनडुब्बियों से ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर दागा जा सकता है.
  3. ड्रोन भी युद्ध की स्थिति में संभवतः एक केंद्रीय भूमिका निभाएगा. हथियारों से लैस ड्रोन का उपयोग ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के ठिकानों या विरोध प्रदर्शनों को दबाने में शामिल खामेनेई की दूसरी एजेंसियों सहित दूसरे अहम लक्ष्यों पर सटीक हमलों के लिए किया जा सकता है.
  4. साइबर युद्ध भी एक रास्ता हो सकता है. अमेरिका के साइबर ऑपरेशन का उद्देश्य ईरानी कमांड सिस्टम, संचार नेटवर्क और सेना के कॉर्डिनेशन को बाधित करना हो सकता है. इससे तेहरान की प्रभावी ढंग से जवाब देने की क्षमता सीमित हो सकती है.
  5. वाशिंगटन गुप्त सैन्य मिशनों पर भी विचार कर सकता है. इनमें ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य या रणनीतिक ऐसेट को रास्ते से हटाने की कार्रवाई करने वाली सेना की खास यूनिट शामिल होंगी, जो ईरान की क्षमताओं को कम करते हुए पूर्ण पैमाने पर आक्रमण से बचेंगी.
  6. आखिरी विकल्प कि अमेरिका लंबी दूरी की मिसाइलों का उपयोग करके टारगेट बनाए गए ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमले कर सकता है. इस तरह के हमले मिसाइल बनाने वाले ईरानी फैक्टरियों या परमाणु साइटों पर केंद्रित हो सकते हैं, जिनमें से कुछ पर अमेरिका ने महीनों पहले ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर करने के उद्देश्य से हमला किया था.

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