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ट्रंप की चेतावनी के बाद जिनपिंग बने क्यूबा की ढाल, 65 साल पुराने तनाव में अब चीन क्यों कूदा?

क्यूबा को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है. ट्रंप की चेतावनी के बाद चीन ने क्यूबा का खुला समर्थन किया और अमेरिकी कदमों का विरोध किया है. क्यूबा में चीन की बढ़ती मौजूदगी इस टकराव को और गहरा बना रही है.

ट्रंप की चेतावनी के बाद जिनपिंग बने क्यूबा की ढाल, 65 साल पुराने तनाव में अब चीन क्यों कूदा?
  • US ने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर अमेरिकी नागरिकों की हत्या और विमान गिराने के आरोप लगाए.
  • चीन ने अमेरिका से क्यूबा पर कानूनी कार्रवाई और प्रतिबंध खत्म कर उसकी संप्रभुता का सम्मान करने को कहा है.
  • चीन और क्यूबा के बीच आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे संबंध मजबूत हो रहे हैं.
नई दिल्ली:

क्यूबा को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है. अमेरिका की ओर से सख्त रुख अपनाने और क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर गंभीर आरोप लगाने के बाद अब चीन खुलकर क्यूबा के समर्थन में उतर आया है. चीन ने साफ कहा है कि अमेरिका कानूनी कार्रवाई और प्रतिबंध बंद करे और क्यूबा की संप्रभुता का सम्मान करे. बीजिंग का यह बयान दिखाता है कि मामला अब केवल क्यूबा तक सीमित नहीं, बल्कि बड़ी ताकतों की सीधी टक्कर में बदल चुका है.

ट्रंप की चेतावनी क्या है मामला?

अमेरिका ने क्यूबा के कम्युनिस्ट नेता और पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर अमेरिकी नागरिकों की हत्या की साजिश और 1996 में दो विमानों को गिराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. इन आरोपों के बाद वाशिंगटन का रुख और सख्त हुआ, जिससे पुराने तनाव दोबारा उभर आए.

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चीन क्यों उतरा मैदान में?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यही है कि चीन अचानक इतना सक्रिय क्यों हुआ? असल में पिछले कुछ सालों में चीन और क्यूबा के संबंध तेज़ी से मजबूत हुए हैं. क्यूबा में चीन का निवेश बढ़ रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक सहयोग गहरा हुआ है.

कुछ अमेरिकी रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि चीन क्यूबा में निगरानी सुविधाएं (surveillance) विकसित करना चाहता है. ताकि वह अमेरिका की सैन्य गतिविधियों पर नजर रख सके. हालांकि चीन और क्यूबा दोनों इन दावों को खारिज करते रहे हैं.

क्यूबा क्यों बना रणनीतिक मोर्चा?

क्यूबा का भौगोलिक महत्व बेहद बड़ा है. यह अमेरिका के बेहद करीब स्थित है. शीत युद्ध के समय से ही यह क्षेत्र US vs विरोधी ताकतों का केंद्र रहा है. अब चीन का क्यूबा में बढ़ता प्रभाव अमेरिका के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है.

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आर्थिक संकट में क्यूबा, चीन दे सकता है सहारा

इस समय क्यूबा गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है. ईंधन की कमी, बिजली कटौती, खाद्य और दवाइयों का संकट, महंगाई और पलायन जैसी समस्याएं क्यूबा की जनता के सामने हैं.लऐसे में अगर चीन क्यूबा को आर्थिक या रणनीतिक मदद देता है, तो अमेरिका की चिंता और बढ़ेगी. साथ ही यह इलाका फिर से सुपरपावर तनाव का केंद्र बन सकता है.

नया ‘कोल्ड वॉर' सीन?

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि क्यूबा का मामला अब केवल एक देश का संकट नहीं बल्कि अमेरिका और चीन के बीच शक्ति संतुलन की लड़ाई बनता जा रहा है. अगर हालात ऐसे ही रहे तो यह टकराव नए कोल्ड वॉर जैसे माहौल को जन्म दे सकता है और क्यूबा फिर से वैश्विक राजनीति का हॉटस्पॉट बन सकता है.

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