Iran-US War: ट्रंप का ईरान को फाइनल अल्टीमेटम!, जंग हुई तो ईरान देगा बड़े सरप्राइज'

नई दिल्ली/पश्चिम एशिया. पश्चिम एशिया में तनाव लगातार गहराता जा रहा है और तीन महीने बीत जाने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस समझौते की स्थिति नहीं बन पाई है. दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन साथ ही सख्त बयानबाज़ी और सैन्य चेतावनियों का दौर भी तेज हो गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके पास बेहद सीमित समय बचा है और वह परमाणु हथियार नहीं रख सकता. ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर तय समयसीमा में समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को “दो से तीन दिन का समय” दिया गया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि समय तेजी से खत्म हो रहा है.
हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि वह अभी भी उम्मीद कर रहे हैं कि हमला टाल दिया जाए. इससे पहले कतर, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों की अपील के बाद अमेरिका ने संभावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया था. लेकिन अब हालात फिर से तनावपूर्ण होते दिख रहे हैं.
दूसरी ओर, ईरान ने भी सख्त रुख अपना रखा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराची ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की तरफ से हमला हुआ, तो उसका जवाब “निर्णायक” होगा. उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों को निशाना बना सकता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्थिति इस समय बेहद नाजुक मोड़ पर है. अमेरिका जहां ईरान से यूरेनियम संवर्धन रोकने और परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण की मांग कर रहा है, वहीं ईरान की शर्त है कि उस पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी पाबंदियां खत्म हों.
इजराइल भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और माना जा रहा है कि वह अमेरिका के “ग्रीन सिग्नल” का इंतजार कर रहा है. वहीं रूस और चीन जैसे देश खुलकर ईरान के समर्थन में खड़े हैं, जिससे वैश्विक समीकरण और जटिल हो गए हैं.
ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका की ओर से जो प्रस्ताव सामने आए हैं, उनमें ईरान से 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम सौंपने और परमाणु गतिविधियों को सीमित करने जैसी शर्तें शामिल हैं. हालांकि इन शर्तों को लेकर अभी तक सहमति नहीं बनी है.
इस बीच, ईरान ने भी अपने प्रस्तावों के साथ जवाब दिया है और बातचीत के जरिए समाधान की बात दोहराई है, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि वह दबाव में झुकने वाला नहीं है.
मौजूदा हालात में दोनों देश एक तरफ बातचीत की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सैन्य ताकत दिखाकर दबाव बनाने की कोशिश में लगे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कूटनीति इस संकट को टाल पाएगी या दुनिया एक नए बड़े टकराव की ओर बढ़ रही है.

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