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'न भूलने वाला गहरा घाव, 1 साल बाद भी सवालों के जवाब नहीं मिले' अहमदाबाद विमान हादसे में जिंदा बचे एकमात्र शख्स का दर्द छलका

Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद प्लेन क्रैश का एक साल हो गया है. इस विमान हादसे में यात्री समेत 260 लोग मारे गए, लेकिन सीट नंबर 11ए पर बैठे विश्वास कुमार रमेश चमत्कारिक ढंग से बच गए. उन्होंने एक इंटरव्यू में अपना दर्द जाहिर किया है.

'न भूलने वाला गहरा घाव, 1 साल बाद भी सवालों के जवाब नहीं मिले' अहमदाबाद विमान हादसे में जिंदा बचे एकमात्र शख्स का दर्द छलका
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PTI
  • अहमदाबाद विमान हादसे का 1 साल, इकलौते जिंदा बचे यात्री ने अपनी परेशानियां सामने रखीं
  • प्लेन क्रैश में 260 लोगों की मौत हुई थी, प्लेन उड़ान भरने के कुछ सेकेंड में धमाके के साथ गिरा, आग का गोला बना
  • विमान हादसे की वजह अभी तक साफ नहीं, अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवार वाले

Air India Plane Crash Ahmedabad: अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान हादसे का एक साल पूरा होने वाला है. 12 जून 2025 को हुए प्लेन क्रैश में 260 लोग मारे गए थे. इसमें 180 भारतीय यात्री, चालक दल के 19 सदस्य, करीब 50 ब्रिटिश नागरिक, पुर्तगाली और कनाडाई भी शामिल थे.अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 दोपहर 1.38 बजे के करीब उड़ान भरने के 32 सेकेंड के भीतर गोता लगाते हुए नीचे गिरी और धमाके के साथ आग के गोले में बदल गई. लाखों लीटर तेल के साथ आग की ऊंची लपटों में चमत्कारिक ढंग से एक यात्री विश्वास कुमार रमेश जिंदा बच गए थे. वो विमान के डैने के पास की सीट 11ए पर बैठे थे. प्लेन जैसे ही गिरा और दो हिस्सों में बंट गया और सब कुछ खाक होने के कुछ सेकेंड पहले रमेश बाहर निकलने में कामयाब रहे. प्रेस एसोसिएशन से बातचीत में उनका दिलोदिमाग का दर्द भी फिर छलका है.

प्लेन की 11A सीट और चमत्कार हुआ

विमान गिरने के पल भर में ही रमेश ने 11A नंबर की अपनी सीटबेल्ट खोली और विमान की बॉडी में बने एक अचानक खुले हिस्से से रेंगकर बाहर निकल गए. इससे दुर्घटना में उन्होंने अपनी जान बचाई. वो बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के अगले हिस्से में मौजूद इमरजेंसी एग्जिट वाली सीट 11A पर बैठे थे. एविएशन एक्सपर्ट के अनुसार, यह जगह विंग बॉक्स के पास होती है, जो हवाई जहाज के सबसे मजबूत हिस्सों में से एक होती है. अगर उन्होंने कुछ सेकेंड की देर की होती तो शायद वो भी धमाके के साथ आग की चपेट में आ गए होते.

हर पीड़ित परिवार को सच्चाई जानने का हक

गार्डियन में प्रकाशित प्रेस एसोसिएशन की बातचीत में रमेश ने कहा, 'अभी भी कई ऐसे अनसुलझे सवाल हैं जिनके जवाब उन्हें चाहिए. विमान दुर्घटना वाले दिन ही मेरा दुख खत्म नहीं हो गया था. मैं गहरे मानसिक घावों, अपने भाई को खोने के दुख और इस बात से जुड़े लगातार अनसुलझे सवालों के साथ जी रहा हूं कि यह सब कैसे और क्यों हुआ. मुझे पता है कि ये सवाल सिर्फ़ मेरे मन में नहीं हैं; ये हर उस परिवार के मन में हैं जो इससे प्रभावित हुआ है. सबसे ज़्यादा जरूरी है ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाब. जो हुआ उसे कोई नहीं बदल सकता, लेकिन परिवारों को सच्चाई जानने का हक है'

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प्लेन क्रैश में आग की ऊंची लपटों के बीच जिंदगी बची

आग की ऊंची लपटों और धुएं के गुबार के बीच उन्हें मामूली खरोंचे ही आई थीं और वहां से आराम से पैदल चलकर बाहर निकलने की उनकी तस्वीरें सुर्खियां बन गईं. ब्रिटेन के नागरिक विश्वास कुमार रमेश 20 सालों से लंदन में रह रहे थे. प्लेन क्रैश में उन्होंने अपने भाई को खो दिया.हादसे के बाद सदमे से उबरने में उन्हें काफी वक्त लगा. विमान यात्रा करने से डरे रमेश करीब ढाई महीने बाद सितंबर 2025 में वापस लंदन लौटे. गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, रमेश अब ब्रिटेन के लीस्टर शहर में दो बेडरूम के घर में रहते हैं. लेकिन शारीरिक और मानसिक परेशानियों की वजह से वो ज्यादातर घर में रहते हैं. परिवार में उनके साथ उनकी पत्नी और 5 साल का बेटा है.

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बगल में बैठे भाई की मौत

उस मनहूस फ्लाइट में कुमार के छोटे भाई अजय कुमार रमेश फ्लाइट (सीट संख्या 11J) में उनके साथ ब्रिटेन लौट रहे थे, लेकिन उनकी मौत हो गई. विश्वास खुद विमान में हादसे के वक्त आपातकालीन निकासी वाले द्वार (Emergency Exit) के पास सीट संख्या 11A पर बैठे थे, जिसके कारण वो जिंदा बच गए. रमेश का परिवार 25 साल पहले ब्रिटेन शिफ्ट हुआ था. दीव में एक फिशिंग का फैमिली बिजनेस भी था, जिसे दोनों भाई संभालते थे.

Ahmedabad Plane Crash

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गहरा मानसिक आघात लगा 

हादसे को एक साल होने को है और विश्वास कुमार रमेश की मानसिक सदमे से अभी तक उबर नहीं पाए हैं. वो इस भयानक हादसे के गहरे मानसिक सदमे और अकेले जिंदा बच जाने के अपराध बोध से जूझ रहे हैं. बीबीसी को कुछ वक्त पहले दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपना दर्द बयां किया था. आंखों के सामने भाई और सैकड़ों यात्रियों को खोने का गम उनके दिमाग पर गहरा असर हुआ. 

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भीड़भाड़ से दूर अकेले रहना पसंद

उन्होंने अब भीड़भाड़ से दूर खुद अकेले में रहना पसंद करते हैं. इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वो ज्यादातर अपने कमरे में बंद रहते हैं. डिप्रेशन के कारण अपनी पत्नी और बच्चे से भी ठीक से बातचीत नहीं कर पाते हैं. उन्होंने कहा था कि वो आज भी उसी भयानक पल में फंसे हुए महसूस करते हैं.

आर्थिक और शारीरिक परेशानियां भी रहीं

कुमार रमेश विमान हादसे के बाद आर्थिक और शारीरिक परेशानियों से जूझते रहे. उनके कंधे, पीठ, घुटने और बायें हाथ में चोटें आई थीं. शरीर में दर्द और मानसिक आघात के कारण वो काम पर वापस नहीं लौट पाए. गाड़ी चलाने में भी असमर्थ हैं. भाई के निधन और खुद शारीरिक परेशानियों होने की वजह से उनके फिशिंग बिजनेस को नुकसान पहुंचा. रमेश के प्रतिनिधि संजीव पटेल के मुताबिक, उनका पूरा परिवार एक वक्त तो 1000 पाउंड (करीब 1 लाख रुपये) में गुजारा करने को मजबूर है.एयर इंडिया, टाटा ग्रुप से भी उन्हें मुआवजा मिला. विश्वास का कहना है कि ब्रिटिश सरकार से उन्हें सीधी और विशेष सहायता नहीं मिली. 

Ahmedabad Air India Plane Crash

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विमान हादसे की वजह अब तक साफ नहीं

हादसे के जांचकर्ताओं ने अभी तक क्रैश की वजह की अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं की है. भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की शुरुआती रिपोर्ट में पाया गया कि टेक ऑफ के तुरंत बाद प्लेन के दोनों फ्यूल स्विच कट-ऑफ पोज़िशन में चले गए थे, जिससे इंजन तक फ्यूल की सप्लाई बंद हो गई.

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