- ट्रंप के ईरान से जुड़े पोस्ट पर विवाद शुरू हो गया है. अमेरिका में भी ट्रंप की भाषा की आलोचना हो रही है.
- ऐसे में सोशल मीडिया पर और सट्टा बाजार में ट्रंप को पद से हटाए जाने की चर्चा जारी है.
- 25वें संशोधन के सेक्शन चार के तहत उपराष्ट्रपति और कैबिनेट राष्ट्रपति को अक्षम घोषित कर सकते हैं.
अमेरिका की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. ईस्टर के मौके पर ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया, जिसमें चेतावनी और टकराव के संकेत साफ दिखे. इस पोस्ट के सामने आते ही वॉशिंगटन में राजनीतिक हलचल तेज हो गई. विपक्षी डेमोक्रेट्स ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया, वहीं कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी इस पर असहजता जताई.
इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. अगर राष्ट्रपति का व्यवहार विवादित या अस्थिर लगे, तो क्या उन्हें पद से हटाया जा सकता है?
क्या है 25वां संशोधन और क्यों बना था?
अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन 1967 में लागू हुआ था. इसकी पृष्ठभूमि जॉन केनेडी की हत्या से जुड़ी है, जिसके बाद सत्ता के स्पष्ट ट्रांसफर की जरूरत महसूस हुई. इस संशोधन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थिति मौत, इस्तीफा या अक्षमता में सत्ता का खालीपन न रहे. इसके तहत उपराष्ट्रपति सीधे राष्ट्रपति की भूमिका संभाल लेते हैं.

लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इसके सेक्शन-4 की होती है. यही वह प्रावधान है जो राष्ट्रपति को 'अक्षम' घोषित करने की प्रक्रिया तय करता है.
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सेक्शन-4: राष्ट्रपति को हटाने की सबसे कठिन प्रक्रिया
25वें संशोधन का सेक्शन-4 बेहद असाधारण और जटिल है. इसके तहत उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के ज्यादातर सदस्य लिखित रूप में यह घोषित करते हैं कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम नहीं हैं. ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यकारी राष्ट्रपति बन जाते हैं. हालांकि, अगर राष्ट्रपति इस फैसले को चुनौती देते हैं, तो मामला कांग्रेस तक जाता है. वहां दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से फैसला होता है, जो हासिल करना बेहद मुश्किल माना जाता है.
यही वजह है कि अमेरिकी इतिहास में इस प्रावधान का इस्तेमाल कभी किसी राष्ट्रपति को जबरन हटाने के लिए नहीं किया गया.
ट्रंप के बयान पर क्यों उठी हटाने की मांग?
ट्रंप के ईरान वाले बयान को कई नेताओं ने 'खतरनाक' और 'असंतुलित' बताया. डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने कहा कि ऐसे बयान अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाते हैं. वहीं सीनेटर क्रिस मर्फी ने साफ कहा कि अगर वे प्रशासन का हिस्सा होते, तो 25वें संशोधन पर विचार करते. बर्नी सैंडर्स ने भी इस बयान को 'खतरनाक' करार दिया और राष्ट्रपति की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए.
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप के बयानों पर इस तरह की बहस छिड़ी हो, लेकिन इस बार मामला अंतरराष्ट्रीय तनाव, खासतौर पर ईरान से जुड़ा होने के कारण ज्यादा गंभीर माना जा रहा है.

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रिपब्लिकन खेमे में भी बेचैनी
दिलचस्प बात यह है कि चिंता सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं है. ट्रंप की अपनी पार्टी के कुछ नेताओं और पूर्व सहयोगियों ने भी उनके व्यवहार पर सवाल उठाए हैं. पूर्व रिपब्लिकन सांसद Joe Walsh और ट्रंप के पूर्व कम्युनिकेशन डायरेक्टर एंथोनी स्कारामुची (Anthony Scaramucci) ने खुलकर कहा कि 25वें संशोधन पर चर्चा होनी चाहिए.
हालांकि, मौजूदा रिपब्लिकन नेतृत्व अभी खुलकर इस मांग के साथ नहीं आया है, जिससे यह साफ है कि पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर असहमति है.
सट्टा बाजार और सोशल मीडिया में भी गर्म बहस
यह मुद्दा अब सिर्फ राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं रहा. ऑनलाइन प्रेडिक्शन मार्केट्स में इस बात पर दांव लगाए जा रहे हैं कि क्या ट्रंप के कार्यकाल में 25वें संशोधन का इस्तेमाल होगा. सोशल मीडिया पर भी #25thAmendment ट्रेंड करने लगा है, जहां लोग राष्ट्रपति की फिटनेस, मानसिक स्थिति और निर्णय क्षमता पर खुलकर बहस कर रहे हैं.
स्वास्थ्य को लेकर अफवाहें, व्हाइट हाउस का खंडन
विवाद के बीच ट्रंप की सेहत को लेकर भी अफवाहें फैलने लगीं. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्हें अचानक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन व्हाइट हाउस ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया. हालांकि, इन अफवाहों ने पहले से चल रही बहस को और हवा दे दी है और लोगों के मन में संदेह गहरा किया है.
क्या वाकई हटाए जा सकते हैं ट्रंप?
कानूनी तौर पर रास्ता मौजूद है, लेकिन व्यवहारिक रूप से यह बेहद मुश्किल है. इसके लिए उपराष्ट्रपति, कैबिनेट और फिर कांग्रेस... तीनों स्तरों पर भारी समर्थन चाहिए. अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि ट्रंप के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई की तैयारी हो रही है. लेकिन उनके हालिया बयान और उस पर आई प्रतिक्रियाओं ने यह साफ कर दिया है कि 25वें संशोधन को लेकर बहस अभी खत्म नहीं होने वाली.
आने वाले दिनों में अगर ट्रंप के बयान इसी तरह विवाद पैदा करते रहे, तो यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है.
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