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केरल में शपथ ग्रहण समारोह में पूरा 'वंदे मातरम' गाने को लेकर लेफ्ट और बीजेपी के बीच टकराव

Kerala Vande Matram Row: सीपीआईएम का कहना है कि बीजेपी शासित पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान वंदे मातरम का पूर्ण गायन नहीं किया गया था, फिर केरल में इसे पूरा क्यों गाया गया?

केरल में शपथ ग्रहण समारोह में पूरा 'वंदे मातरम' गाने को लेकर लेफ्ट और बीजेपी के बीच टकराव
केरल में वंदे मातरम के गायन पर विवाद.
  • केरल में यूडीएफ कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम का पूरा गीत गाने को लेकर विवाद पैदा हुआ है
  • वामपंथी दलों ने पूरा वंदे मातरम गाना बहुलतावादी समाज के लिए अनुपयुक्त बताते हुए इसकी आलोचना की है
  • सीपीआईएम और सीपीआई ने कहा कि वंदे मातरम के कुछ अंश धार्मिक और एकतरफा सोच को बढ़ावा देते हैं
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तिरुवनंतपुरम:

केरल में सोमवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम का पूरा गायन दक्षिणी राज्य में विवाद की वजह बन गया है. वामपंथी दलों ने पूरा वंदे मातरम गाये जाने की आलोचना करते हुए इसे गलत कदम बताया. उनका कहना है कि यह बहुलतावादी समाज के लिए अनुपयुक्त है. दूसरी तरफ बीजेपी ने कम्युनिस्टों पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे जमात-ए-इस्लामी और एसडीपीआई जैसी कट्टरपंथी वोट बैंक ताकतों को खुश करने के लिए ऐसा कर रहे हैं.

CPIM और CPI को वंदे मातरम गायन पर आपत्ति क्यों?

बता दें कि वंदे मातरम पर सबसे पहले आपत्ति मंगलवार को सीपीआईएम ने जताई थी. उसके बाद सीपीआई ने भी उसका साथ देते हुए राष्ट्रीय गीत को पूरा गाये जाने के फैसले पर सवाल उठाया. सीपीआई के बिनॉय विश्वम ने कहा, "इतिहास में जाकर देखें तो वंदे मातरम की कुछ पंक्तियों को हटाने के पीछे की वजह यही थी कि वे एक खास तरह की सोच को जन्म देती थीं. वे पक्तियां जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के दृष्टिकोण के मुताबिक नहीं थीं. कांग्रेस पार्टी को यह बात नहीं भूलनी चाहिए थी."

पीटीआई के मुताबिक, विवाद से खुद को अलग करते हुए, केरल की गई सरकार के सूत्रों ने कहा कि कार्यक्रम में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि इसका पूरा आयोजन लोक भवन ने किया था.

वंदे मातरम गायन पर विवाद क्यों?

सीपीआईएम राज्य सचिवालय ने वंदे मातरम पर आपत्ति की वजहों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस कार्य समिति ने 1937 में ही यह राय व्यक्त की थी कि "वंदे मातरम" के सभी भागों का गायन एक बहुलवादी समाज के लिए उपयुक्त नहीं है, जिसकी वजह से इसके कुछ अंश हटा दिए गए थे. संविधान सभा ने 950 में यह स्पष्ट किया कि स्वीकृत संस्करण की केवल पहली आठ पंक्तियों को ही राष्ट्रीय गीत माना जाना चाहिए.

पार्टी ने तर्क दिया कि गीत के कुछ अंश धार्मिक मान्यताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. आधिकारिक समारोहों में इसको परा गाया जाना भारत की बहुलवादी परंपराओं के खिलाफ है. लेकिन केरल मंत्रिमंडल के कार्यक्रम में हटाए गए अंशों को शामिल करके उस स्थिति को उलट दिया गया. 

बंगाल में पूरा वंदे मातरम नहीं गाया, फिर केरल में क्यों?

सीपीआईएम ने यह भी कहा कि बीजेपी शासित पश्चिम बंगाल में भी शपथ ग्रहण समारोह के दौरान वंदे मातरम का पूर्ण गायन नहीं किया गया था, जिसकी वजह से केरल का यह कदम असामान्य लगता है. उसने आगे कहा कि सरकारों को बहुलवादी समाज को कमजोर करने वाले कार्यों से बचना चाहिए, खासकर ऐसे कार्य जो धर्मनिरपेक्षता को ठेस पहुंचा सकते हैं.

केरल बीजेपी अध्यक्ष और नीमन से विधायक राजीव चंद्रशेखर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए वामपंथियों पर भारतीय संस्कृति और परंपराओं से दूरी बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मार्क्सवाद एक आयातित विचारधारा है जो भारतीय मूल्यों के अनुरूप नहीं है. चंद्रशेखर ने यह भी आरोप लगाया कि वामपंथियों का इतिहास अपने कार्यकर्ताओं को जय हिंद जैसे नारों के लिए माफी मांगने के लिए मजबूर करने का रहा है. उन्होंने एक्स पर कहा, 'राजनीतिक अस्तित्व के लिए भारत का अपमान करना धर्मनिरपेक्षता नहीं है। यह खतरनाक तुष्टीकरण की राजनीति और कट्टरपंथ को बढ़ावा देना है.'

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